कटारा हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने भी विकास, विशाल और सुखदेव को दोषी ठहराया

By: | Last Updated: Monday, 17 August 2015 1:59 PM
nitish katara murder case

फाइल फोटो: नीतीश कटारा

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने 2002 के सनसनीखेज नीतीश कटारा हत्याकांड में दोषी विकास यादव, उसके चचेरे भाई विशाल यादव और सुखदेव पहलवान की दोषसिद्धि आज बरकरार रखते हुये कहा कि इस देश में , ‘‘सिर्फ अपराधी ही न्याय की गुहार’’ लगाते हैं.

 

शीर्ष अदालत ने विकास और सुखदेव की अपील पर नोटिस जारी किये बगैर ही निचली अदालत और दिल्ली उच्च न्यायालय के निष्कषरे को बरकरार रखा लेकिन वह इन तीनों की सजा की अवधि बढ़ाने संबंधी उच्च न्यायालय के निर्णय पर विचार करने के लिये सहमत हो गयी.

 

उच्च न्यायालय ने इन दोषियों के लिये उम्र कैद की सजा को ‘‘साधारण’’ करार देते हुये उनकी सजा की अवधि बढा दी थी. न्यायालय ने इन तीनों अपराधियों की सजा में बगैर किसी छूट के विकास और विशाल की सजा बढ़ाकर 30 साल और सुखदेव यादव उर्फ पहलवान की सजा की अवधि बढ़ाकर 25 साल कर दी थी.

 

न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ और न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की पीठ ने करीब दो घंटे तक वरिष्ठ अधिवक्ता यू आर ललित सहित वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश में किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यता नहीं है. हालांकि न्यायालय ने तीनों मुजरिमों को दिये गये दंड के दायरे के मामले में दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया. न्यायालय ने दिल्ली सरकार से छह सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है. सुनवाई शुरू होते ही ललित ने कहा कि तीनों दोषियों को मृतक के सिर पर लगी चोट के जुर्म में उम्र कैद की सजा सुनायी गयी है, इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि ‘‘ऑनर किलिंग्स’ में यह सब होता है.

 

पीठ ने इसके बाद निचली अदालत में अभियोजन के लगभग सभी गवाहों के अपने बयानों से ‘मुकर जाने’ का जिक्र किया और कहा, ‘‘इससे पता चलता है कि आपकी कितनी ताकत है.’’ न्यायालय ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया कि अभियोजन का मुख्य गवाह अजय कटारा ‘‘एक मनगढंत’’गवाह था. अजय कटारा ने ही गाजियाबाद में हापुड़ चुंगी पर 16-17 फरवरी, 2002 की रात में टाटा सफारी कार में तीनों अभियुक्तों के साथ पीड़ित को अंतिम बार जीवित देखा था. पीठ ने कहा कि सभी गवाह अपने बयान से मुकर गये थे और सिर्फ इसी व्यक्ति ने अभियुक्तों के खिलाफ बयान दर्ज कराया था और ‘‘आप इसकी गवाही को चूर चूर करना चाहते हैं. आप हमें कुछ सुस्पष्ट दिखाइये. अन्य हम आपके पक्ष में नहीं हैं.’’

 

न्यायालय ने कटारा की गवाही को भरोसेमंद बताते हुये कहा कि इस व्यक्ति ने ‘‘जबर्दस्त साहस’’ दिखाया और ‘‘यदि आप :वकील: अजय कटारा की गवाही को काट नहीं सकते है तो हम आपके साथ नहीं हैं.’’ हालांकि ललित ने न्यायाधीशों को संतुष्ट करने का भरसक प्रयास किया कि इस गवाह का, जो शाहदरा में रहता है, स्कूटर हापुड़ चुंगी के निकट देर रात 12.30 बजे के आसपास बीच सड़क पर खराब हो गया था जिस वजह से टाटा सफारी को उसके पीछे रूकना पड़ा था.

 

ललित ने कहा कि एक व्यक्ति, जिसे अपने किराये के मकान का पता भी याद नहीं, इस घटना के एक महीने बाद पुलिस के पास पहुंचता है और बयान देता है कि वह तीनों अभियुक्तों को पहचानता है जिनकी तस्वीरें टेलीविजन चैनलों सहित हर जगह थीं. उन्होंने दलील दी कि अजय ‘‘भेजा हुआ‘‘गवाह था.

 

उन्होंने अजय के झूठ बोलने के अपने तर्क के समर्थन में जांच अधिकारी अनिल समानिया की गवाही का भी हवाला दिया लेकिन न्यायालय ने इन दलीलों को ठुकरा दिया. निचली अदालत में अजय कटारा की नजर के बारे में महत्वपूर्ण सवाल पूछने की अनुमति नहीं दिये जाने के आरोप के बारे में न्यायालय ने टिप्पणी की, ‘‘यदि वह आधी रात में स्कूटर चला सकता है, यदि वह सड़क पर देख सकता है तो वह आप सबको भी देख सकता है. इससे कुछ हल नहीं होता.’’

 

पीठ ने दोषियों पर ‘‘न्यायिक’’ समय बर्बाद करने का आरोप लगाते हुये कहा कि उच्च न्यायालय ने उन्हें पर्याप्त अवसर प्रदान किया है. पीठ ने कहा, ‘‘यह अजीबो गरीब मामला है जिस वजह से हम आपको सुन रहे हैं. अन्यथा हमने आधे घंटे पहले ही इसे अस्वीकार कर दिया था.’’

 

न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘आपने सभी गवाहों को मुकरने के लिये बाध्य किया. यह आदमी डटा रहा. आप इसे भी चूर चूर करना चाहते हैं. यहां तक कि लड़की ने भी तस्वीरें और ई-मेल सामने आने से पहले तक हर बात से इंकार किया था. कल्पना कीजिये, खौफ के पैमाने की, आपने पैदा किया. इस देश में ऐसे ही हो रहा है. सिर्फ अपराधी ही न्याय के लिये शोर कर रहे हैं. वह :दोषी: किस किस्म की निष्पक्षता की अपेक्षा करते हैं.’’ सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने दोषियों के वकील से कई बार कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश और रिकार्ड में कोई तो ‘त्रुटि’ दिखाये.

 

न्यायालय ने सुखदेव पहलवान की दलील अस्वीकार करते हुये कहा, ‘‘आप तो अपने मालिक (यादव) के ईमानदार सेवक हैं परंतु आपकी समस्या यह है कि आपने अपराध में उनकी मदद की. आपका हश्र भी वही होगा. आप साथ ही तैरेंगे या डूबेंगे.’’

 

 उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि विकास की बहन से प्रेम करने वाले नीतीश कटारा की ‘‘परिवार की शान की खातिर हत्या’’ की गयी थी. यह अपराध ही सुनियोजित तरीके से और अत्यधिक प्रतिशोधात्मक तरीके से किया गया था.

 

न्यायालय ने विकास और विशाल पर जुर्माने की राशि भी बढ़ाकर 54-54 लाख रूपए कर दी थी जिसे छह सप्ताह के भीतर निचली अदालत में जमा कराना था.

 

उच्च न्यायालय ने इस राशि में से 50 लाख रूपए दिल्ली सरकार और 10 लाख रूपए उप्र सरकार में वितरित करने तथा 40 लाख रूपए नीतीश कटारा की मां नीलम कटारा को देने का निर्देश दिया था.

 

विकास और विशाल तथा सुखेदव को निचली अदालत ने मई, 2008 में कटारा के अपहरण और हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सजा सुनायी थी क्योंकि वे पीड़ित के उप्र के नेता डी पी यादव की पुत्री भारती से प्रेम के खिलाफ थे.

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Web Title: nitish katara murder case
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