internet.org की रिपैकेजिंग है Free Basics, जानें इससे जु्ड़ी बड़ी बातें

Facebook’s “Save Free Basics In India” Campaign Provokes Controversy

फेसबुक के प्रवक्ता ने कहा कि बहुत थोड़े समय के लिये, श्रद्धांजलि वाला संदेश कुछ यूज़र्स के फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट हो गये थे.

नई दिल्लीः फेसबुक अपने यूजर्स के पास  फ्री बेसिक्स इंटरनेट को लेकर एक मेल भेज रहा है. ये मेल टेलीकॉम रेग्यूलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) को फ्री बेसिक इंटरनेट के सपोर्ट में करना होगा. आपको बता दें की ट्राई ने फेसबुक डिजिटल इक्वेलिटी के तहत रिलायंस के साथ मिलकर फ्री बेसिक्स इंटरनेट की मुहिम भारत में शुरु की थी. जिसे अब ट्राई ने बैन कर दिया है.

 

फ्री बेसिक्स को पिछले महीने ही फेसबुक ने शुरु किया था. इस सर्विस में यूजर को विकीपिडिया, हेल्थ, खबर, मौसम अपडेट जैसी जानकारी वाली साइट्स फ्री में मिलेंगी. जाहिर तौर पर इससे फेसबुक कुछ खास साइट्स के कंटेंट को मुहैया करवाएगा और बाकियों के लिए आपको पैसे खर्च करने होंगे जो नेट न्यूट्रैलिटी का हनन करता है.

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भारत अमेरिका के बाद फेसबुक का सबसे बड़ा मार्केट है. भारत में फेसबुक यूजर्स की संख्या 130 मिलियन है. ऐसे में फेसबुक भारत में अपनी पकड़ और पहुंच और मजबूत बनाने में लगा हुआ है. इस नई उभरती अर्थव्यवस्था में फेसबुक अपनी जोर-आजमाईश में लगा हुई है.
क्या है फ्री बेसिक्स?

अब जब एक बार फिर इंटरनेट की समानता को लेकर बहस छिड़ चुकी है तो यह जानना बेहद जरुरी है कि इंटरनेट बेसिक्स है क्या? ये फेसबुक की विवादित मुहिम internet.org को ही नई मार्केटिंग स्ट्रैटजी के साथ रीलॉन्च किया है. जिसमें आपको कुछ खास साइट्स फ्री (बिना इंटरनेट प्लान) एक्सेस करने का ऑफ्शन मिलेगा. लेकिन वहीं दूसरी साइट्स के लिए आपका डेटा लगेगा. जाहिर हैं ऐसे में यूजर फ्री मिल रही सर्विस का ही इस्माल करेगा और ये सर्विस नेट न्यूट्रैलिटी के अधिकार को खत्म करेगी.

क्या है नेट न्यूट्रेलिटी?

अब आप जानना चाहते होंगे कि आखिर नेट न्यूट्रेलिटी यानी नेट की आजादी है क्या और इसके हमारे इंटरनेट इस्तेमाल करने पर क्या असर पड़ेगा.

आपके पास मोबाइल है और आपने इसमें इंटरनेट कनेक्शन भी लिया है तो अब तक इसके लिए आप टेलिकॉम कंपनी को पैसे देते हैं, पैसे देने के बाद आप व्हाट्सएप, फेसबुक, क्विकर, स्नैपडील, गूगल, यू ट्यूब जैसी ढेरों इंटरनेट सेवाएं इस्तेमाल कर पाते हैं. हर सेवा की स्पीड एक जैसी होती है और हर सेवा के अलग से पैसे नहीं देने पड़ते.

 

यानी इंटरनेट की आजादी, एक बार इंटरनेट ले लिया तो हर सेवा को एक जैसा दर्जा. लेकिन अब कुछ टेलिकॉम कंपनियां इंटरनेट की आजादी को नए तरह से पेश करना चाहती हैं जिसमें कुछ सेवाएं मुफ्त हो सकती हैं तो कुछ के लिए अलग से पैसे भी देने पड़ सकते हैं. इतना ही नहीं कुछ सेवाओं के लिए ज्यादा स्पीड तो कुछ के लिए कम स्पीड का अधिकार भी कंपनियां अपने पास रखना चाहती हैं.

एक बार फिर समझते हैं इस बदलाव का मतलब, आपने फोन पर इंटरनेट कनेक्शन लिया, नए बदलाव के बाद इसके लिए कोई पैसे नहीं देने पड़ेंगे, लेकिन उदाहरण के लिए जब आप व्हाट्सएप, फेसबुक, क्विकर, स्नैपडील, गूगल, यू ट्यूब जैसी ढेरों इंटरनेट सेवाएं इस्तेमाल करेंगे तो हर सेवा के लिए अलग अलग पैसे देने पड़ेंगे.

करें ट्राई को मेल
30 दिसंबर आपकी राय दर्ज कराने की आखिरी तारीख है. इससे पहले आप saveinternet.in पर जाकर ट्राई को अपनी राय मेल कर सकते हैं. अगर आप फेसबुक की इस मुहिम का समर्थन करते हैं या नहीं करते तो आप ट्राई को अपनी राय दें. आपकी राय पर भारत की नेट स्वतंत्रता निर्भर करती है.

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Web Title: Facebook’s “Save Free Basics In India” Campaign Provokes Controversy
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