निठारी कांड: न्यायालय ने मौत की सजा पाये कोली की पुनर्विचार याचिका खारिज की

By: | Last Updated: Tuesday, 28 October 2014 2:39 PM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने निठारी के बलात्कार और सिलसिलेवार हत्या के दोषी सुरिन्दर कोली की पुनर्विचार याचिका आज खारिज कर दी. कोली ने हत्या के मामलों में से एक में उसे दोषी ठहराने और उसकी मौत की सजा बरकरार रखने के निर्णय पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था.

प्रधान न्यायाधीश एच एल दत्तू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा, ‘‘हम पुनर्विचार याचिका खारिज करते हैं. हमे अपने पहले के फैसले पर पुनर्विचार के लिये इसमें कोई आधार नजर नहीं आता.’’ कोली की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया और कहा कि अभियुक्त का इकबालिया बयान ‘झूठा’ था और इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

 

उन्होंने कहा, ‘‘एक निर्दोष की जिंदगी किसी भी दूसरी चीज से अधिक महत्वपूर्ण है. मैं हतप्रभ हूं कि ऐसा न्यायपालिका में हो सकता है.’’ कोली के इकबालिया बयान का जिक्र करते हुये उन्होंने कहा कि अभियुक्त को पुलिस ने पीड़ितों के सिर्फ नाम ही नहीं बल्कि अपराध करने के तरीके को भी ‘याद करने’ के लिये कहा था.

 

अभियुक्त का यह भी कहना था कि उसे यातना दी गयी लेकिन इस तथ्य पर न तो निचली अदालत ने और न ही उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने गौर किया. जेठमलानी ने यह भी आरोप लगाया कि अभियोजन ने एक सर्जन की शव परीक्षण रिपोर्ट के बारे में महत्वपूर्ण सूचना दबा ली जिसमें कहा गया था कि शवों को सर्जिकल औजारों से काटा गया था. इस सर्जन से निचली अदालत में पूछताछ नहीं की गयी.

 

उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह ‘अंगों के कारोबार’ का मामला हो जिसे किसी चिकित्सक ने किया हो और जिसके लिये एक निर्दोष व्यक्ति को फांसी दी जा रही है. इस पर न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘आप (जेठमलानी) पहली बार इस मामले में नये तथ्य पेश कर रहे हैं. जहां तक इकबालिया बयान का सवाल है तो निचली अदालतों और उच्चतम न्यायालय ने इस पर विचार किया होगा.

 

शीर्ष अदालत ने आठ सितंबर को कोली को नोएडा के निठारी गांव के एक मकान में 2006 में बच्चों की हत्या के जुर्म में दी जाने वाली फांसी पर एक सप्ताह के लिये रोक लगा दी थी. बाद में 12 सितंबर को न्यायालय ने कोली की मौत की सजा पर अमल पर आज तक के लिये रोक की अवधि बढ़ा दी थी.

 

कोली को मेरठ में आठ सितंबर को फांसी दिये जाने से कुछ घंटे पहले ही वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दिरा जयसिंह के नेतृत्व में वकीलों के एक दल ने उसकी सजा पर रोक के लिये शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था. वकीलों ने न्यायालय के 24 जुलाई, 2014 के आदेश पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था. इस आदेश में न्यायालय ने कोली की मौत की सजा के अमल पर रोक लगाने का अनुरोध ठुकरा दिया था.

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Web Title: Court rejects petition to Koli ‘s death sentence
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