Bhiwani police busted a gang who provided fake degree

भिवानी: फीस एक साथ लेकर फर्जी डिग्री देने वाले गिरोह का पर्दाफाश

भिवानी के गांव रूपगढ़ निवासी बिजेन्द्र ने थाना शहर भिवानी में शिकायत दर्ज करवाई थी कि राजस्थान के चुरू स्थित एक ओ.पी.जे.एस नामक एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी के कुछ कर्मचारी फर्जी डिग्री देने का धंधा चला रहे हैं. इस पर कार्यवाई करते हुए एसपी सुरेन्द्र सिंह भौरिया ने डीएसपी सिवानी संजय बिश्नोई के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया.

By: | Updated: 08 Apr 2018 07:01 AM
Bhiwani police busted a gang who provided fake degree

भिवानी: भिवानी पुलिस ने राजस्थान स्थित एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी से फर्जी डिग्री देने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर इस यूनिवर्सिटी के चार कर्मचारियों को कम्प्यूटर, लैपटॉप और कुछ रिकॉर्ड सहित गिरफ्तार किया है.


भिवानी के गांव रूपगढ़ निवासी बिजेन्द्र ने थाना शहर भिवानी में शिकायत दर्ज करवाई थी कि राजस्थान के चुरू स्थित एक ओ.पी.जे.एस नामक एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी के कुछ कर्मचारी फर्जी डिग्री देने का धंधा चला रहे हैं. इस पर कार्यवाई करते हुए एसपी सुरेन्द्र सिंह भौरिया ने डीएसपी सिवानी संजय बिश्नोई के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया.


एसपी के निर्देश पर एसआईटी ने गहनता से जांच की और संबंधित यूनिवर्सिटी में छापेमारी की. जांच के बाद यूनिवर्सिटी में कार्यालय में कई खामियां पाई गईं. एसआईटी ने यहां कार्यरत चार कर्मचारियों को गिरप्तार किया. पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी दीपक, नवीन, अनिल व कृष्ण ने अपना आरोप कबूला है. आरोपियों से कम्प्यूटर, लेपटॉप व अन्य रिकॉर्ड बरामद कर आगे की जांच की जा रही है.


एसआईटी हैड डीएसपी संजय बिश्नोई ने बताया कि इसी 5 अप्रैल को सिटी थाना में शिकायत मिली थी कि चुरू स्थित एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में कार्यरत कुछ कर्मचारी मोटे पैसे लेकर फर्जी डिग्री दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस शिकायत के आधार पर जब यूनिवर्सिटी में छापा मारा गया तो पाया गया कि यहां पर वास्तव में कुछ कर्मचारी मिलीभगत कर पैसे लेकर फर्जी डिग्री दे रहे हैं.


उन्होंने बताया कि इस शिकायत के आधार पर यूनिवर्सिटी में कार्यरत कलर्क स्तर के चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इसी संबंध में पुलिस ने रोहतक में भी छापेमारी की वहां से लैपटॉप, कम्प्यूटर और कुछ रिकॉर्ड बरामद किया.


डीएसपी संजय बिश्नोई ने बताया कि रोहतक में इस पूरे गोरखधंधे का हैड ऑफिस बनाया गया था, जहां से देश भर के युवाओं को ठगने के लिए फीस और अन्य कागजाद जमा करवाए जाते थे. उन्होंने बताया कि जो युवा बिना पढे़ लिखे और पेपर दिए बिना ही पास होने का इच्छुक होता उससे डिग्री के लिए तीन साल की फीस एक साथ लेकर फर्जी डिग्री दे दी जाती थी.


बीए की डिग्री के लिए करीब 22 हजार रुपए एक साल के हिसाब से वसुले जाते थे. डीएसपी ने बताया कि आरोपियों से अभी पूछताछ जारी है.

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