दिल्ली रोडरेज़: मेरे पापा को आखिर क्यों मारा?

By: | Last Updated: Monday, 6 April 2015 2:12 AM
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नई दिल्ली: दिल्ली एक बार फिर दागदार हुई है. दो मासूम बच्चों के सामने पिता की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. वजह सड़क पर कार और बाइक की मामूली सी टक्कर. ना पुलिस बचा पाई और ना ही लोग मदद के लिए आगे आ पाए. 10 साल का मासूम कैफ सवाल पूछ रहा है कि मेरे पापा को आखिर क्यों मारा?

 

ये एक बच्चे का गुस्सा है जिसकी आंखों के सामने पिता की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. चंद मिनटों में ही कैफ और फहाद की दुनिया उजड़ गई. मां को भरोसा ही नहीं हो रहा, बहन सवाल पूछ रही है. आखिर ऐसी कौन सी बात हो गई थी जिसके आगे एक जिंदगी सस्ती हो गई.

रविवार रात शाहनवाज अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मां-बाप के घर गया था. शाहनवाज का घर मिंटो रोड पर है जबकि माता-पिता कुछ दूर चांदनी महल इलाके में रहते हैं. रात करीब साढ़े ग्यारह बजे शाहनवाज अपने दोनों बच्चों के साथ बाइक पर घर लौट रहा था. शाहनवाज जब दरियागंज के तुर्कमान गेट के पास पहुंचा तो वहां उसकी बाइक की आई-20 गाड़ी से मामूली सी टक्कर हो गई. बस इतनी सी बात थी कि कार में मौजूद 4-5 लोगों ने शाहनवाज पर लात-घूंसों से हमला कर दिया.

 

इधर फहाद अपने पापा को बचाने के लिए पुलिस से मदद मांगने गया तो दस साल का छोटा सा कैफ अपने दादा-दादी के घर भागा.

 

करीब 35 साल का शाहनवाज electronic parts के कबाड़ की दुकान चलाता था. घर चलाने की जिम्मेदारी शाहनवाज के कंधों पर थी. आरोप है कि पास में ही रहने वाले कुछ लड़कों के हाथों शाहनवाज मारा गया. लेकिन न तो डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर मौजूद पुलिस चौकी में से मदद के लिए कोई पुलिस वाला पहुंचा और ना ही दिल्ली के किसी शख्स ने हिम्मत दिखाई.

कोई भी बचाने नहीं आया पुलिस से कहा वो भी नहीं आए, बोले हम नहीं आएंगे. बिल्डिंग का काम करते थे वो लोग. वो बहुत सारे लोग थे. करीब आधे घंटे या 15 मिनट तक मारपीट की. और कुछ नहीं देखा मैंने फिर मैं यहां आ गया.

 

घटना के बाद से इलाके के लोगों ने तुर्कमान गेट पर जमकर हंगामा किया. प्रदर्शन हो रहे हैं. इंसाफ की मांग हो रही है लेकिन अब तक सारे आरोपियों की गिरफ्तारी तक नहीं हुई है. इलाके में बढ़े हुए तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है.

 

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में जिस वक्त ये घटना हुई उस समय वहां ठीक ठाक भीड़ मौजूद होती है चश्मदीदों के मुताबिक शाहनवाज पर करीब 15 से 20 मिनट तक आरोपी हमला करते रहे. सवाल ये है कि मदद के लिए कोई हाथ आगे क्यों नहीं आया?

दिल्ली रोडरेज केस: मेरे पापा को क्यों मारा?  

दिल्ली में ये पहली बार नहीं हुआ है दिल्ली बार-बार इस तरह की घटनाओं से सन्न करती रही है. जब बार-बार सड़क के किसी मोड़ किसी चौराहे पर टक्कर महंगी और जिंदगी सस्ती साबित होती रही है.

 

शाहनवाज के तीन बच्चे हैं. घर से निकला था तो काले रंग की टीशर्ट पहन रखी थी. अब शाहनवाज नहीं हैं. परिवार के हाथों में शाहनवाज की फटी हुई टीशर्ट के टुकड़े हैं जिसमें कोई पिता का कोई पति का तो कोई बेटे का वजूद तलाशने की कोशिश कर रहा है.

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