पीजीआई चंडीगढ़ अस्पताल में हर रोज जा रही पांच से अधिक नवजातों की जान

By: | Last Updated: Monday, 28 July 2014 6:21 AM

नई दिल्ली: देश के नामी गिरामी अस्पतालों में शुमार चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में हर रोज पांच से अधिक बच्चों की जान जा रही है. पिछले पांच साल में इस अस्पताल में 9,957 बच्चों की मौत हुई है.

 

सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुंसधान संस्थान, चंडीगढ़ (पीजीआईएमईआर) द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार अस्पताल में हर साल 1,800 से अधिक बच्चों की जान जा रही है.

 

अस्पताल द्वारा उपलब्ध कराया गया आंकड़ा 13 साल से कम उम्र के बच्चों की मौत से संबंधित है. इसके अलावा इस अस्पताल में पिछले पांच साल में 338 प्रसूताओं की भी मौत हुई है.

 

पीजीआईएमईआर के वरिष्ठ मेडिकल रिकॉर्ड अधिकारी एवं आरटीआई नोडल अधिकारी की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2009 में अस्पताल में विभिन्न बीमारियों से पीड़ित 1,810 बच्चों की मौत हुई.

 

वहीं, 2010 में 1,930 नौनिहालों की जान चली गई और साल 2011 में यह आंकड़ा बढ़कर 2,069 तक पहुंच गया. वर्ष 2009 से लेकर 2013 तक बच्चों की सबसे ज्यादा मौतें 2012 में हुईं जब यह आंकड़ा 2,087 तक पहुंच गया.

 

साल 2013 में अस्पताल में उपचार के दौरान 2,061 बच्चों की जान गई. आरटीआई कार्यकर्ता राजहंस बंसल के आवेदन के जवाब में अस्पताल द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में 2008 से लेकर 2012 तक 338 प्रसूताओं की मौत हो गई.

 

सीपीआईओ लखबीर धालीवाल की ओर से मुहैया कराए गए आंकड़ों के अनुसार 2008 में प्रसव के 4,517 मामलों में से 66 प्रसूताओं की मौत हो गई . वर्ष 2009 में प्रसव के 4,723 मामलों में से 68 प्रसूताओं की जान चली गई .

 

इसके अलावा वर्ष 2010 में प्रसव के 4,951 मामलों में 50 महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी, वहीं 2011 में प्रसव के लिए भर्ती हुई 4,968 महिलाओं में से 80 की जान चली गई. अस्पताल में वर्ष 2012 में प्रसव के 5,085 मामलों में से 74 महिलाओं की मौत हो गई.

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