युवाओं के हाथ में होगी 16वीं लोकसभा की चाभी, यूपी में 50% से ज्यादा हैं युवा और नौजवान वोटर

By: | Last Updated: Monday, 3 February 2014 5:15 AM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 21 करोड़ है और इसमे वोटरों की संख्या साढ़े 13 करोड़ से ज्यादा है. देश में आबादी और वोटर दोनों के लिहाज से यह प्रदेश पहले नंबर पर आता है. वोटरों की इस जमात में नौजवानों की बड़ी हिस्सेदारी है. प्रदेश में पिछले ढाई वर्षो में 40 लाख वोटर बने जो आगामी लोकसभा चुनाव में पहली बार वोट देंगे. वोटरों की इस बड़ी संख्या में 50% से ज्यादा का हिस्सा युवा और नौजवान वोटरों का है. यह वह भीड़ है जिनमें शिक्षा की भूख, बेहतर नौकरी की चाहत और मन में भ्रष्टाचार, महंगाई तथा वर्तमान व्यवस्था के प्रति गुस्सा है.

 

केंद्रीय चुनाव आयोग के आंकड़ों की बाबत किए गए दावों पर भरोसा किया जाए तो लोकसभा चुनाव तक वोटरों की संख्या 13 करोड़ 52 लाख पार कर जाएगी और मतदान केंद्र पर वोट डालने के लिए लगने वाली लाइन में हर छठा वोटर 18 से 40 साल के बीच का होगा. इन नए वोटरों को रिझाने के लिए राजनीतिक पार्टियों के एजेंडे में भी बदलाव के लिए मंथन जारी है. भारत निर्वाचन आयोग पिछले तीन सालों से शत प्रतिशत मतदाता बनाने के लक्ष्य को लेकर काम कर रहा है. इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया गया, बूथ स्तर पर अधिकारियों को वोटर बनाने की जिम्मेदारी दी गई. वोटर बनाने में ग्राम प्रधान और क्षेत्र के विशिष्ट लोगों की मदद ली गई.

 

जिला मुख्यालयों पर पंजीकरण मेले आयोजित किए गए. राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर वोटिंग बनाने के अभियान और पुनरीक्षित वोटर सूची के लिए सलाह ली गई साथ ही उनसे इस काम में सहयोग भी मांगा गया. आयोग की ओर से मतदाता जारूकता अभियान चलाकर यह तय किया गया कि 18 वर्ष का कोई भी व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने से न रहे जाए. इन्हीं कोशिशों का ही नतीजा रहा कि विधानसभा चुनाव 2012 तक मतदाताओं की संख्या 12 करोड़ 48 लाख तक पहुंच गई जिसमें 52 लाख 56 हजार नए मतदाता हैं जिनकी आयु 18-19 वर्ष है. लोकसभा चुनाव 2014 तक इस संख्या में बड़ा इजाफा हुआ और मतदाताओं की संख्या 13 करोड़ 52 लाख तक पहुंच गई, इसके अभी और बढ़ने की उम्मीद की जा रही है.

 

दरअसल चुनावों के प्रति लोगों के उदासीन रवैये को लेकर केंद्रीय निर्वाचन आयोग में अर्से से चिंता और मंथन चल रहा था. चिंता स्वाभाविक भी है क्योंकि प्रदेश में मतदान प्रतिशत वाकई निराशा को बढ़ाने वाले रहे हैं. आजाद भारत में जब पहली बार सरकार बनाने का अवसर आया तो वर्ष 1952 के लोकसभा चुनाव में मात्र 39% वोट पड़े. संसदीय इतिहास में पहली बार तब सर्वाधिक 57% वोट पड़े जब इमरजेंसी के खिलाफ गुस्से का इजहार करने लोग मतदान केन्द्रों पर पहुंचे. वरना हर चुनाव में 45 से 54% के बीच ही वोटिंग हुई.

 

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के इतिहास में सर्वाधिक 59% वोट वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में पड़े, यह अपने आप में रिकार्ड है. वोटिंग के कम प्रतिशत को लेकर केंद्रीय निर्वाचन आयोग में चले मंथन के बाद बड़े स्तर पर अभियान चला कर मतदाता बनाने का निर्णय लिया गया. उत्तर प्रदेश में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा यह अभियान पिछले पांच सालों से ज्यादा समय से लगातार चल रहा है. इसमें स्कूल-कालेजों में शिविर लगा कर आस्ट्रेलिया की तर्ज पर 18 साल पूरे करने वाले युवाओं को मताधिकार के महत्व को समझा कर मतदाता बनने के लिए प्रेरित किया गया. आस्ट्रेलिया में बचपन से ही बच्चों को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाया जाता है.

 

नए और युवा मतदाताओं में हर जाति, वर्ग और मजहब का समावेश है इसलिए राजनीतिक दलों को चुनाव के लिए जारी घोषणा पत्र में सनातनी और घिसे-पिटे वायदों को दरकिनार कर ठोस व सार्थक वायदें करने होगें. घोषणा पत्र का कलेवर बदलना, युवा जरूरतों के मुताबिक नीति बनाने और उन पर अमल करने की स्पष्ट घोषणा करना भी इन दलों की मजबूरी बनती जा रही है.

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Web Title: युवाओं के हाथ में होगी 16वीं लोकसभा की चाभी, यूपी में 50% से ज्यादा हैं युवा और नौजवान वोटर
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