एबीपी न्यूज़ की पड़ताल: 'बिल्डर बाबा' कैसे बन सकता है महामंडलेश्वर?

By: | Last Updated: Tuesday, 4 August 2015 2:45 PM
mahamandleshwar

नई दिल्ली: एक तरफ मायावी दुनिया, दूसरी तरफ अध्यात्म का संसार.  पहली नजर में दोनों एक दूसरे के विरोधी, दोनों का एक दूसरे से रिश्ता नाता नहीं लेकिन एक शख्स में जीवन के दोनों भाव समाहित हैं. और ये शख्स हैं महामंडलेश्वर सच्चिदानंद गिरी.

 

संतों की तपोभूमि प्रयाग में शुक्रवार को एक भव्य आयोजन में पूरे धार्मिक रीति रिवाज के साथ सच्चिदानंद को महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई. सच्चिदानंद गिरी करते क्या थे ?.

 

सच्चिदानंद गिरी डिस्को, बीयर बार और रियल एस्टेट के धंधे को संभालते थे. आरोप है कि करोड़ों के कर्ज से बचने के लिए सचिन से सच्चिदानंद बन गए सचिन दत्ता. ऐसे में सवाल उठता है कि एक विवादास्पद व्यक्ति को आखिर क्यों बनाया गया निरंजनी अखाड़ा का महामंडलेश्वर?.

 

ये हैं कैलाशानंद महाराज. कैलाशानंद खुद हरिद्वार के पीठाधीश्वर और महामंडलेश्वर हैं. कहा जा रहा है कि कैलाशानंद ने सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर बनाने का प्रस्ताव दिया. आखिर कैसे एक पीठाधिश्वर बिना जांच के एक विवादास्पद कारोबारी को महामंडलेश्वर बनाने का प्रस्ताव कर सकता है.

 

एक महामंडलेश्वर बनने के लिए के लिए व्यक्ति में साधु संतों का गुण होना चाहिए. व्यक्ति को सनातन धर्म का पूरा ज्ञान होना चाहिए. फिर एक कारोबारी साधु संतों से महज दो साल के संपर्क के बाद कैसे महामंडलेश्वर बन सकता है?  आरोपों से घिरने के बाद सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर के पद से छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया है.

और मामले की जांच तक वो नासिक महाकुंभ में भी शामिल नहीं हो सकेंगे- सवाल उठता है कि बिना किसी जांच के सचिन को सच्चिदानंद क्यों बना दिया गया. सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर बनाने के समय कहा गया था कि अखाड़ा के संत उन्हें 20-22 साल से जानते हैं. लेकिन कैलाशानंद का कहना है कि वो उन्हें सिर्फ दो साल से जानते हैं. सचिन दत्ता जब पहली बार कैलाशानंद से मिले थे तब सचिन नशे में डूबे हुए थे.

 

सच्चिदानंद के बचाव में खुलकर उतर चुके हैं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी भी.  इनका तर्क है कि महामंडलेश्वर बनने से पहले सच्चिदानंद क्या करते थे, उससे संत समाज का लेना देना नहीं हैं.  महामंडलेश्वर सच्चिदानंद अब समाज की सेवा करने की बात कर रहे हैं लेकिन उनका पुराना बिजनेस अब भी बदस्तूर जारी है. उनके परिवार के लोग इस कारोबार को संभाल रहे हैं.

 

गाजियाबाद के रहने वाले सचिन दत्ता उर्फ महामंडलेश्वर सच्चिदानंद की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं. नोएडा के सेक्टर 41 में रहनेवाले सचिन दत्ता दो साल पहले तक नोएडा के सेंटर स्टेज मॉल में डिस्को पब चलाते थे. बालाजी ग्रुप बनाकर एनसीआर में प्रॉपर्टी का बिजनेस करते थे.

 

सचिन दत्ता अपने पास लाइसेंसी गन रखते थे और साल 2014 में इन्होंने गनर पाने के लिए पुलिस से कहा था कि कुछ लोगों ने इनपर फायरिंग की है लिहाजा सुरक्षा के लिए इन्हें गनर मुहैया कराया जाए. बाद में जब पुलिस ने मामले की जांच की तो पता चला कि सचिन दत्ता ने फायरिंग की झूठी कहानी सुनाई थी. 

 

सचिन दत्ता के खिलाफ पंजाब पुलिस ने भी एफआईआर दर्ज कर रखी है और उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी है लेकिन सचिन दत्ता इन सबसे दूर अब धर्म के मंच पर स्थान बना चुके हैं.

 

कैसे बनते हैं महामंडलेश्वर

सनातन धर्म पर किसी भी तरह का संकट का सामना करने के लिए दशनामी संन्यासियों ने महामंडलेश्वर का पद बनाया था. इस पद के लिए कुछ योग्यताएं तय की गई हैं.

 

महामंडलेश्वर ऐसे व्यक्ति को ही बनाया जा सकता है जो, साधु चरित्र और शास्त्रीय पांडित्य दोनों लिए समान रूप से विख्यात हो. ऐसे लोगों को पहले परमहंस कहा जाता था. 18वीं शताब्दी से उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि दी जाने लगी.

 

बाद में महामंडलेश्वर की पदवी धारण करने वाले सर्वश्रेष्ठ आचार्य को आचार्य महामंडलेश्वर कहा जाने लगा. आचार्य महामंडलेश्वर किसी भी अखाड़े का सबसे उंचा ओहदा होता है. इसलिए अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर और रमता पंच दोनों के चादर ओढाने के बाद ही कोई संन्यासी महामंडलेश्वर बनता है.

 

एबीपी न्यूज़ की पड़ताल: महामंडलेश्वर बिकता है?

SPECIAL REPORT: कैसे बनते हैं महामंडलेश्वर?

ये हैं ‘बिल्डर बाबा’ के सताए हुए 

Crime News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: mahamandleshwar
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: mahamandleshwar sachin dutta
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017