टाइगर ने मां को फोन कर कहा, 'आंसू बेकार नहीं जाएंगे, याकूब की फांसी का लेंगे बदला'

By: | Last Updated: Friday, 7 August 2015 2:51 AM

मुंबई : 1993 के सिलसिलेवार बम ब्लास्ट के मास्टरमाइंड टाइगर मेमन ने छोटे भाई याकूब मेमन की फांसी से डेढ घंटे पहले मुंबई में अपनी मां को फोन किया था और कहा था कि घरवालों के आंसू बेकार नहीं जाएंगे और याकूब की मौत का बदला लिया जाएगा.

 

अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक टाइगर मेमन की फोन कॉल को मुंबई पुलिस ने रिकॉर्ड किया.

 

टाइगर मेमन ने याकूब की फांसी के डेढ घंटे पहले याकूब के घर के लैंडलाइन पर फोन किया था और मां हनीफा से बात की थी.  30 जुलाई को याकूब को सुबह 7 बजे फांसी दी जानी थी. टाइगर ने मुंबई के अल हुसैनी वाले घर के लैंडलाइन पर सुबह 5.35 बजे फोन किया था. टाइगर ने अपनी मां से  3 मिनट तक  बात की थी. टाइगर ने इंटरनेट से कॉल किया था. मुंबई पुलिस ने कॉल तो रिकॉर्ड की है लेकिन ये पता नहीं लगा पा रही है कि आईपी एड्रेस क्या है जिससे लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है.

 

टाइगर ने परिवार को सांत्वना नहीं दी थी बल्कि बदला लेने की बात कह रहा था. टाइगर ने कहा-   ”याकूब की मौत का बदला लूंगा. परिवार के आंसू बेकार नहीं जाएंगे. मां हनीफा ने कहा-बस हो गया. पहले की वजह से मेरा याकूब गया, अब और नहीं मैं देख सकती.”

 

22 साल बाद पुलिस टाइगर की आवाज़ को रिकार्ड कर पाई, लेकिन उसका लोकेशन पता लगा पाने में नाकाम रही.

 

जब भी बात 12 मार्च 1993 के मुंबई बम धमाकों की होती है तीन चेहरे सामने आते हैं. याकूब मेमन, दाऊद इब्राहिम और टाईगर मेमन. लेकिन मुंबई पुलिस की तहकीकात में ये बात सामने आई है कि इन तीनों में सबसे अहम भूमिका जिसने निभाई तो वो टाइगर मेमन है. मुंबई में बम धमाके करने का ख्याल सबसे पहले टाइगर मेमन के दिमाग में ही आया और उस साजिश को अमली जामा पहनाने के लिये उसने दाऊद गिरोह से लेकर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और यहां तक की अपने परिवार तक का इस्तेमाल किया.  30 जुलाई को मुंबई ब्लास्ट केस में याकूब मेमन पहला शख्स था जिसे फांसी दी गई.

 

इस फांसी से पहले लंबी अदालती कार्रवाई चली. फांसी की सुबह से पहले वाली रात तक अदालती कार्रवाई चली. सुप्रीम कोर्ट ने फांसी से दो घंटे पहले याकूब की एक दया याचिका को खारिज किया और इस तरह  सुबह पांच बजे सुप्रीम कोर्ट ने फांसी पर अपनी अंतिम मुहर लगाई.

 

 

कौन है टाइगर मेमन

टाइगर मेमन का असली नाम है मुश्ताक अब्दुल रज्जाक मेमन. अपने मां-बाप और 5 छोटे भाइयों के साथ मुश्ताक दक्षिण मुंबई के मोहम्मद अली रोड पर कडिया बिल्डिंग में रहता था. आज जहां पर रिहायशी टावर खडा है, वहीं पर अब से दशक भर पहले कडिया बिल्डिंग हुआ करती थी, जिसमें एक कमरे के घर में पूरा मेमन परिवार रहता था. पिता अब्दुल रज्जाक मेमन वेल्डिंग का काम करते थे और उनकी आय से घर का गुजारा मुश्किल से हो पाता था.

 

इसलिए पास ही के इस्माइल बेग मोहम्मद स्कूल से दसवीं तक पढाई पूरी करने के बाद उसने रोजगार ढूंढने की सोची. पिता की जान पहचान से उसे भायखला इलाके में मेमन कॉपरेटिव बैंक में पिऊन की नौकरी मिल गई, लेकिन अपने गुस्सैल स्वभाव की वजह से वो ज्यादा दिनों तक इस नौकरी पर टिक नहीं सका.

 

एक बार बैंक के मैनेजर ने ऊंची आवाज में टाईगर को अपने मेहमान के लिये चाय लाने के लिये कहा. मैनेजर के हुक्म देने का तरीका टाईगर को अपमानजनक लगा और वो अपना आपा खो बैठा. उसने गुस्से में आकर उस मैनेजर को इतने थप्पड मारे कि वो बेहोश हो गया. इतना होने के बावजूद बैंक ने उसे मौका दिया कि अगर वो माफी मांग लेता है तो उसे नौकरी से नहीं निकाला जायेगा, लेकिन टाईगर ने नौकरी छोड देने का फैसला किया.

 

बैंक की नौकरी चली गई और टाईगर बेरोजगार हो गया. पैसों की किल्लत की वजह से उसका परिवार भी अब मोहम्मदअली रोड का घर बेचकर माहिम के मच्छीमार नगर की झुग्गियों में रहने में आ गया. घर के पास ही सूफी संत मखदूम शाह बाबा की दरगाह थी जहां अक्सर दाऊद इब्राहिम गिरोह से जुडा स्मगलर मुस्तफा दोसा मत्था टेकने आया करता था. मुश्ताक भी खाली वक्त दरगाह के आसपास भटकते हुए बिताता था. एक दिन मुस्तफा की उससे जान पहचान हो गई और मुस्तफा ने उसको अपना ड्राईवर रख लिया.

 

मुस्तफा के साथ काम करते हुए मुश्ताक ने उसकी आलीशान जिंदगी देखी, उसको महंगी कारों में सफर करते देखा, फाईव स्टार होटलों में खाते-पीते, क्लबों में अय्याशी करते देखा. टाईगर भी अब ऐसी जिंदगी जीना चाहता था, लेकिन उसके लिये जरूरी था अमीर बनना. मुश्ताक अब झटपट अमीर बनना चाहता था और इस तरह वो अमीर तब बन सकता था जब वो भी अपने मालिक मुस्तफा के जैसा धंदा करने लगे यानी कि सोने, चांदी की स्मगलिंग. ये मौका भी उसे जल्द ही मिल गया.

Crime News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: tiger Memon rang up family on July 30 before Yakub Memon’s hanging; talked about revenge
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017