झूठी गवाही तभी जब कुल मिलाकर तथ्य असंगत हों : कोर्ट

By: | Last Updated: Friday, 5 September 2014 1:23 PM

नई दिल्ली: दिल्ली की एक कोर्ट ने एक व्यक्ति को न्यायिक कार्यवाही में झूठी गवाही देने के आरोपों से यह कहते हुए बरी कर दिया है कि यदि बयान तर्कसंगत हैं तो किसी व्यक्ति को झूठी गवाही का दोषी नहीं ठहराया जा सकता.

 

एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सुधांशु कौशिक ने कहा, ‘‘यदि दो विरोधाभासी बयान हैं तो आरोपी को झूठी गवाही के लिए तभी दोषी ठहराया जाना चाहिए जब वे पूरी तरह से असंगत मिलते हैं.’’ जज ने कहा, ‘‘निष्कर्षों के मद्देनजर आरोपी राजेश तिवारी को भारतीय दंड संहिता की धारा 193 के तहत लगाये गए आरोप से बरी किया जाता है.’’ अभियोजन के अनुसार टैक्सी चालक राजेश तिवारी यहां 2007 में हुई एक सड़क दुर्घटना में मुख्य गवाहों में से एक था जो एक ट्रक और एक दूध टैंकर के बीच हुई थी.

 

अभियोजन ने कहा कि टैक्सी चालक ने 2009 में मुख्य मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष दिये अपने पहले बयान में कहा था कि ट्रक चालक तेज गति से लापरवाही से वाहन चला रहा था और उसने पहले दूध टैंकर और उसके बाद उसकी टैक्सी में टक्कर मारी थी.

 

यद्यपि 2011 में जिरह के दौरान तिवारी ने अपना रूख बदल लिया और कहा कि गलती दूध टैंकर चालक की थी.

 

मुख्य मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट की लिखित शिकायत के आधार पर तिवारी के खिलाफ शपथ लेकर झूठा बयान देने के आरोप में एक मामला दर्ज किया गया. तिवारी ने अपना गुनाह स्वीकार नहीं किया और कहा कि उसने दोनों बयान जानबूझकर नहीं दिये.

 

तिवारी के वकील ने दलील दी कि जिरह के दौरान दिये असंगत बयानों को झूठी गवाही करार नहीं दिया जा सकता और दोनों बयानों के बीच दो वर्ष का अंतर था.

 

अदालत ने तिवारी के दोनों बयानों को तर्कसंगत करार देते हुए कहा कि यद्यपि ट्रक चालक तेज गति से और लापरवाही से वाहन चला रहा था लेकिन दुर्घटना दूध टैंकर चालक की गलती से हुई.

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Web Title: court
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