घरेलू हिंसा मामला: अदालत ने पत्नी को झगड़ालू बताते हुये पति को किया बरी

By: | Last Updated: Sunday, 21 December 2014 5:33 AM

नई दिल्ली: एक स्थानीय अदालत ने दहेज की खातिर पत्नी को शारीरिक और मानसिक यातना देने के आरोप से बरी कर दिया है. अदालत ने कहा कि यह दहेज की मांग का मामला नहीं बल्कि विवाद की वजह महिला का झगड़ालू स्वभाव है.

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मोना टार्डी कर्केट्टा ने दिल्ली निवासी व्यक्ति को उसकी और उसके बच्चों की गवाही पर भरोसा करते हुये भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए (क्रूरता) और धारा 406 (विश्वासघात) के आरोपों से बरी कर दिया. इन सभी ने अपनी गवाही में कहा था कि समस्या शिकायतकर्ता की तुनकमिजाजी है.

 

मजिस्ट्रेट ने कहा कि अदालत का मत है कि आरोपी (पति) यह बताने में सफल रहा है कि विवाद की वजह दहेज की मांग नहीं बल्कि शिकायतकर्ता की तालमेल बिठाने में असमर्थता और उसका झगड़ालू स्वभाव है. इस मामले में महिला के ससुराल वालों को अदालत ने पहले ही आरोप मुक्त कर दिया था.

 

अदालत ने पति को बरी करते हुये इस तथ्य का भी संज्ञान लिया कि महिला ने शिकायत दर्ज कराने में 18 दिन से अधिक का विलंब किया है. अभियोजन के अनुसार एक सितंबर, 2006 को महिला ने अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ दहेज की खातिर शारीरिक और मानसिक यातना देने का आरोप लगाया था. इस महिला का 1989 में विवाह हुआ था.

 

उसका आरोप था कि उसके ससुर ने उससे छेड़छाड़ की और ससुराल के अन्य सदस्य उसके खिलाफ बच्चों को भड़काते हैं. उसका यह भी कहना था कि बच्चे भी उसकी पिटाई करते हैं. इस महिला ने महिलाओं के प्रति अपराध प्रकोष्ठ में शिकायत दायर की थी जहां सुलह की कार्यवाही शुरू की गयी थी लेकिन विवाद का हल नहीं निकल सका था.

 

इसके बाद पति और ससुराल के अन्य सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. सुनवाई के दौरान पति ने दावा किया कि उसे इस महिला ने झूठा फंसाया है जबकि हकीकत तो यह है कि वहीं जरा जरा सी बात पर सबसे झगड़ा करती है.

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Web Title: domestic violence
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