6 साल के लंबे इंतजार के बाद एक नन को मिला इंसाफ

By: | Last Updated: Friday, 14 March 2014 12:48 PM

भुवनेश्वर: एक नन जिसे इंसाफ मिलने में सालों लग गए. ओडिशा की एक अदालत ने शुक्रवार को 2008 के सांप्रदायिक हिंसा के दौरान कंधमाल जिले की एक नन के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तीन लोगों को दोषी करार दिया.

 

कटक स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय ने मीतू पटनायक, गजेंद्र दिगाल और सरोज बढ़ई को दोषी करार दिया. इन सभी की सजा का ऐलान बाद में किया जाएगा.

 

29 वर्षीय कैथोलिक नन पर 24 अगस्त, 2008 को जिले के नुआगांव गांव में भीड़ ने हमला किया तथा सामूहिक दुष्कर्म किया था. यह घटना तब हुई थी, जब इलाके में सांप्रदायिक हिंसा चरम पर थी.

 

कंधमाल में यह हिंसा विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके चार सहयोगियों की आश्रम में हत्या कर दिए जाने के बाद भड़की थी. पुलिस ने शुरुआत में इसे नक्सली हमला करार दिया था.

 

इस हिसा में राज्यभर में 38 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों ईसाइयों को घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

 

नन के साथ हुए दुष्कर्म पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विरोध जताया गया था.

 

मामले की जांच कर रही राज्य पुलिस की अपराध शाखा ने 20 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था और चार आरोपपत्र दाखिल किए थे.

 

प्रथम चरण में अदालत ने नौ आरोपियों पर सुनवाई की और चार मार्च को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था. शुक्रवार की सुनवाई में तीन को दोषी साबित किया गया, लेकिन सबूत के अभाव में छह को रिहा कर दिया गया.

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Web Title: 6 साल के लंबे इंतजार के बाद एक नन को मिला इंसाफ
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