इंसानों से परेशान हुई रोबोट कार

By: | Last Updated: Wednesday, 2 September 2015 3:29 PM
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नई दिल्ली: गूगल ऐसी रोबोट कार तैयार कर रहा है जिसे चलने के लिए इंसानों की जरूरत नहीं होती. ये कार दुर्घटनाएं रोकने के लिए बनाई गई है लेकिन दिलचस्प ये कि इस कार खुद हादसों का शिकार हो रही है. वजह हैं इंसान.

 

गूगल की ये कार ऐसी है कि ड्राइविंग में इंसानों की छुट्टी कर दे. यानी स्टेयरिंग व्हील ये खुद संभालेगी और आपको बस चैन की सांस लेते हुए बैठना है. इस ऑटोमैटिक कार की टेस्टिंग साल 2009 से ही चल रही है. ये कार हर टेस्ट में कामयाब उतरती है.

 

सिर्फ टेस्टिंग ग्राउंड पर ही नहीं बल्कि सड़कों पर भी इस कार की टेस्टिंग चल रही है. इस दौरान सावधानी के लिए एक ड्राइवर और एक इंजीनियर कार में मौजूद रहता है. कार का रिकॉर्ड शानदार है सिवाए 16 दुर्घटनाओं के. पिछले सात साल में गूगल की ड्राइवर लैस कार 16 बार दुर्घटनाओं का शिकार हुई है.

 

गूगल ने पिछले दिनों हुए एक हादसे के बारे में जानकारी दी है. हालांकि उसने जगह नहीं बताई पर कहा कि एक ज्रेबा क्रास पर पैदल सड़क पार करने वाले शख्स के लिए गूगल कार धीमी हुई ही थी कि पिछली तेज रफ्तार कार ने टक्कर ने टक्कर मार दी. पैदल शख्स तो बच गया लेकिन गूगल काम में बैठे गूगल के कर्मचारी को चोट आई.

 

पिछले कुछ सालों में गूगल कार लगातार सुर्खियां बनाती रही है. गूगल की कार को इस तरह प्रोग्राम किया जाता है कि वो ट्रैफिक के हर नियम को माने. कार हर नियम का पालन भी करती है. पर गूगल की शिकायत है कि इंसान ये नियम नहीं मानते और इसी वजह से दुर्घटना होती है.

 

गूगल ने एक और घटना बताई है. साल 2009 में टेस्टिंग के दौरान एक चौराहे पर कार खड़ी थी और काफी देर तक खड़ी रह गई. क्योंकि बाकी ड्राइवर रूकन को तैयार नहीं थे और कार को इस तरह सुरक्षा के लिहाज से प्रोग्राम किया गया था. बाकी ड्राइवर धीरे-धीरे कार आगे बढ़ा कर ले जाते जिससे रोबोट कार आगे नहीं बढ़ पाई.

 

गूगल के मुताबिक उसे कार बनाने में या कार चलाने में इतनी दिक्कत नहीं आई जितनी इंसानों के साथ चलने पर कार बचाने में आई. गूगल ने 16 दुर्घटनाओं का ब्यौरा देते हुए कहा है कि इनमें से हर बार कोई ना कोई इंसान गलती पर था. जैसे अधिकतर हादसों में कार को पीछे से आ रहे ड्राइवर ने टक्कर मारी.

 

16 में से एक बार गूगल कार ने टक्कर मारी और वो भी तब जब वो ऑटोमैटिक मोड में नहीं थी. यानी गलती कार चला रहे ड्राइवर की थी. गूगल की योजना है कि साल 2020 तक इस कार को जनता के लिए सड़कों पर उतार दे. योजना है कि ड्राइवर लैस कारों के जरिए सड़कें ज्यादा सुरक्षित हो सकें. पर दिक्कत ये है कि कार का सॉफ्टवेयर तो अपग्रेड कर दे पर उन बेपरवाह ड्राइवरों का क्या करें जो सड़क पर चलते किसी नियम का पालन नहीं करते.

 

 

जानें, कैसे काम करती है रोबोट कार

  • सड़कों पर इंसान की गलती भयानक हादसों को अंजाम दे सकती है. इन्हीं हादसों को रोकने की कोशिश है रोबोट कारों की. सिर्फ गूगल ही नहीं बल्कि एपल कंपनी की तरफ से भी रोबोट कार उतारने की तैयारियां चल रही हैं. आइए आपको बताते हैं कि कैसे काम करती हैं ये कारें.

  • आमतौर पर सड़कों पर चलने वाली कारों से ये कार काफी अलग हैं. इन कारों में  इंजन स्टार्ट करने और बंद करने के लिए दो अलग बटन हैं. इसके अलावा कोई कंट्रोल नहीं हैं. जिस कार की तैयारी है जिसमें स्टेयरिंग व्हील और क्लच, एक्सीलेटर या ब्रेक तक नहीं हैं. यानी अंदर बैठने वाले शख्स के हाथ में कोई कंट्रोल नहीं होगा.

  • कार के लिए अलग तरह का सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर हैं. जिसमें कार के पास अपना कम्प्यूटर होगा. ये कम्पूयटर सेंसर, रेडार, लेजर और कैमरे के लिए जरिए डाटा हासिल करेगा और इसी आधार पर फैसला करेगा.

  • कारों को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि अंदर बैठने वाला सिर्फ अपने पहुंचने की जगह लिखे औऱ बाकी काम कार खुद बा खुद कर ले. इसके लिए जीपीएस सिस्टम और मैप की सुविधा भी होगी.  रोड पर मौजूद ट्रैफिक, मोड पर टर्न या रेड लाइट पर रूकने जैसी चीजें कार खुद ही करेगी.

  • गूगल के मुताबिक उनसे अपनी 25 कारों के लिए 19 लाख मील का ट्रायल कर लिया है जिसमें से सिर्फ 16 बार कार दुर्घटना का शिकार हुई है. अंदर बैठे शख्स को तो सिर्फ एक बार चोट लगी है. 

 

कुछ समस्याएं भी हैं रोबोट कार के साथ

  • ये कार इलेक्ट्रिक होंगी और एक बार चार्ज करने पर 160 किलोमीटर तक सफर कर पाएंगी. 

  • अभी तय ये भी साफ नहीं है कि कार खराब होने पर इसकी मरम्मत का इंतजाम कैसे किया जाए. 

  • ये कारें तेज रफ्तार नहीं पकड़ेंगी बल्कि 25 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलेंगी. 

  • ये कारें सिर्फ उन्हीं रास्तों पर चल सकती हैं जिसके लिए गूगल की तरफ से मैपिंग हो चुकी हो यानी रास्तों को रिकॉर्ड किया जा चुका है.

साल 2020 तक कारों में कई बड़े सुधार भी देखने को मिल सकते हैं. लेकिन अब भी इन कंपनियों के लिए कारों और रास्तों से ज्यादा इंसानों के दिमाग को समझना मुश्किल हो रहा है.

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