किन्नरों के लिए अलग कारागार की जरूरत: कोर्ट

By: | Last Updated: Tuesday, 29 July 2014 4:51 AM

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने किन्नरों के लिए अलग से हाजत, कारागार एवं अन्य व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया जिन्हें ‘तीसरा लिंग’ घोषित किया गया है.

 

अदालत ने कहा कि उन्हें पूरा कानूनी अधिकार है और ‘सुविधा के मुताबिक उन्हें कभी पुरूष या कभी महिला के बीच नहीं रखा जा सकता.’ अदालत ने हाल में उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया जिसमें किन्नरों को ‘तीसरा लिंग’ घोषित किया गया है.

 

अदालत ने कहा कि आपराधिक न्यायिक प्रणाली के लिए वक्त आ गया है कि उन्हें प्रभावी तरीके से इस रूप में मान्यता मिले और कानून का उल्लंघन करने पर उनके लिए अलग से हाजत, कारागार, प्रसाधन कक्ष आदि मुहैया कराया जाए.

 

अदालत ने कहा कि वक्त आ गया है कि कारागार एवं हाजत के संबंध में नियमों में संशोधन के लिए सर्वसम्मति पर पहुंचा जाए .

 

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाउ ने कहा, ‘‘इसलिए यह महत्वपूर्ण हो गया है कि जब वे कानून का उल्लंघन करें तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो और कानून के मुताबिक उन्हें अन्य लोगों की तरह सजा दी जाए और सुनिश्चित किया जाए कि उनके मानवीय और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हो .’’

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Web Title: Separate lock-ups, prisons needed for transgenders: Court
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