क्या है नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता की वजह?

By: | Last Updated: Monday, 24 February 2014 3:38 AM

नई दिल्ली: जैसे – जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे – वैसे राजनीतिक दलों के चुनाव प्रचार में तेजी आ रही है. नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, मुलायम सिंह, नीतीश कुमार, ममता बनर्जी जैसे नेताओं ने सियासत में पूरी ताकत झोंक दी है. लेकिन तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं की कोशिशों के बावजूद प्रधानमंत्री पद के बीजेपी उम्मीदवार नरेंद्र मोदी अन्य नेताओं की अपेक्षा सबसे तेजी से जनता के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं. अन्य दलों के नेताओं की लोकप्रियता एक तरफ नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता एक तरफ. और ये बात सिर्फ मैं नहीं कह रहा हूं, तमाम सर्वे एजेंसियों के नतीजे भी यही कह रहे हैं.

 

पिछले दिनों एबीपी न्यूज़ और नीलसन के सर्वे के मुताबिक देश के 57 फीसदी लोग नरेंद्र मोदी को बतौर प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं. जबकि राहुल गांधी को सिर्फ 18 फीसदी और आम आमदी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को 3 फीसदी ही लोग बतौर पीएम देखना चाहते हैं. नरेंद्र मोदी केवल उन राज्यों में ही लोकप्रिय नहीं हैं जहां बीजेपी की सरकारें हैं. नरेंद्र मोदी उन जगहों पर भी लोगों की पसंद बनते जा रहे हैं जहां अबतक बीजेपी के लिए कोई संभावना नहीं रही है. पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में जहां बीजेपी ना के बराबर है वहां भी नरेंद्र मोदी युवाओं की पसंद बने हुए हैं.

 

हालांकि जैसे जैसे सर्वे का ग्राफ उम्र दराज लोगों की तरफ बढ़ता है मोदी की लोकप्रियता में गिरावट आने लगती है. लेकिन मोदी युवाओं के बीच खास तौर पर हिंदू युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं. तो सवाल यह है कि स्वतंत्रता के बाद सबसे ज्यादा आलोचना के शिकार रहे मोदी आज युवाओँ के बीच सबसे ज्यादा कैसे लोकप्रिय हो गए? साल 2002 के गुजरात दंगों के बाद सबसे ज्यादा आलोचना के शिकार मोदी रहे. भारत में शायद ही कोई ऐसा राजनेता हुआ हो जिसकी मोदी के बराबर आलोचना हुई हो. तो दंगों के दंश के बावजूद नरेंद्र मोदी ने जनता के बीच अपनी लोकप्रियता कैसे बनाई. और इसमें एक सवाल ये भी है कि देश में दंगें कांग्रेस के राज में भी हुए लेकिन मुस्लिम समाज ने कांग्रेस को तो माफ कर दिया लेकिन देश के मुस्लिमों ने नरेंद्र मोदी को माफ क्यों नहीं किया?

 

गुजरात दंगों के बाद से अबतक नरेंद्र मोदी ने कभी दंगों के लिए माफी नहीं मांगी. मोदी ने हमेशा कहा कि वो जितना कर सकते थे उतना उन्होंने किया. एक साक्षात्कार में भी नरेंद्र मोदी ने कहा अगर मैं अपराधी हूं तो मुझे फांसी दी जाए. ऐसे अपराध में माफी के लिए कोई जगह नहीं है. नरेंद्र मोदी का माफी ना मांगना ही मुस्लिमों के लिए मोदी से नफरत की वजह बन गई. जबकि मोदी का यहीं अंदाज RSS और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों को काफी पंसद आया.

 

तमाम मुस्लिम नेताओं ने गुजरात दंगों के लिए सीधे मोदी पर ही निशाना साधा. सीधे मोदी को ही जिम्मेदार बताया. कोर्ट से मोदी को दंगों पर क्लीन चिट मिलने के बाद भी मुस्लिम समाज मोदी को ही दंगों का जिम्मेदार मानता है. बहुत से ऐसे मुस्लिम नेता भी हैं जिनकी राजनीति मोदी को गाली देकर ही चलती है. इसलिए ऐसे राजनेताओं के लिए मोदी हमेशा एक विषय रहा है. मोदी के नाम पर वो पिछले 10 सालों से मुस्लिमों में सांप्रदायिकता का डर दिखाकर उनके खौफ पर अपनी राजनीति चमकाते रहे. चूंकि मुस्लिमों में साक्षरता दर भी कम है इसलिए ऐसे तमाम वे मुस्लिम भी इन राजनेताओं की बातों में आ गए जिन्होंने ना कहीं पढ़ा है और ना खुद अपनी आंखों से गुजरात दंगों को देखा है. सिर्फ राजनेताओं की बातों में आकर अधिकतर मुस्लिम समाज ने मोदी को गुजरात दंगों का जिम्मेदार ठहरा दिया और मोदी को दंगों का गुनहगार मान लिया. भले ही कोर्ट दंगों में मोदी की भूमिका को ना मानता हो लेकिन देश के अधिकतर मुस्लिमों के बीच मोदी गुनहगार बने हुए हैं. एबीपी न्यूज और नीलसन सर्वे में भी ये बात  साफ हो गई की मोदी ईसाईयों और मुस्लिमों के बीच लोकप्रिय नहीं हैं.

 

नरेंद्र मोदी का एक चेहरा तो गुजरात दंगों को लेकर है. लेकिन मोदी का एक और चेहरा है. गुजरात दंगों के बाद और गुजरात में आए भूकंप के बाद गुजरात के विकास की कहानी.  2002 में गुजरात में हुए दंगें गुजरात के इतिहास में आखिरी दंगे थे. जबकि पिछले 2 सालों में यूपी में 150 के करीब छोटे बड़े सांप्रदायिक सौहर्द बिगाड़ने वाली घटनाएं हुईं. असम में रोहिग्या मुसलमानों के साथ हिंसा हुई. देश की अर्थ व्यवस्था जब खस्ता हाल है मोदी देशभर  में घूमकर गुजरात के विकास मॉडल की चर्चा करते हैं. बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से तंग युवाओं को मोदी हसीन सपने दिखाते हैं. किसान, सैनिक, युवा, बच्चे, वैज्ञानिक, खिलाड़ी सबके लिए मोदी के पास कुछ ना कुछ होता है. मोदी भारत  के हर वर्ग को उम्मीद दिलाते हैं कि अगर बीजेपी की सरकार बनी और वो प्रधानमंत्री बने तो सभी समस्याओं का समाधान कर देंगे. मोदी दिन में भी भारत की जनता को सपने बेचते हैं. शायद यही कारण है कि जनता के बीच मोदी लोकप्रिय होते जा रहे हैं.

 

हिंदू संगठनों ने गुजरात दंगों को लेकर उन्हें हिंदू सम्राट की तरह पेश किया. उन्हें हिंदुओं का सबसे बड़ा हितैषी बताया. जिससे मोदी सवर्ण हिंदुओं के बीच लोकप्रिय होते चले गए. दूसरी तरफ इस सवर्ण तबके और बीजेपी ने मोदी का विकास पुरुष की तरह सामने रखा.

जिससे समाज के कमजोर तबके में मोदी की विकास पुरुष की छवि बनती गई.

 

समाज का एक बड़ा तबका मोदी की लोकप्रियता के पीछे उनकी पीआर एजेंसी को मानता है.

 

नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की एक वजह देश में  मजबूत नेतृत्व का अभाव रहा है. देश का कमजोर नेतृत्व ने मोदी जैसे नेता के व्यक्तित्व को मजबूती दी. देश को लगा की अब कोई कठिन फैसले लेने वाला होना चाहिए. देश के सामने दो ही विकल्प थे राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी. राहुल कई मामलों पर फेल हो चुके हैं. राहुल आज भी देश के लिए बच्चे ही हैं. कई मौकों पर राहुल जिम्मेदारियों से भागते रहे हैं. जबकि मोदी हर मौके पर यूपीए और कांग्रेस को घेरते रहे हैं. युवाओं को संबोधित करते रहे हैं. ऐसे में नरेंद्र मोदी ने राहुल से ज्यादा जनता का विश्वास जीता. और देश को महसूस कराया की वो देश को सबसे बेहतर नेतृत्व दे सकते हैं. यहां केजरीवाल  का नाम इसलिए नहीं ले रहा हूं कि जनता को अभी भी यकीन नहीं है कि आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनावों में 20 से ज्यादा सीटें ला पाएगी. भले ही केजरीवाल जनता की नजर में अच्छे हों लेकिन जनता इस बार शायद मजबूत और स्थाई सरकार चाहती है.

 

 

आज देश में मोदी के चार चेहरे हैं. पहला गुजरात दंगों का दोषी, हजारों मासूमों का कातिल, दूसरा विकास पुरुष नरेंद्र भाई मोदी, तीसरा हिंदू सम्राट, चौथा युवाओं की समस्याओं का समाधान यानी की उम्मीद की किरण.

 

आज आप नरेंद्र मोदी के विषय में दो ही तरह की बात कर सकते हैं, या तो आप मोदी को गाली देंगे या तो मोदी की तारीफ करेंगे. और आज मोदी की तारीफ करने वाले गाली देने वालों से कहीं ज्यादा हैं. और यह बात बीजेपी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी जानते थे. कि बीजेपी के तरूप का पत्ता नरेंद्र मोदी ही हैं. मोदी ही एक उम्मीद हैं जो बीजेपी को वापस सत्ता में ला सकते हैं. इसलिए राजनाथ सिंह विरोध के बावजूद मोदी को सामने ले आए. और अब तमाम सर्वे के परिणाम बता रहे हैं शायद मोदी को सामने करना बीजेपी का सही निर्णय था. नरेंद्र मोदी आज लोकप्रियता और प्रधानमंत्री पद की दौड़ में राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल से कहीं आगे हैं.

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Web Title: क्या है नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता की वजह?
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