दिल्ली हाईकोर्ट ने पिता के हत्यारे पुत्र को दी उम्र कैद की सजा

By: | Last Updated: Sunday, 12 October 2014 5:07 AM

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति को अपने पिता की गला घोंटकर हत्या करने के जुर्म में मिली उम्र कैद की सजा बरकरार रखी है. न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने दोषी मनमोहन को रिहा करने से इंकार करते हुये उसे उम्र कैद की सजा देने का निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा.

 

न्यायाधीशों ने कहा कि जिस समय पिता की मृत्यु हुयी उस समय सिर्फ अभियुक्त मनमोहन ही घर में मौजूद था. हालांकि उसने पिता की मृत्यु को स्वाभाविक मृत्यु बताने का प्रयास किया लेकिन वह इस बारे में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका. मनमोहन ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर अपील में कहा था कि उसे गलत दोषी ठहराया गया है क्योंकि इस हादसे के वक्त वह घर पर मौजूद ही नहीं था.

 

अभियोजन के अनुसार चिरंजीलाल का नंद नगरी इलाके में मकान था. वह इस मकान की पहली मंजिल में रहते थे जबकि उनका छोटा बेटा मनमोहन अपनी पत्नी के साथ भूतल पर रहता था. मनमोहन की पहली पत्नी का निधन हो जाने पर उसने दूसरी शादी की थी जो शायद उसके पिता और भाइयों को मंजूर नहीं थी.

 

इस वजह से पिता और पुत्र के बीच तनाव था. अभियोजन ने बताया कि चिरंजीलाल ने अपने बेटे से मकान खाली कराना चाहा और इसके लिये अदालत से बेदखली का आदेश भी हासिल कर लिया था.

 

इस वजह से पिता पुत्र के रिश्तों में बहुत खटास आ गयी थी. पुलिस ने बताया कि चिरंजीलाल बाहर ही खाना खाया करते थे. पिता पुत्र में अक्सर झगड़ा होता रहता था. मकान से बेदखली के आदेश के बाद मनमोहन ने 19 जून, 2007 को अपने पिता का गला दबा दिया था.

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Web Title: Delhi High Court granted sentenced to life imprisonment to son who killed his father
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