13 वर्ष बीते, मेघालय के पास स्थायी विधानसभा भवन नहीं

By: | Last Updated: Friday, 10 January 2014 7:29 AM

शिलांग: मेघालय में 125 वर्ष पुराने बर्मा सागवान की लकड़ी से बने भवन को राख हुए 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी मेघालय के पास अभी तक अपना स्थायी विधानसभा भवन नहीं है. गुरुवार को ऐतिहासिक विधानसभा भवन की तबाही के 13 वर्ष पूरे हो गए. इन वर्षो में नए विधानसभा भवन के निर्माण में कोई प्रगति नहीं हुई है.

 

मार्च 2001 से विधानसभा का सत्र राज्य के केंद्रीय पुस्तकालय के प्रेक्षागार में आयोजित होता रहा और बाद में ब्रूकसाइड परिसर के कला एवं संस्कृति प्रेक्षागार में स्थानांतरित हो गया. इस भवन में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भारतीय साहित्यकार रविंद्रनाथ टैगोर ने 1919 में अपनी ‘शेषेर कोबिता’ लिखना शुरू किया था.

 

इन वर्षो में भवन निर्माण की कई योजनाएं बनीं. ख्यांडाई-लाड स्थित पुराने विधानसभा भवन स्थल और यहां तक मुख्यमंत्री के आवास तक को चुना गया, लेकिन सभी प्रस्ताव विरोध के कारण ठंडे बस्ते के हवाले कर दिए गए.

 

राज्य सरकार प्रस्तावित निर्माण पर कई करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है. यहां तक कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने मावडिआंगडिआंग में एक भवन बनवाने पर 2.14 करोड़ रुपये के खर्च पर विधानसभा सचिवालय की खिंचाई भी की.

 

विधानसभा अध्यक्ष अबू ताहिर मोंडल ने आईएएनएस से कहा, “हम अभी तक उपयुक्त भूमि की तलाश कर रहे हैं. जैसे ही उपयुक्त भूमि चिन्हित कर ली जाएगी तब हम राज्य सरकार से आवश्यक कार्रवाई के लिए संपर्क करेंगे और निर्माण कार्य शुरू होंगे.”

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Web Title: 13 वर्ष बीते, मेघालय के पास स्थायी विधानसभा भवन नहीं
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