सनसनी: मेरा भाई मेरा कातिल!

By: | Last Updated: Sunday, 23 August 2015 5:30 PM
sansani

(ये कहानी मऊ, उत्तर प्रदेश की एक सत्य घटना पर आधारित है. ये कहानी पुलिस की अब तक की तफ्तीश पर आधारित है. कहानी में नाम और संवाद काल्पनिक हैं)

 

सुनील कुमार यादव, यही नाम था उसका, जेल की बैरक में भी यूं घूम रहा था मानो किसी शिकार पर निकला हो, कोई डर नहीं, कोई पछतावा नहीं. होता भी कैसे, उसने जो किया था उस पर उसे फक्र हो रहा था चाहे फिर वो कानून और समाज की नजर में गुनाह था. उसे दुनिया से कोई मतलब नहीं था. सुनील खुद को उत्तर प्रदेश के मऊ जिले का दबंग समझता था.

 

उसका मानना था कि कोई कानून उसे नहीं रोक सकता. वो जो करता था उसे ही सही मानता था. सुनील पर हत्या का केस चल रहा था और फुलहाल वो पुलिस की हिरासत में था. अकसर उसके दो चेले उससे मिलने जेल में आया करते थे.

 

उस दिन भी सुनील हमेशा की तरह शाही ठाठ के साथ अपने बैरक के अंदर से अपने इलाके के हालचाल सुन रहा था. उसका चेला मुकेश तो खूब किस्से सुना रहा था लेकिन पवन आज कुछ चुप था. उसके दिमाग में कोई बात थी जो वो सुनील से छुपा रहा था.

 

सुनील: ऐ पवन, जेल में हम हैं 9 महीने से तो फिर तुम क्यों शोक मना रहे हो?

इतना कह कर सुनील जोर से हंसने लगता है, उसके साथ मुकेश भी हंसने लगता है, लेकिन पवन हंसता नहीं है उल्टा मुकेश को गुस्से में घूरता है. पवन को गुस्से में देख मुकेश चुप हो जाता है

 

पवन: कुछ नहीं भइया आप जेल से बाहर आ जाओ. फिर बात करेंगे.

सुनील: ऐसी क्या बात हो गई है.

सुनील भी अब थोड़ा सीरियस हो जाता है. पवन मुकेश को वहां से जाने का इशारा करता है. फिर सुनील की ओर देख कर उसे सारी कहानी बताता है.

 

पवन: भइया हम आपको जेल में परेशान नहीं करना चाहते थे. पर बात ही कुछ ऐसी है.

सुनील: पहेली ही करते रहोगे या कुछ बोलोगे भी.

पवन: भइया वो राजू.

सुनील: राजू. क्या किया वो राजू. अब क्या किया उसने.

पवन: भइया. वो राजू अपनी हरकतों से बाज नहीं आया है. इतना सब कुछ कर दिया आपने लेकिन वो है कि

सुनील: ऐ पवन. तू हमको गुस्सा मत दिला. साफ साफ बोल हुआ क्या है.

पवन: भइया वो राजू

 

इतना कह कर पवन सुनील को सारा किस्सा बता देता है. पवन की बात सुनते सुनते ही सुनील का पारा हाई हो जाता है. वो बैरक में गुस्से में भरे सांड की तरह घूमने लगता है.

 

सुनील: क्या??

पवन की बात सुनते ही सुनील एक फैसला करता है. एक खौफनाक फैसला.

 

सुनील: पवन वकील से बात कर. मुझे जल्दी से जल्दी जमानत चाहिए. जेल से बाहर आना बहुत जरूरी है मेरा. जा जल्दी.

पवन: भइया एक बार सोच लो.

सुनील: सोच लूं. क्या सोच लूं. उस राजू को तो मैं अब छोड़ूंगा नहीं. तू मेरी जमानत का इंतजाम कर औ उस राजू पर नजर रख. एक कट्टे का भी इंतजाम करके रख. मैं जल्द इस खेल को हमेशा के लिए खत्म कर दूंगा. जा पवन. जल्दी जा.

 

सुनील ने जैसा कहा था पवन ने वैसा ही किया. बड़ी मुश्किल से कुछ दिन बाद सुनील की जमानत हो पाई. पवन और मुकेश दोनों जेल के बाहर सुनील को लेने पहुंचते हैं. गुस्से में आग बबूला सुनील आते ही अपने दुश्मन राजू के बारे में उनसे पूछता है.

 

सुनील: कट्टे का इंतजाम हुआ?

पवन: हां भइया.

सुनील: राजू पर नजर रखी थी?

मुकेश: जी भइया. वो अपनी बोलेरो गाड़ी चलाता है, शिक्षा विभाग के अघिकारी के लिए तो सारा वक्त उसकी गाड़ी में पुलिस वाले भी रहते हैं.

 

मुकेश की ये बात सुनकर सुनील अचानक रुक कर गुस्से में मुकेश का कॉलर पकड़ लेता है

 

सुनील: पुलिस के नाम से हमको डरा रहा है?

मुकेश: नहीं भइया हम तो बस आपको बता रहे थे.

सुनील: नजर रखो, 24 घंटे, जैसे ही पुलिस वाले उसकी गाड़ी से उतर जाएं तो मौका देख कर हमको बताना. समझा.

मुकेश: हां भइया

सुनील: चल पवन

 

इतना कहकर सुनील पवन के साथ वहां से चला जाता है. कुछ दिन वो सही मौके का इंतजार करता है. लेकिन जैसे जैसे दिन बीतने लगते हैं सुनील का सब्र खत्म होने लगता है. वो अपने दुश्मन राजू से बदला लेने के लिए बेकरार हो रहा था. एक दिन जब वो पवन के साथ बाजार में पनवाड़ी के पास पवन के साथ खड़ होकर पान खा रहा था. तभी पवन का फोन बजता है. पवन फोन उठाता है. वो कॉल मुकेश का ही होता है.

 

पवन: हां मुकेश, अच्छा नहीं भइया हमारे साथ ही हैं. तुम वहीं रुको. हम आ रहे हैं. (फोन रख कर) चलिए भइया. लगता है आज काम हो जाएगा.

सुनील: कट्टा कहां हैं?

पवन: कट्टा तो हम उस दिन से हर वक्त अपने पास ही रखते हैं भइया.

सुनील: तो फिर चल आज तो खेल कर ही देंगे

 

इसी बात पर पवन देसी कट्टा निकाल कर सुनील को दे देता है,  दोनों बाइक पर बैठ कर वहां से निकल जाते हैं. वहां से बीच रास्ते में मुकेश को लेते हैं. मुकेश इशारों में दोनों को राजू के बारे में बताता है. तीनों जल्द ही राजू की गाड़ी के पास पहुंच जाते हैं. राजू बोलेरो चला रहा होता है. बाइक पीछे से आती है और बोलेरो के आगे आकर रुकती है. बोलेरो में तेज ब्रेक लगते हैं.

 

राजू हक्का बक्का रह जाता है. उसे समझ नहीं आता कि ये बाइक अचानक सामने कैसे आ गई. तीनों बाइक सवार बाइक से उतरते हैं. राजू को कुछ समझ नहीं आता. इससे पहले कि वो कुछ समझ पाता उसे बाइक पर से उतरे सुनील का चेहरा नजर आता है. राजू उसे देखकर सन्न रह जाता है. इससे पहले कि राजू कुछ कर पता. सुनील राजू के पास पहुंच जाता है और उस पर ताबड़ तोड़ गोलियां चला देता है. राजू वहीं ढेर हो जाता है. 

 

दिन दहाड़े हुए इस कत्लेआम से पूरे शहर में सनसनी फैल जाती है. सुनील राजू से बदला लेने की आग में झुलस रहा था. वो राजू को सबक सिखाना चाहता था. लेकिन क्यों, आखिर सुनील की राजू से क्या दुश्मनी थी? राजू ने ऐसा क्या किया था कि सुनील ने राजू को उतार दिया मौत के घाट. ये समझने के लिए कुछ महीने पहले की कहानी को जानना होगा.

 

सुनील कुमार यादव उत्तर प्रदेश के मऊ शहर का रहने वाला था. खुद को तो वो दबंग समझता था लेकिन अपनी दो बहनों पर उसने पहरा लगा रखा था. एक दिन जब सुनील घर पर था तो उसकी बहन कुसुम तैयार होकर घर से बाहर जाने लगी. तो सुनील ने उसे तुरंत टोक दिया.

 

सुनील: तू कहां जा रही है सुबह सुबह?

कुसुम: वो कुछ नहीं भइया निशा के घर तक जाना था कुछ किताबें लेने.

सुनील: हूं ठीक है पर जल्दी वापस आ जाना. कहीं ज्यादा देर तक रुकने की जरूरत ना है.

कुसुम: ठीक है भइया.

कुसुम चैन का सांस लेती है औक जैसे ही घर से बाहर निकलने लगती है उसी वक्त कुसुम की छोटी बहन लता कमरे में आ जाती है.

 

सुनील: ऐसा कर अकेले मत जाना. इसे भी साथ ले जाना.

कुसुम: नहीं भइया मैं अकेले ही.

सुनील कुसुम की बात बीच में रोक कर उसे गुस्से में चुप रहने का इशारा करता है

सुनील: कह दिया ना लेकर जा दोनों जल्दी लौट आना.

 

गुस्से में बडबड़ाती हुई, ना चाहते हुए भी कुसुम अपनी बहन लता को अपने साथ लेकर जाती है. दरअसल अपनी सहेली का बहाना कर कुसुम तो अपने प्रेमी से मिलने जा रही होती है. थोड़ी देर में दोनों बहनें साथ एक छोटे से रेस्टोरेंट के पास पहुंचती हैं. कुसुम लता को दूर ही किसी टेबल पर इंतजार करने को कहती है. फिर सामने वाली टेबल पर बैठे एक शख्स के पास जाकर बैठ जाती है.

 

राजू: अरे आज छोटी बहन को भी साथ ही ले आईं.

कुसुम: क्या करती सुबह सुबह भइया का फरमान जो जारी हो गया अकेले कहीं नहीं जाना.

राजू कुसुम की बात सुनकर हंसने लगता है.

कुसुम: तुम हंस रहे हो. मुझे पता है कितना डर डर कर मैं तुमसे मिलने आती हूं. सुनील भइया को भनक भी लग गई तो वो ना जाने क्या करेंगे.

राजू: अरे प्यार भी करती हो और डरती भी हो.

कुसुम: डर तो लगता है तुम तो जानते ही हो भइया को.

राजू: हां जानता हूं खुद को यहां का डॉन समझता है पर क्या करें हमें भी तो डॉन की बहन से इश्क हो गया है. हम तो किसी जांबाज से कम नहीं हैं.

 

इतना कहते कहते राजू कुसुम के करीब आ जाता है, दोनों एक दूजे की आंखों में खो जाते हैं, लता दूर से इन दोनों को देख रही होती है और मुस्करा रही होती है. सुनील की बहन कुसुम अकसर राजू नाम के शख्स से मिला करती. वो राजू से मोहब्बत करती थी. लेकिन उसे इस बात का डर थी कि अगर सुनील को उसके और राजू के संबंधों की भनक भी लग गई तो वो ना जाने कौन सा खतरनाक कदम उठा ले लेकिन मोहब्बत के हाथों मजबूर कुसुम सुनील के डर के बावजूद फिर राजू से मिलने जाने के लिए तैयार हो रही थी.

 

लता: कहां जा रही हो?

कुसुम: राजू से मिलने.

लता: अच्छा भइया को क्या कहा?

कुसुम: कुछ नहीं भइया दूसरे शहर गए हैं. शाम तक लौटेंगे उससे पहले ही मैं आ जाउंगी.

लता: तो मैं भी चलूं?

कुसुम: तू, तुझे मैं कहां ले जाउंगी?

लता: नहीं मैं सोच रही थी बोर हो रही हूं. मैं भी राजू से मेरा मतलब है तुम दोनों के साथ थोड़ा घूम फिर लेती.

कुसुम: घूमना है तो किसी और को ढूंढो मेरे राजू के साथ तुम नहीं घूम सकती.

लता: तुम्हारा राजू तुम्हारा भी नहीं है वो तुम शायद भूल रही हो उसकी बीवी भी है और दो बच्चे भी.

कुसुम: बकवास मत कर कहीं खुश हो कर जाने लगो तो तुम सारा मूड बिगाड़ देती हो.

 

लता की बात सुनकर कुसुम गुस्से में घर से निकल जाती है. कुसुम को लता की कही हुई बातें सच्ची होने के बावजूद कड़वी लग रही होती हैं. लता की बातों को सोचते सोचते कुसुम राजू से मिलने पहुंचती है.

 

राजू: इतना खूबसूरत चेहरा और उस पर हल्की सी मुस्कान भी नहीं है. क्या बात है? हमारी मैडम का मूड कुछ खराब लग रहा है.

कुसुम: वो है ना मेरी प्यारी बहन सारे मूड का सत्यानाश कर दिया.

राजू: इतनी भोली तो है बेचारी.

कुसुम: भोली और वो ऐसी ऐसी बातें करती है कि क्या बताऊं.

राजू: क्या हुआ कुछ बोलो तो सही.

कुसुम: उसे भी तुम्हारे साथ घूमने का मन कर रहा था जैसे तुम मेरे नहीं उसके आशिक हो.

राजू: ओहो वो तो उसने यूं ही कह दिया होगा.

कुसुम: ऐसे ही नहीं मुझे ताने मार रही थी कि. कि. (थोड़ हिचकिचा कर) राजू तो पहले से ही किसी और का है दो बच्चों का बाप है.

राजू: तो तुम गुस्सा हो गईं? तुमको तो पता है ना कि मैं जल्दी अपनी बीवी को छोड़कर तुमसे शादी कर लूंगा फिर कोई कुछ भी कहे तुमको फर्क नहीं पड़ना चाहिए.

कुसुम: क्या करुं राजू अब और नहीं सुना जाता.

राजू: अरे तुम छोड़ो ये सब बातें चलो तुमको बोलेरो की सैर करवा कर लाता हूं.

कुसुम: नहीं रे बाबा भइया ने देख लिया तो.

राजू: तुम तो कह रही थी तुम्हारा भाई शहर से बाहर गया है तो फिर क्यों डरना चलो.

 

राजू के साथ घूमने की बात सुनकर कुसुम खुद को रोक नहीं पाई और दोनों राजू की गाड़ी बोलेरो में घूमने निकल जाते हैं. लेकिन कुसुम की किस्मत उस दिन उसके साथ नहीं थी. उसके भाई का चेला मुकेश उन दोनों को बोलरो में घूमते हुए देख लेता है, फिर सुनील को फोन करता है. वो सारी बात फोन पर सुनील को बता देता है. इन सब बातों से अनजान शाम को जब कुसुम राजू से मिल कर घर में चहकती हुई घुसती है और अपने कमरे में जाने लगती है तो पीछे से आवाज आती है.

 

सुनील: कहां से आ रही है?

 

अचानक सुनील को घर देखकर कुसुम घबरा जाती है

 

कुसुम: वो, वो भइया.

सुनील: कहां गई थी?

कुसुम: वो सहेली के घर गई थी, कुछ पेपर लेने थे.

सुनील: कहां है पेपर?

कुसुम: वो तो

सुनील: मैं तेरे को पागल दिखता हूं. मेरे बाहर जाते ही तेरी रंगरलियां शुरु हो गई. कब से चल रहा है ये सब?

कुसुम: भइया वो अच्छा लड़का है.

सुनील: अच्छा लड़का, दो बच्चों का बाप है वो और वो कोई भी हो तू घर से बाहर निकली कैसे? ज्यादा जबान चलाई तो खींच के हाथ में धर दूंगा और घर से बाहर निकली तो टांगे तोड़ दूंगा. समझी अंदर जा.

 

कुसुम रोते होते हुए अपने कमरे में चली जाती है. सुनील गुस्से में राजू को फोन लगाता है और उसे धमकी देता है.

 

सुनील: मेरी बात कान खोलकर सुन ले राजू. मेरे बहन से दूर रहियो. अगर मुझे भनक भी लगी ना कि तू उसके पीछे है तो तुझे मुझसे कोई ना बचा सकेगा समझ गया ना.

सुनील को अपनी बहन कुसुम और राजू के रिश्ते के बारे में पता चल गया था. उसने दोनों को धमकी भी दे दी थी. लेकिन राजू के प्यार में दीवानी सुनील की बहन ज्यादा दिन तक उससे दूर ना रह सकी. उसने फिर हिम्मत जुटाई और छुपते छुपाते एक दिन फिर राजू से मिलने पहुंच गई.

 

राजू: कहां थी तुम इतने दिन कब से मैं तुमसे मिलने को बकरार था.

कुसुम: मुझे पता है कि इतने दिन मैं कैसे तुम्हारे बिना रह रही थी.

राजू: सुनील की धमकी के बाद तो मुझे लगा हम कभी नहीं मिल पाएंगे.

कुसुम: हां पर मुझसे रहा ना गया तुम जल्दी से मेरे घर आकर मेरा हाथ मांग लो फिर सब ठीक हो जाएगा.

राजू: हां पर अभी मेरा तलाक हो जाए तब.

कुसुम: तब तक बहुत देर हो जाएगी राजू.

राजू: मैं कोशिश कर रहा हूं पर तुम तो जानती हो इन सब कामों में कितना वक्त लगता है.

कुसुम: वक्त ही तो नहीं है मेरे पास. भइया तो मेरे लिए रिश्ते देख रहे हैं. मैं तुम्हारे सिवा किसी और की नहीं हो सकती राजू. तुम जल्दी करो.

राजू: तुम घबराओ मत. मैं कुछ करता हूं.

 

राजू इतना कहता है और तभी अपने सामने सुनील को खड़ा देखकर राजू के होश उड़ जाते हैं. सुनील राजू के माथे पर तमंचा तान देता है. राजू और कुसुम दोनों घबरा जाते हैं. तभी मौका देखकर कुसुम सुनील का हाथ झटक देती है. कुसुम और सुनील के बीच छीना झपटी होने लगती है. राजू मौका देख कर अपनी जान बचाकर वहां से भाग खड़ा होता है. सुनील अपनी बहन कुसुम को जोर से पीछे धकेलता है और गुस्से में उस पर फायर कर देता है. उसकी बहन, उसकी सगी बहन कुसुम वहीं ढेर हो जाती है. जल्द ही पुलिस सुनील को अपनी ही बहन के कत्ल के आरोप में गिरफ्तार करके लेती है.

 

कुछ महीने तक सुनील जेल में ही रहता है. एक दिन सुनील की दूसरी बहन लता बाजार से घर की ओर जा रही होती है. तभी उसे राजू खड़ा दिखता है, वो आसपास देखती है कि कोई जानपहचान का तो नहीं है, फिर कपड़े और चेहरा ठीक करके पूरी अदाओं के साथ चलती है. राजू के सामने से उसे अनदेखा करके निकलती है, राजू उसे देख कर आवाज लगाता है.

 

राजू: सुनो. सुनो जरा

लता: जी.

राजू: तुम सुनील की लता हो ना.

लता: हां. (फिर चल देती है)

राजू: अरे सुनो तो सही.

लता: कहिए.

राजू: तुमने हमको पहचाना नहीं शायद. हम राजू वो तुम्हारी बहन.

लता: पहचान लिया. अब आप तो मेरी बहन से प्यार करते थे ना वो तो अब रही नहीं तो मुझसे बात करने का क्या मतलब.

राजू: तुम्हारी बहन ने शायद तुमको बताया नहीं था.

लता: क्या, क्या नहीं बताया था.

राजू: पता नहीं तुम हमारी बात का यकीन करोगी या नहीं दरअसल तुम्हारी बहन और हमारे बीच कुछ था ही नहीं. वो तो जबरदस्ती हमारे गले पड़ी हुई थी. उस दिन भी हम उसको यही समझा रहे थे कि अचानक तुम्हारा भाई आ गया और

लता: कुछ नहीं था, तुम तो उससे बहुत मिला करते थे.

राजू: हम दोस्त थे बस वो हमसे नाराज चल रही थी. वो.. वो हमने उसको बता दिया था ना तुम्हारे बारे में.

लता: मेरे बारे में क्या मेरे बारे में.

राजू: यही कि हम तुमको लाइक करते हैं.

(लड़की शरमा जाती है)

राजू: अब तुम हो ही इतनी खूबसूरत. बस यही बात तुम्हारी बहन को पसंद नहीं थी. उसने तुमको बताया ही नहीं.

लता: वो तो थी ही ऐसी.

राजू: पर अब तो तुम मेरे प्यार को समझो. मेरे साथ घूमने चलोगी, मेरी गाड़ी में.

 

राजू, जिसके कारण सुनील ने अपनी एक बहन को मौत के घाट उतार दिया था. अब वही राजू सुनील की दूसरी बहन लता पर डोरे डाल रहा था. सुनील की लता जो कि राजू को पहले से ही पसंद करती थी. झट से उसके बहकावे में आ गई. दोनों की दोस्ती हो गई. फिर ये दोस्ती बहुत आगे बढ़ गई. दोनों एक दूजे के प्यार में खो गए. सुनील की लता पर तो सुनील की भी कोई पाबंदी नहीं थी क्योंकि वो तो जेल में था लेकिन वो भूल गई कि सुनील को जेल में भी कोई खबर दे सकता है. सुनील को लता को सुनील के दोस्तों ने कई बार अपने साथ देखा था. पहले तो वो सुनील को बताने स कतरा रहे थे लेकिन एक दिन पवन ने जेल में जाकर हिचकिचाते हुए सुनील को सारी बात कह डाली.

 

सुनील: अब तो इस जेल से दोस्ती सी हो गई है.

मुकेश: क्या सुनील भइया कैसी बातें कर रहे हैं. हम तो बेसब्री से आपके जेल से छूटने का इंतजार कर रहे हैं.

सुनील: अरे इतनी आसानी से थोड़े ही छूटेंगे. सीना ठोक के गोली मारे हैं. सबके सामने. कोई छुप कर नहीं मारा हमने किसी डरपोक आदमी की तरह. सबके सामने गोली दागी थी. सबके सामने. हमको कोई पछतावा भी नहीं है. काम ही ऐसा किया था उसने. गुस्से में आगबबूला हो गए थे हम. हमारी सगी बहन थी तो क्या हुआ. उस दो बच्चों के बाप. उस राजू के साथ. थू.

मुकेश: शांत हो जाइए भइया

सुनील: ऐ पवन. जेल में हम हैं 9 महीने से तो फिर तुम क्यों शोक मना रहे हो.

पवन: कुछ नहीं भइया आप जेल से बाहर आ जाओ. फिर बात करेंगे.

सुनील: ऐसा क्या बात हो गया है.

पवन: भइया हम आपको जेल में परेशान नहीं करना चाहते थे. पर बात ही कुछ ऐसी है.

सुनील: पहेली ही करते रहोगे या कुछ बोलोगे भी.

पवन: भइया वो राजू.

सुनील: राजू. क्या किया वो राजू. अब क्या किया उसने.

पवन: भइया. वो राजू अपनी हरकतों से बाज नहीं आया है. इतना सब कुछ कर दिया आपने लेकिन वो है कि.

सुनील: ऐ पवन. तू हमको गुस्सा मत दिला. साफ साफ बोल हुआ क्या है.

पवन: भइया वो राजू. उसके चक्कर में पहले ही आपने अपनी एक बहन की बलि चढ़ा दी. लेकिन वो बाज नहीं आया. अब आपकी छोटी बहन के साथ.

सुनील: क्या. उस राजू की इतनी हिम्मत. पवन वकील से बात कर. मुझे जल्दी से जल्दी जमानत चाहिए. जेल से बाहर आना बहुत जरूरी है मेरा. जा जल्दी.

 

कुछ ही दिनों बाद सुनील को जेल से जमानत पर छोड़ दिया जाता है. सुनील सीधा अपने घर जाता है. सुनील की बहन लता इन सब बातों से बेखबर राजू के साथ घूम फिर घर पहुंचती है. घर में कदम रखते ही लता के पैरों तले जमीन खिसक जाती है. सामने सुनील बैठै होता है.

 

लता: भइया. आपपप. आप जेल से कब आए.

सुनील: क्यों हमको सारा जिंदगी जेल में देखना चाहती थी क्या.

लता: नहीं भइया ऐसी बात नहीं है.

सुनील: तो. तुम खुश नहीं दिख रही.

लता: वो आप अचानक आ गए तो जरा हैरान हो गए बस.

सुनील: हूं. तो कहां से आ रही हो.

लता: वो भइया मैं.

सुनील: झूठ मत बोलना. एक का हाल तुम देख चुकी हो. तुम्हारा भी वही हाल कर देंगे. समझी. उसका हाल देख कर भी तुम में इतनी हिम्मत आ गई. तुमसे तो मैं बाद में बात करुंगा. पहले जरा उससे निपट लूं. जिसकी इतनी जुर्रत हो गई कि हमारा डर उसके अंदर से खतम हो गया.

 

सुनील की बेचैनी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी लेकिन राजू से बदला लेने की उसकी कोशिश हर बार नाकामयाब हो रही थी. वो उसे जल्द से जल्द सबक सिखाना चाहता था.

 

सुनील: अब हमारा सब्र खतम होता जा रहा है. इतना दिन दिन हो गए हमको जेल से बाहर आए. लेकिन ये राजू. पवन जल्दी से कुछ करो. इस मुकेश के बस का कुछ नहीं है.

पवन: भइया वो नजर रखे हुए है पर कोई मौका हाथ नहीं लग पा रहा है.

सुनील: अब ज्यादा वक्त नहीं है मेरे पास.

(तभी पवन का फोन बजता है)

पवन: हां मुकेश. अच्छा. नहीं भइया हमारे साथ ही हैं. तुम वहीं रुको. हम आ रहे हैं. चलिए भइया. लगता है आज काम हो जाएगा.

सुनील: कट्टा?

पवन: कट्टा तो हम उस दिन से हर वक्त अपने पास ही रखते हैं भइया.

सुनील: तो फिर चल.

 

इसी बात पर पवन देसी कट्टा निकाल कर सुनील को दे देता है,  दोनों बाइक पर बैठ कर वहां से निकल जाते हैं. वहां से बीच रास्ते में मुकेश को लेते हैं. मुकेश इशारों में दोनों को राजू के बारे में बताता है. तीनों जल्द ही राजू की गाड़ी के पास पहुंच जाते हैं. राजू बोलेरो चला रहा होता है. बाइक पीछे से आती है और बोलेरो के आगे आकर रुकती है. बोलेरो में तेज ब्रेक लगते हैं.

 

राजू हक्का बक्का रह जाता है. उसे समझ नहीं आता कि ये बाइक अचानक सामने कैसे आ गई. तीनों बाइक सवार बाइक से उतरते हैं. राजू को कुछ समझ नहीं आता. इससे पहले कि वो कुछ समझ पाता. उसे बाइक पर से उतरे सुनील का चेहरा नजर आता है. राजू उसे देखकर सन्न रह जाता है. इससे पहले कि राजू कुछ कर पता. सुनील राजू के पास पहुंच जाता है और उस पर ताबड़ तोड़ गोलियां चला देता है. राजू वहीं ढेर हो जाता है.

 

तो ये थी बदले की कहानी. सुनील के इस बदले की आग में पहले उसकी सगी बहन झुलस गई, फिर राजू ने भी सुनील को सबक सिखाने के लिए उसकी बहन को अपनी मोहब्बत के जाल में फंसाया. लेकिन जब सुनील को इसकी खबर लगी तो उसने राजू को भी मौत के घाट उतार दिया. बदले की आग में ना जाने कितने खाक हो जाते हैं. सुनील और राजू का बदला पूरा तो हुआ लेकिन उसमें दो जानें चली गईं.

 

यहां देखें वीडियो

सनसनी: मेरा भाई मेरा कातिल! 

Crime News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: sansani
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: Sansani
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017