जानें ट्राई के नए नियम के तहत कैसे मिलेंगे आपको कॉल-ड्रॉप के बदले पैसे?

By: | Last Updated: Friday, 16 October 2015 12:28 PM

नई दिल्लीः देश भर के मोबाइल ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है. अब आपको 1 जनवरी से हर कॉल ड्राप पर 1 रूपया मिलेगा. टेलिकॉम नियामक ट्राई ने इस सम्बन्ध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. नोटिफिकेशन के मुताबिक, टेलिकॉम कंपनियों को 1 जनवरी 2016 से प्रत्येक कॉल ड्राप होने पर 1 रुपया देना होगा. एक दिन में अधिकतम 3 कॉल ड्राप के लिए टेलिकॉम कंपनियों को ग्राहकों को हर्जाना देना होगा.

 

कितना पैसा मिलेगा ग्राहक को?

टेलिकॉम नियामक ट्राई ने कहा है की अधिकतम 3 कॉल ड्राप के लिए पैसा देना होगा. यानी, एक दिन में अधिकतम 3 रुपये. महीने का 90 रुपये. कुल मिलाकर ऐसे समझ सकते हैं की अगर आपके नेटवर्क पर खूब कॉल ड्राप होती है तो भी आपको महीने में अधिकतम 90 रुपये ही मिलेंगे.

 

कौन तय करेगा की कॉल ड्राप हुई?

टेलिकॉम कंपनियां ही तय करेंगी की कॉल ड्राप है या नहीं. टेलिकॉम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया की टेलिकॉम कंपनियों के पास ऐसा सिस्टम मौजूद है जिससे ये पता चल जाता है की कब टेक्निकल दिक्कत की वजह से कॉल ड्राप हुई है. फिलहाल, टेलीनॉर ऐसी टेलिकॉम ऑपरेटर है जो कॉल ड्राप होने पर अपने ग्राहकों को हर्जाना देती है. अधिकारी ने बताया की कॉल ड्राप का सिस्टम लागू करने के लिए ही कंपनियों को दिसंबर अंत तक का समय दिया गया है.

 

कैसे बताएगी कंपनी की कॉल ड्राप हुई?

ट्राई के नोटिफिकेशन के मुताबिक, प्रीपेड ग्राहकों को टेलिकॉम कंपनियां कॉल ड्राप होने पर 4 घंटे के अंदर SMS भेजकर बताएंगी की आपकी कॉल ड्राप हुई थी और आपके अकाउंट में इतने पैसे भेज दिए गए हैं. पोस्टपेड ग्राहकों के केस में उनके मासिक बिल में कॉल ड्राप का ब्यौरा दिया जाएगा और बिल की रकम से कॉल ड्राप की रकम को कम कर दिया जाएगा.

 

टेलिकॉम कंपनियो का विरोध?

टेलिकॉम कंपनियां ट्राई के इस कदम का विरोध कर रही हैं. सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (COAI) का कहना है की ट्राई की इस रूलिंग से हम बेहद निराश हैं. ट्राई की ये रूलिंग टेलिकॉम कंपनियों के लाइसेंस नियमों के खिलाफ है. लाइसेंस नियम कहते हैं की टेलिकॉम कंपनियों को 90% कवरेज देना होगा. कंपनियों को आउटडोर कवरेज देना होगा. यानी, की कंपनियां इंडोर कवरेज देने के लिए बाध्य नहीं हैं. इसके अलावा लाइसेंस नियम कहते हैं की ब्लॉक स्तर से आगे सिर्फ 30% कवरेज देना ज़रूरी है. COAI का कहना है की बहुत से ऐसे हैंडसेट होते हैं जिनकी सिग्नल कैच करने की क्षमता दुसरे हैंडसेट के मुकाबले कम होती है. ऐसे में अगर कॉल ड्राप हैंडसेट की कमी की वजह से होती है तो फिर कंपनी क्यों हर्जाना भरे. वहीं अगर कॉल ड्राप कॉल रिसीव करने वाले ग्राहक के नेटवर्क की वजह से होगी तो फिर कॉल करने वाले ग्राहक की कंपनी क्यों हर्जाना भरे?

 

टेलिकॉम कंपनियों के सूत्रों का कहना है की ट्राई के साथ इन सभी मुद्दों पर बात करने की ज़रूरत है. अगर ट्राई के साथ बात नहीं बनती है तो इस फैसले के खिलाफ कंपनियां टेलिकॉम ट्रिब्यूनल TDSAT का दरवाज़ा खटखटा सकती हैं.

Gadgets News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: KNOW THE NEW ORDER OF TRAI
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: call drop order Telecom company TRAI
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017