सोशल मीडिया की चुनावी लड़ाई में शामिल हुई पिछड़े जिलों की छोटी पार्टियां

By: | Last Updated: Sunday, 13 April 2014 4:58 AM

बहराइच: पूर्वी उत्तर प्रदेश के बहराइच पैसे पिछड़े इलाके में भी सोशल मीडिया का असर दिखाई देने लगा है. प्रत्याशी और उनके समर्थक फेसबुक और वाट्स ऐप के माध्यम से अपने अपने पंसदीदा प्रत्याशियों के लिए वोट की अपील के साथ साथ प्रत्याशियों के सिंबल को पोस्ट करते दिखाई देते हैं.

 

अगर फेसबुक व व्हाट्सऐप जैसे सोशल वेबसाइट पर निगाह डाली जाए जो सबसे ज्यादा नरेन्द्र मोदी व केजरीवाल का दबदबा है. लेकिन इसमें बसपा जैसे छोटे दल भी अछूते नहीं हैं.

 

बहराइच से जुड़े लोगों को जब व्हाट्सऐप और फेसबुक पर खंगाला गया तो यहां बसपा और भाजपा का दबदबा दिखाई दिया. बहराइच लोकसभा सीट से अभी तक आप पार्टी का कोई प्रत्याशी नहीं है. इसीलिए आप की गतिविधि भी शून्य है. लेकिन भाजपा के पदाधिकारी व्हाट्सऐप पर काफी सक्रिय दिखे. उनके पोस्टरों में नरेन्द्र मोदी को कभी शेर से तुलना की गई तो कभी देश को नई दिशा देने वाले एक नायक के रूप में दिखाया गया.

 

बहराइच लोकसभा सीट से अभी तक शब्बीर वाल्मीकि को छोड़ कर किसी भी प्रत्याशी की डायरेक्ट पोस्ट नहीं दिखाई दी. लेकिन भाजपा, बसपा की पोस्ट अक्सर दिखाई देती रहती है. वहीं, बहराइच के बगल की सीट कैसरगंज से लोकसभा बसपा प्रत्याशी केके ओझा की स्वयं की वॉल पर वह काफी सक्रिय दिखे. उनके समर्थक भी उनके लिये बसपा की प्रचार समाग्री पोस्ट करते दिखाई दे रहे हैं.

 

सोशल मीडिया पर अगर चुनाव चिन्ह या प्रतीकों को ध्यान से देखा जाए तो फेसबुक पर हाथी का दबदबा दिखाई दे रहा है. कहीं-कहीं पर तो ये भी देखने को मिला कि हाथी के चुनाव चिन्ह को दिखाने के लिये प्रतिद्वंदिता इस हद तक पहुंच गई कि उसको मोदी के सीने पर चढ़ते हुये दिखाया गया.

 

अगर सोशल मीडिया को एक नजर में देखा जाए तो बहराइच जिले में यही दिखाई दे रहा है कि चाहे वो कैसरगंज सीट हो या बहराइच यहां बसपा और भाजपा की प्रतिद्वंदिता दिखाई दे रही है. कैसरगंज लोकसभा सीट पर बसपा सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति को मजबूत करती दिखाई देती है.

 

कमोवेश यह स्थिति बहराइच लोकसभा सीट की भी है. यहां पर भाजपा, बसपा, सपा का त्रिकोणीय संघर्ष जहां जमीनी स्तर पर है. वही संघर्ष फेसबुक पर भी है. यहां सपा के प्रत्याशी को छोड़कर कोई दूसरा प्रत्याशी सीधे तौर पर फेसबुक पर उपस्थित नहीं है, लेकिन उनके समर्थक अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के लिये सोशल मीडिया की जंग में शामिल हैं.

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Web Title: सोशल मीडिया की चुनावी लड़ाई में शामिल हुई पिछड़े जिलों की छोटी पार्टियां
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