दिल्ली में हर दिन 6 अपराध करते हैं नाबालिग

By: | Last Updated: Monday, 1 December 2014 2:09 AM

नई दिल्ली: इसे कानून-व्यवस्था का मजाक कहें, या फिर नाबालिग कानून को अधिक सख्त बनाने के लिए विधिनिर्माताओं को संदेश? क्योंकि दिल्ली पुलिस के आंकड़े तो बताते हैं कि पिछले 10 माह के दौरान किशोरों ने प्रतिदिन औसतन छह अपराधों को अंजाम दिया, उन किशोरों ने जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम रही है.

आंकड़ों से पता चला है कि एक जनवरी से लेकर 31 अक्टूबर के बीच किशोरों ने 1,727 आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया है. इनमें छीना-झपटी, लूटपाट, डकैती, हत्या के प्रयास, हत्या और दुष्कर्म जैसे संगीन अपराध शामिल हैं.

 

किशोरों में डकैती सबसे आम अपराध है. दिल्ली में इस साल 31 अक्टूबर तक लूटपाट के 412 मामले दर्ज हुए हैं. दूसरे स्थान पर डकैती की वारदातें (360) हैं, इसके बाद सेंधमारी के 145 मामले दर्ज हुए हैं.

 

आईएएनएस के पास ये आंकड़े मौजूद हैं. इनमें बताया गया है कि पिछले 10 माह में किशोरों के खिलाफ 111 मामले जघन्य अपराधों के तहत दर्ज हैं. 70 किशोरों के खिलाफ हत्या के मामले दर्ज हैं जबकि, 74 को हत्या के प्रयास में आरोपी बनाया गया है.

 

इसके अलावा, किशोरों को 480 अन्य आपराधिक मामलों में लिप्त पाया गया है. आंकड़ों के मुताबिक 16-18 साल की उम्र के किशोर 60 फीसदी से अधिक मामलों में संलिप्त थे.

 

इसी साल राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े जारी हुए थे. इनमें बताया गया है कि किशोरों के खिलाफ 43,506 आपराधिक मामले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत दर्ज किए गए, जबकि 28,830 मामले विशेष स्थानीय कानून (एसएलएल) के अंतर्गत दर्ज हुए थे. इनमें से ज्यादातर आपराधिक वारदातों को 16 से 18 साल उम्र के किशोरों ने अंजाम दिया था.

 

एनसीआरबी के मुताबिक 2012 की तुलना में 2013 में आईपीसी और एसएलएल के तहत किशोरों के खिलाफ दर्ज मामलों में क्रमश: 13.6 और 2.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है.

 

अगस्त में केंद्रीय कैबिनेट ने किशोरों के लिए कानून में बदलाव सुझाए थे. नए किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2014 के मुताबिक किशोर बोर्डो को यह तय करने का अधिकार होगा कि दुष्कर्म और हत्या के मामलों में लिप्त 16 से 18 साल के किशोरों के साथ बच्चों की तरह व्यवहार किया जाए या फिर वयस्कों की तरह.

 

मौजूदा समय में यदि कोई आरोपी 18 साल से कम उम्र का है तो उसकी सुनवाई किशोर बोर्ड में होती है और अगर उसे दोषी पाया जाता है तो उसे तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेज दिया जाता है.

 

वहीं अगर किसी वयस्क को दुष्कर्म के आरोप में अभियुक्त पाया जाता है तो उसे उम्रकैद की सजा होती है और अगर उसी अपराध को वह दोहराता है तो उसे मृत्युदंड देने का प्रावधान है.

 

पुलिस उपायुक्त एस. बी. एस. त्यागी ने कहा, “यह बहुत ही चौंकाने वाला है कि अपराधियों के कुछ समूह लूटपाट, छीना-झपटी जैसे अपराधों के लिए किशोरों का इस्तेमाल करते हैं.

 

उन्हें पता है कि अगर वह पकड़ा भी गया तो किशोर होने के कारण उसे सख्त सजा नहीं मिलेगी और वह जल्द ही रिहा हो जाएगा.” उन्होंने कहा कि अभिभावकों द्वारा उचित देखभाल ही एक ऐसा उपाय है, जो किशोरों को अपराधों में लिप्त होने से रोक सकता है.

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Web Title: crime in delhi
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