छोटा राजन: सिनेमा हॉल के बाहर टिकट ब्लैक करने वाले ने कैसे किया दाऊद की नाक में दम

By: | Last Updated: Tuesday, 27 October 2015 3:05 PM
CHHOTA RAJAN PROFILE

नई दिल्ली: छोटा राजन – भारत का मोस्ट वांटेड गुनहगार इंडोनेशिया के बाली में गिरफ्तार हो चुका है. आपका अपना चैनल एबीपी न्यूज आज आपको छोटा राजन की वो कहानी बताने जा रहा है जिसका नाता उसके बचपन से भी है और गुनाह की दुनिया में उसके पहले कदम से भी. लेकिन अगर आप सोच रहे हैं कि भारत छोड़ने के बाद वो अपनी जन्मभूमि चेंबूर को भूल गया तो आप गलत हैं. 

 

बीते ढाई दशकों में डॉन दाऊद इब्राहिम की टक्कर का कोई गैंग मुंबई अंडरवर्ल्ड में रहा है तो वह है छोटा राजन का गैंग. एक वक्त ऐसा आया कि राजन गिरोह ने अपनी गतिविधियां ना केवल मुंबई के बाहर भारत के अलग-अलग शहरों में चलानी शुरू कर दी बल्कि दुनिया के कई हिस्सों मे राजन गिरोह की ओर से ऑपरेशन किए गए.

 

राजन के नाम का शुमार भारत के बड़े अपराधियों की लिस्ट में हो गया लेकिन उसकी जिंदगी की कहानी का कोई भी सिरा हो वो मुंबई के उत्तर पूर्वी उपनगर चेंबूर से हमेशा जुड़ा रहा है.

आपने फिल्मों में सिनेमा हॉल के टिकट ब्लैक होते जरूर देखे होंगे. ये फिल्मी सीन छोटा राजन के गुनाह के पहले कदम की हकीकत जरूर बयां करता है. ये कहानी दरअसल टिकट ब्लैक करने वाले राजेंद्र सदाशिव निखलजे के कुख्यात डॉन छोटा राजन बनने की कहानी है.

 

भले ही छोटा राजन अंडर वर्ल्ड में एक बड़ा नाम बन गया हो लेकिन उसने अपने आपराधिक करियर की शुरुआत सिनेमा घर के बाहर टिकट ब्लैक करके की थी. 70 के दशक में सहकार नाम के इस सिनेमा घर के बाहर छोटा राजन टिकट ब्लैक किया करता था. उसे इस धंदे मे लाया था राजन नायर उर्फ बड़ा राजन.

 

बस यहां से छोटा राजन की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया. उसे काम नहीं नहीं बल्कि बड़ा राजन ने मुंबई के अंडरवर्ल्ड का खिलाड़ी बना दिया था. राजेंद्र नायर यानी बड़ा राजन ने चेंबूर में ही अपने साथ काम करते हुए गुनाहगारी की दुनिया के सारे गुर सिखाने शुरू कर दिए थे.

 

जिस चॉल मैं छोटा राजन अपने भाई बहनो के साथ पला बढ़ा उसकी जगह अब ऊंची ऊंची इमारतों ने ले ली है लेकिन छोटा राजन का परिवार अभी भी चेंबूर में ही मौजूद है. छोटा राजन भले ही विदेश में रह कर अपनी गैंग चला रहा था लेकिन उसके परिवार ने चेंबूर इलाका कभी नहीं छोड़ा. यह वह बंगला है जिस में छोटा राजन का छोटा भाई दीपक निकलजे और उसकी बहन सुनीता रहते हैं यही से कुछ दूरी पर छोटा राजन की पत्नी सुजाता अपनी बच्चियों के साथ रहती है.

 

छोटा राजन का अंडर वर्ल्ड में एक नाम नाना भी है. यह नाम उसे गुजराती बिल्डरो ने दिया था जिनसे की छोटा राजन वसूली करता था. कहा जाता है कि छोटा राजन भले ही भारत से बाहर जाकर अपना धंधा चलाता हो लेकिन चेंबूर की इस दुनिया में उसकी मौजूदगी की छाप आज भी है.

चेंबूर के तिलकनगर इलाके के इस मैदान में हर साल सहयाद्रि क्रीडा मंडल नाम की संस्था गणेशोत्सव मनाती है लेकिन यहां बिठाए जाने वाले गणपति मुंबई में छोटा राजन के गणपति के नाम से मशहूर है. भारत से भागने से पहले छोटा राजन यहां के गणेशोत्सव में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेता था और विदेश में रहने के बावजूद भी वो इस मंडल से जुड़ा रहा था हालांकि मंडल इस से इंकार करता है.

 

दाउद इब्राहिम 1984 में भारत से भागा. उस वक्त तक छोटा राजन दाऊद गिरोह का एक अहम सदस्य बन चुका था और दाऊद का सबसे भरोसेमंद आदमी बन गया था. दुबई में अच्छी तरह से अपने पैर जमा लेने के बाद दाउद इब्राहिम ने साल 1988 में छोटा राजन को भी साथ आ जाने के लिए कहा.

 

दाऊद के दुबई बुलावे के बाद छोटा राजन ने चेंबूर छोड़ दिया और दाऊद के साथ ही दुबई में रहने लगा. 1988 में ही आखिरी बार छोटा राजन को चेंबूर में देखा गया. इसके बाद सिर्फ शारजाह में होने वाले क्रिकेट मैच और दाऊद के बुलावे पर दुबई जाने वाले फिल्मी सितारों के साथ उसकी तस्वीरें नजर आईं.

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