'मोदी ने भले ही अपराध किया था पर अब प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकती'

By: | Last Updated: Monday, 30 June 2014 2:30 PM

अहमदाबाद: अहमदाबाद की एक अदालत ने कहा कि साल 2012 के विधानसभा चुनाव लड़ने के दौरान अपनी वैवाहिक स्थिति का खुलासा न कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही अपराध किया था पर ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए निश्चित समयसीमा होने के कारण इस संबंध में दायर याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता.

 

अहमदाबाद (ग्रामीण) अदालत के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एम एम शेख ने आम आदमी पार्टी के नेता निशांत वर्मा की तरफ से दायर अर्जी का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया. वर्मा ने 2012 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी द्वारा दाखिल नामांकन-पत्र में अपनी वैवाहिक स्थिति ‘‘छुपाने’’ का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी.

 

अदालत ने मोदी की वैवाहिक स्थिति के मुद्दे पर कहा, ‘‘तथ्यों का खुलासा न करने से जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 125 (ए) (3) के तहत अपराध किया गया.’’ जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 125 (ए) (3) में नामांकन दाखिल करते वक्त सूचना छुपाने के लिए दंड का प्रावधान है और इसमें दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की जेल की सजा हो सकती है.

 

बहरहाल, अदालत ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 468 (2) (बी) के मुताबिक, जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 125 (ए) (3) के उल्लंघन से जुड़े मामलों में अपराध की शिकायत एक साल के भीतर करनी होती है.

 

अदालत ने कहा कि चूंकि कथित अपराध होने के एक साल चार महीने के बाद शिकायत दर्ज कराई गई है, ऐसे में ‘‘शिकायत का संज्ञान नहीं लिया जा सकता और अब प्राथमिकी नहीं दर्ज की जा सकती.’’

 

सीआरपीसी की धारा 468 ऐसे गैर-गंभीर मामलों पर लागू होती है जिसमें तीन साल से ज्यादा की जेल की सजा का प्रावधान नहीं हो. सीआरपीसी की धारा 468 के मुताबिक, ‘‘समयसीमा खत्म होने के बाद कोई भी अदालत इस तरह के अपराध का संज्ञान नहीं ले सकती.’’ धारा 468 (2) (बी) के मुताबिक, जिन मामलों में एक साल से ज्यादा की जेल की सजा नहीं होती उनमें घटना के एक साल के भीतर शिकायत दर्ज करानी होती है. जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 125 (ए) (3) के उल्लंघन के दोषी को अधिकतम छह महीने जेल की सजा होती है. वर्मा ने इस साल अप्रैल में उस वक्त अदालत का दरवाजा खटखटाया था जब रानिप पुलिस थाने के अधिकारियों ने मोदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का उनका अनुरोध ठुकरा दिया था . वर्मा ने 2012 के चुनावी हलफनामे में मोदी द्वारा अपनी वैवाहिक स्थिति ‘‘छुपाने’’ के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था . ‘आप’ नेता ने उस वक्त हलफनामा स्वीकार करने के लिए मणिनगर विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी पी के जडेजा के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग की थी.

 

इस साल वड़ोदरा लोकसभा लोकसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल करते हुए मोदी ने पहली बार खुलासा किया कि उनकी पत्नी का नाम जशोदाबेन है . पहले गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान वह जीवनसाथी के कॉलम को खाली छोड़ दिया करते थे .

 

वर्मा के वकील के आर कोश्टी ने कहा कि वह इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे .

 

कोश्टी ने कहा, ‘‘हम आदेश को चुनौती देंगे . यहां तक कि अदालत ने भी कहा कि मोदी ने अपराध किया है . चूंकि हमने निश्चित समयसीमा के बाद अर्जी दायर की थी, इसलिए उसे खारिज कर दिया गया . अब हम सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल करने पर विचार कर रहे हैं .’’

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Web Title: narendra modi_maraital status
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