क्या है इंटरनेट की आजादी?

क्या है इंटरनेट की आजादी?

By: | Updated: 01 Jan 1970 12:00 AM

नई दिल्ली: न्यूट्रैलिटी की मांग और तेजी पकड़ रही है. न्यूट्रैलिटी खत्म करने के विरोध में अब तक TRAI को सवा लाख ईमेल किए जा चुके हैं. इससे डरकर फ्लिपकार्ट ने एयरटेल जीरो प्लान से खुद को अलग कर लिया है.



नेट न्यूट्रैलिटी को लेकर देश में मुहिम और तेज होती जा रही है. ग्राहकों के साथ-साथ राजनीतिक पार्टियां भी नेट न्यूट्रलिटी के समर्थन में उतर आयी हैं.

 

नेट न्यूट्रैलिटी को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया की आंधी को देखकर इंटरनेट शॉपिंग वेबसाइट फ़्लिपकार्ट ने अपने आप को एयरटेल कंपनी की खास सर्विस‘एयरटेल ज़ीरो’से अलग कर लिया है. 

 

 

एयरटेल ज़ीरो एयरटेल का वो प्लान है जिसमें कुछ खास वेबसाइट के लिए आपको डेटा का कोई चार्ज नहीं देना होगा. फ़्लिपकार्ट ने भी एयरटेल ज़ीरो नाम की इस स्कीम के लिए रजिस्टर करवाया था. लेकिन देश भर में इंटरनेट पर और खासकर सोशल मीडिया पर एयरटेल ज़ीरो के खिलाफ तो लोगों का गुस्सा फूटा ही, फ्लिपकार्ट के खिलाफ भी मुहिम चल पड़ी थी. इसी से डरकर फ्लिपकार्ट अब एयरटेल ने जीरो से खुद को अलग किया है, नेट न्यूट्रलिटी के समर्थन में भी आ गई.

 

टेलीकॉम रेग्यूलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने नेट न्यूट्रलिटी खत्म करने के लिए अपने वेबसाइट पर सुझाव मांगे थे. इसके खिलाफ अब तक एक लाख से ज्यादा ईमेल ट्राई को भेजे जा चुके हैं.

 

इस मुहिम में राजनीति पार्टियां भी पीछे नहीं हैं. बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बाद शिवसेना भी नेट न्यूट्रलिटी खत्म करने के विरोध में उतर गई है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने ट्राई को चिट्ठी लिखकर नेट न्यूट्रलिटी का समर्थन किया है.

 

चिट्ठी में आदित्य ठाकरे ने लिखा है कि किसी वेबसाइट पर जाने के लिए या  इंटरनेट स्पीड के लिए अगर पैसे देने पड़ेंगे तो ये एनडीए सरकार के मेक इन इंडिया के सपने के लिए घातक होगा. क्योंकि कई युवा इंटरनेट के जरिए ही अपना काराबोर शुरू कर रहे हैं.

 

आपको समझाते हैं कि नेट न्यूट्रलिटी खत्म होने पर छोटे कारोबारियों को क्यों नुकसान होगा.

 

 

 क्या है जीरो प्लान

जीरो प्लान लागू होने पर इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनी कुछ वेबसाइट फ्री में दे और बाकी वेबसाइट के लिए पैसे चार्ज करेंगी. इसका सीधा सा मतलब है कि जो वेबसाइट कंपनियां इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनी को फीस देंगी उन वेबसाइट को फ्री कर दिया जाएगा तो सारे ग्राहक को  मिलेंगे. बाकी वेबसाइट पर जाने तो डेटा का पैसा देना पड़ेगा और वेबसाइट भी धीमी गति से चलेगी.

 

आशंका ये जताई जा रही है कि इससे तो फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी मछलियों की मनमानी चलने लगेगी. क्योंकि धंधा ही नहीं आएगा तो नई कंपनियां तो खुलना ही बंद हो जाएंगी, फिर जब कोई मुबाकबले में नहीं रहेगा तो आगे चलकर वॉट्सैप और स्काइप वगैरह के लिए हो सकता है आपको पैसे देने पड़ेंगें.

 

दिल्ली के प्रशांत चौधरी जिन्होंने नए आइडिया के साथ mrright.in  वेबसाइट शुरू की है. वेबसाइट के जरिए ये घर में जरूरी प्लम्बर, इलेक्ट्रिशियन जैसी सर्विस उपलब्ध कराते हैं. अब नेट न्यूट्रलिटी को लेकर इनकी चिंता बढ़ गई है .

 

मतलब अभी जब कोई भी छोटी सी कंपनी इंटरनेट पर अपने खास आइडिया और एप से धमाका कर सकती है, वो सब खत्म होने का खतरा जताया जा रहा है. और इसी के खिलाफ जब सवा लाख से ज्यादा ईमेल टेलिकॉम रेग्युलेटर के पास पहुंचे तो सरकार ने भी कहा कि इस तरह के प्लान की जांच की जाएगी.

 

बहरहाल देश में इस नेट न्यूट्रलिटी पर बहस जारी है .

 

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