क्या इंटरनेट की दुनिया बन जाएगी फेसबुक वर्ल्ड?

By: | Last Updated: Tuesday, 24 June 2014 3:40 PM
क्या इंटरनेट की दुनिया बन जाएगी फेसबुक वर्ल्ड?

नई दिल्ली: फेसबुक की पॉपुलरिटी लगातार बढ़ती जा रही है. मोबाइल्स पर सोशल नेटवर्क्स साइट्स के इस्तेमाल में भारी उछाल आया है. 2012 में 500 मिलीयन यूजर्स के मुकाबले इस साल करीब 1 बिलियन  इसके यूजर्स  हैं. सोशल साइट्स की ग्रोथ का कारण है इसका मोबाइस एक्सेस होना ज्यादातर यूजर्स मोबाइल्स पर इनका इस्तेमाल कर रहे हैं. जैसे-जैसे दूनिया कम्प्यूटर से मोबाइल की तरफ बढ़ रही है फेसबुक भी इसका फायदा उठा रही है. तो क्या फेसबुक मोबाइल फोर्म में गुगल को रोक पाएगा ?

 

क्या गुगल के प्रभाव को रोक देगी फेसबुक?

सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या गुगल समेत कोई फेसबुक के इंटरनेट पर बढ़ते प्रभाव को रोक सकता है ?  फ्यूचर्स एट एरिना के हेड मार्क होल्डन का कहना है कि    “साफ तौर पर इंटरनेट मोबाइल फास्ट होता जा रहा है और फेसबुक इस चरण में इसका बड़ा हिस्सा बनने लिए एकदम सही जगह पर है”

फेसबुक का अनुमान है कि यूजर्स द्वारा बिताए गए समय का करीब 20% मोबाइल पर होता है. इंस्टाग्राम औऱ व्हाट्सएप जैसे मोबाइल फस्ट प्लेटफार्म के अधिग्रहण के बाद तो यह प्रमुख ताकत बन जाएगा.

 

फेसबुक ने व्हाट्सएप को खरीदा

आजकल फेसबुक धड़ाधड़ मोबाइल ऐप्स को खरीद रहा है. व्हाट्सएप जैसी मशहूर मोबाइल ऐप को खरीद कर फेसबुक मोबाइल वेब पर नियंत्रण करना चाहता है.

 

ग्लोबल वेब इंडेक्स के हेड जैसन मैंडेर के अनुसार व्हाट्सएप जैसी पॉपूलर एप को खरीदना बेहद स्मार्ट काम है. प्रगतिशील देशों जैसे हॉगंकॉग, साउथ अफ्रिका, मलेशिया और सिंगापुर आदि में 50 फिसदी से ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल कर रहे है . जेविंग के डिजीटल एमडी ब्रेन टेलर का मानना है कि व्हाट्सएप को खरीद कर फेसबुक ने अपने मजबुत कम्पिटीटर को खत्म कर दिया है.

 

विज्ञापन भी है बड़ी वजह

फेसबुक की सबसे खास बात ये है कि यह लोगों से सीधा जुड़ा हुआ है जबकि गुगल गुमनाम कुकीज पर टिका होता है. इसलिए सीधे तौर पर विज्ञापन फेसबुक यूजर्स तक पहुंचता है.हालांकि ई-मार्केटर के ताजा आंकड़े बताते हैं कि गुगल को दुनिया भर मे मोबाइल एड बजट का 47 फिसदी मिलता है जबकि फेसबुक को केवल 22 फिसदी ही मिल पाता है. गुगल विभिन्न विज्ञापनों के जरिए काफी पैसा कमाता है.

 

हालांकि गुगल+ फेसबुक की तरह कई फिचर्स लेकर आया है लेकिन जानकार इसे फेसबुक के लिए कोई खतरा नही मानते. कई सारे स्मार्ट मोबाइल फोन्स आजकल गुगल सर्विसेज के साथ ही आते हैं ऐसे में  मोबाइल वेब की दुनिया पर दोनों कम्पीटीटर अपना अपना दांव लगा रहे हैं.

कुछ लोग गुगल को महज सर्च इंजन ही मानते हैं जो कई तरह कि बेस्ट एजुकेटर मानते हैं जबकि फेसबुक सोशल इंटरेक्शन का बेहतर प्लेटफार्म है.

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