फेसबुक ने भारत में फ्री बेसिक्स के लिए खर्च किए 300 करोड़ रुपये

By: | Last Updated: Tuesday, 12 January 2016 10:38 AM
facebook spents 300 crores for free basics

नई दिल्ली: फेसबुक अपने फ्री बेसिक्स कैंपेन को भारत में बहुत ही जोर शोर से चला रहा है. फेसबुक ने इसके लिए देश के तमाम बड़े बड़े अखबारों में फुलपेज विज्ञापन दिए. इसके साथ ही टीवी पर भी लंबे लंबे विज्ञापन चलवाए. अंग्रेजी अखबार लाइव मिंट में छपी एक खबर के मुताबिक फेसबुक ने भारत में अपने फ्री बेसिक्स कैंपेन के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की भारी भरकम रकम खर्च की है.

इस रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि फेसबुक ने अकेले प्रिंट मीडिया में विज्ञापन के लिए 180 से 200 करोड़ रुपये खर्च किए है. फेसबुक के प्रवक्ता के मुताबिक, ”हम उन सभी लोगों से जुड़ने की कोशिश कर रहे जो अभी हमारे साथ हैं या फिर भविश्य में हमारे साथ जुड़ सकते हैं.” फेसबुक भारत में फ्री बेसिक्स को लागू करवाने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहा है. चाहें वो विज्ञापन के जरिए हो या फिर फ्सबुक पर नोटिफिकेशन के जरिए ट्राई को सीधे मेल भेजने की बात हो. फेसबुक के फ्री बेसिक्स के खिलाफ देश के कुछ इंटरनेट एक्टिविस्ट अभियान चला रहे हैं. इनके मुताबिक फ्री बेसिक्स इंटरनेट की आजादी के खिलाफ है.

क्या है फ्री बेसिक्स अभियान

ये फेसबुक की विवादित मुहिम internet.org को ही नई मार्केटिंग स्ट्रैटजी के साथ रीलॉन्च किया है. जिसमें आपको कुछ खास साइट्स फ्री (बिना इंटरनेट प्लान) एक्सेस करने का ऑफ्शन मिलेगा. लेकिन वहीं दूसरी साइट्स के लिए आपका डेटा लगेगा. जाहिर हैं ऐसे में यूजर फ्री मिल रही सर्विस का ही इस्माल करेगा और ये सर्विस नेट न्यूट्रैलिटी के अधिकार को खत्म करेगी.

क्या है नेट न्यूट्रेलिटी?

अब आप जानना चाहते होंगे कि आखिर नेट न्यूट्रेलिटी यानी नेट की आजादी है क्या और इसके हमारे इंटरनेट इस्तेमाल करने पर क्या असर पड़ेगा. आपके पास मोबाइल है और आपने इसमें इंटरनेट कनेक्शन भी लिया है तो अब तक इसके लिए आप टेलिकॉम कंपनी को पैसे देते हैं, पैसे देने के बाद आप व्हाट्सएप, फेसबुक, क्विकर, स्नैपडील, गूगल, यू ट्यूब जैसी ढेरों इंटरनेट सेवाएं इस्तेमाल कर पाते हैं. हर सेवा की स्पीड एक जैसी होती है और हर सेवा के अलग से पैसे नहीं देने पड़ते.

यानी इंटरनेट की आजादी, एक बार इंटरनेट ले लिया तो हर सेवा को एक जैसा दर्जा. लेकिन अब कुछ टेलिकॉम कंपनियां इंटरनेट की आजादी को नए तरह से पेश करना चाहती हैं जिसमें कुछ सेवाएं मुफ्त हो सकती हैं तो कुछ के लिए अलग से पैसे भी देने पड़ सकते हैं. इतना ही नहीं कुछ सेवाओं के लिए ज्यादा स्पीड तो कुछ के लिए कम स्पीड का अधिकार भी कंपनियां अपने पास रखना चाहती हैं.

एक बार फिर समझते हैं इस बदलाव का मतलब, आपने फोन पर इंटरनेट कनेक्शन लिया, नए बदलाव के बाद इसके लिए कोई पैसे नहीं देने पड़ेंगे, लेकिन उदाहरण के लिए जब आप व्हाट्सएप, फेसबुक, क्विकर, स्नैपडील, गूगल, यू ट्यूब जैसी ढेरों इंटरनेट सेवाएं इस्तेमाल करेंगे तो हर सेवा के लिए अलग अलग पैसे देने पड़ेंगे.

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Web Title: facebook spents 300 crores for free basics
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