पत्नी का पब जाना तलाक का आधार नहीं: कोर्ट

By: | Last Updated: Saturday, 10 January 2015 2:04 PM

मुंबई: बंबई हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति को क्रूरता के आधार पर तलाक देने से इंकार किया. इस व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी अपने बच्चे को देखभाल के लिए नौकरानी के पास छोड़कर अक्सर पब जाती है और उसका तथा उसके माता पिता का अक्सर अपमान करती है.

 

न्यायमूर्ति विजय ताहिलरमानी और न्यायमूर्ति अनिल मेनन की खंडपीठ ने हाल में परिवार अदालत के आदेश को बरकरार रखा जिसने इस व्यक्ति को तलाक देने से मना कर दिया था. अदालत ने कहा था कि उसकी पत्नी की तरफ से इस तरह का व्यवहार क्रूरता नहीं है.

 

पीठ ने इस व्यक्ति द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘‘हमारे नजरिये में, परिवार अदालत ने सबूतों को समझा और वह सही ठहराने योग्य इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अपीलकर्ता यह साबित करने में नाकाम रहा कि पत्नी ने उसके साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया.’’ पति ने उसकी पत्नी द्वारा दुर्व्यवहार, लोगों से ज्यादा मिलने, पब और डिस्को जाने, अपने बच्चे को नजरअंदाज करने, फूलदान मारने, गर्म चाय फेंकने, झूठे आरोप लगाने तथा हनीमून के दौरान नखरे दिखाने के आधार पर क्रूरता का दावा किया.

 

अदालत को बताया गया कि दंपति की 20 साल पहले शादी हुई थी और वे बीते 16 वर्ष से अलग अलग रह रहे हैं. शुरूआती चार वर्षों में जब वे साथ साथ रहते थे, उनके एक बच्चा हुआ जो अब बालिग है और पिता के संरक्षण में है.

 

अदालत ने कहा कि पति द्वारा बताई गई यह घटना कि उसकी पत्नी विदेश में हनीमून के दौरान गुस्से में नखरे दिखाते हुए होटल के कमरे में लौट गई, क्रूरता नहीं है.

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Web Title: divorce
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