नेट न्यूट्रैलिटी: जानें जेहन में उठने वाले हर सवाल का जवाब

By: | Last Updated: Sunday, 12 April 2015 4:09 PM

नई दिल्ली/मुंबई: इंटरनेट की आजादी पर छिड़ी नई बहस में एआईबी भी कूद पड़ा है. चर्चा इतनी तेज हो चुकी है कि शाहरुख खान जैसे अभिनेता और अजय माकन जैसे दिग्गज नेता भी इससे खुद को दूर नहीं रख पा रहे हैं. ऐसे में आप क्या कर रहे हैं ये आपकी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ चुके इंटरनेट का सवाल भी है और आपकी जेब का भी. सरकार भी आपकी राय जानना चाहती है इसलिए इस पूरे मामले को समझ लीजिए.

नेट की आजादी की बहस की शुरुआत एआईबी के ताजे वायरल वीडियो का हुआ है. ये वही एआईबी है जो चंद दिनों पहले अभद्र भाषा के लिए सुर्खियों में आया था, लेकिन इस बार एआईबी का ये यूट्यूब वीडियो आपके इंटरनेट की दुनिया में एक बड़े बदलाव का विरोध करने के लिए सामने आया है.

 

दरअसल ये वीडियो भारत में इंटरनेट की आजादी को लेकर छिड़ी बहस का हिस्सा बन गया है. अभिनेता शाहरुख खान ने भी इस वीडियो को अपने सवा करोड़ प्रशंसकों के लिए ट्वीट किया है. कांग्रेस के बड़े नेता अजय माकन ने भी एआईबी के इस वीडियो को रिट्वीट किया है.

 

क्या है नेट न्यूट्रेलिटी?

 

अब आप जानना चाहते होंगे कि आखिर नेट न्यूट्रेलिटी यानी नेट की आजादी है क्या और इसके हमारे इंटरनेट इस्तेमाल करने पर क्या असर पड़ेगा.

 

आपके पास मोबाइल है और आपने इसमें इंटरनेट कनेक्शन भी ले रखा होगा. अब तक इसके लिए आप टेलिकॉम कंपनी को पैसे देते हैं, पैसे देने के बाद आप व्हाट्सएप, फेसबुक, क्विकर, स्नैपडील, गूगल, यू ट्यूब जैसी ढेरों इंटरनेट सेवाएं इस्तेमाल कर पाते हैं. हर सेवा की स्पीड एक जैसी होती है और हर सेवा के अलग से पैसे नहीं देने पड़ते.

 

यानी इंटरनेट की आजादी, एक बार इंटरनेट ले लिया तो हर सेवा को एक जैसा दर्जा. लेकिन अब कुछ टेलिकॉम कंपनियां इंटरनेट की आजादी को नए तरह से पेश करना चाहती हैं जिसमें कुछ सेवाएं मुफ्त हो सकती हैं तो कुछ के लिए अलग से पैसे भी देने पड़ सकते हैं. इतना ही नहीं कुछ सेवाओं के लिए ज्यादा स्पीड तो कुछ के लिए कम स्पीड का अधिकार भी कंपनियां अपने पास रखना चाहती हैं.

एक बार फिर समझते हैं इस बदलाव का मतलब, आपने फोन पर इंटरनेट कनेक्शन लिया, नए बदलाव के बाद इसके लिए कोई पैसे नहीं देने पड़ेंगे, लेकिन उदाहरण के लिए जब आप व्हाट्सएप, फेसबुक, क्विकर, स्नैपडील, गूगल, यू ट्यूब जैसी ढेरों इंटरनेट सेवाएं इस्तेमाल करेंगे तो हर सेवा के लिए अलग अलग पैसे देने पड़ेंगे.

 

पक्ष-विपक्ष

 

बात सिर्फ इतनी ही नहीं है. बदलाव का समर्थन करने वाली टेलीकॉम कंपनियां मानती हैं कि मुफ्त इंटरनेट गरीब भी इस्तेमाल कर पाएंगे. लेकिन इस बदलाव के विरोधी मानते हैं कि इंटरनेट की आजादी छिन जाएगी.

 

मिसाल दी जा रही है कि एयरटेल ने फ्लिपकार्ट से हाथ मिला लिया है. ऐसे में एयरटेल के इंटरनेट कनेक्शन पर फ्लिपकार्ट चलेगी तेज और फ्लिपकार्ट की प्रतियोगी कंपनियां हो सकता है धीमी हो जाएं. ये भी मुमकिन है कि ऐसे में किसी दूसरे टेलिकॉम कंपनी के कनेक्शन से आप फ्लिपकार्ट तक पहुंच ही ना पाएं.

 

इसका क्या असर पड़ेगा आप जैसे इंटरनेट उपभोक्ताओं को?

 

1- अगर नेट की आजादी खत्म हुई और नई व्यवस्था लागू हुई तो न्यूट्रिलिटी ग्रुप के मुताबिक फेसबुक, गूगल के लिए आपको अलग से  30-30 रुपये व्हाट्सएप के लिए 75 रुपये, फ्लिपकार्ट-अमेजन के लिए 50-50 रुपये और न्यूज एप्प के लिए का 10 रुपए का बेसिक चार्ज होगा.

 

2- नई व्यवस्था प्री-पेड और पोस्ट पेड, दोनों कनेक्शन पर लागू होगी. अभी इंटरनेट की तमाम सर्विसेस के लिए एक ही पैक और प्लान मिलता है.

 

3. देश भर में लगातार बढ़ रहे स्मार्टफोन नेटवर्क के साथ साथ इंटरनेट एक्सेस भी बढ़ा है लेकिन टेलिकॉम कंपनियों को लगता है कि इस मुनाफे का ज्यादा फायदा उन्हें मिलना चाहिए. टेलीकॉम कंपनियों का मानना है एसएमएस सेवा को व्हॉट्सएप जैसे लगभग मुफ़्त ऐप ने लगभग मार ही डाला है. नेट न्यूट्रेलिटी का विरोध करने वालीं कंपनियां इसी आधार पर इसका विरोध कर रहीं हैं.

 

सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राजन मैथ्यूस का कहना है, “हम स्पेक्ट्रम की कमी, इंटरनेट की सीमित पहुंच और ज्यादा ग्रामीण ग्राहकों वाले देश में हैं जहां 95 फीसदी प्रीपेड कस्टमर हैं और 40 फीसदी तो सिर्फ 10 रुपये का रीचार्ज करवाते हैं. हर नागरिक को सस्ता इंटरनेट मुहैया करवाना हमारी प्राथमिकता है. जिन 20 फीसदी के पास सबकुछ है वो उन 80 फीसदी लोगो के लिए फैसला नहीं कर सकते जिनके पास कुछ नहीं है.”

 

दरअसल नेट की आजादी को लेकर ताजा बहस इसलिए भी जोर पकड़ रही है क्योकि टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने हाल ही में मुफ्त इंटरनेट प्लान ‘एयरटेल जीरो’ लॉन्च किया है. इस प्लान के तहत ग्राहक को मुफ्त इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. इस प्लान को लॉन्च करने के बाद एयरटेल ने बताया कि ग्राहकों को यह पसंद आएगा क्योंकि इसके जरिये वे कई एप्लिकेशन्स को बिना किसी डेटा चार्ज के ही इस्तेमाल कर सकेंगे.

 

एयरटेल की इस योजना को इंटरनेट की आजादी के खिलाफ माना जा रहा है. एबीपी न्यूज ने जब एयरटेल से इस बारे में जानकारी मांगी तो उन्होंने कहा कि सिर्फ भ्रम फैलाया जा रहा है.

 

एयरटेल की सफाई

 

भ्रम 1: कुछ खास साइट्स को ज्यादा फायदा होगा?

 

सफाई – ऐसा नहीं होगा. ग्राहक को ये हक होगा कि वो क्या इस्तेमाल करना चाहते हैं.

 

भ्रम 2: बड़ी और पैसेवाली कंपनियों को फायदा पहुंचेगा और छोटी कंपनियां मारी जाएंगी?

 

सफाई – ऐसा नहीं होगा. इसके उलट कई छोटी कंपनियों ने एयरटेल जीरो प्लान की तारीफ की है. वो कम खर्च पर ज्यादा लोगों तक पहुंच पाएंगे. 150 कंपनियां हमारे साथ जुड़ने को तैयार हैं.

 

भ्रम 3– छोटी कंपनियों भारी भरकम डाटा चार्ज का खर्च नहीं उठा पाएंगी?

 

सफाई – अगर कोई उपभोक्ता एयरटेल जीरो लेता है और एक दिन इस्तेमाल करता है तो वो औसतन एक दिन में 20 से 30 एमबी ही खर्च होता है. फ्री इंटरनेट योजना में 1 रुपये प्रति MB की दर से हिसाब लगाएं तो सिर्फ 20 रुपया ही उन कंपनियों को देना होगा. जबकि बड़ी मीडिया और इंटरनेट कंपनियों के जरिए प्रचार पर 50 से 300 रुपये प्रति डाउनलोड देना पड़ता है. इससे तो फायदा ही होगा.

 

सरकार का रुख

 

हालांकि, सरकार ने अब तक इस पर अपना रुख साफ नहीं किया है लेकिन सूचना और प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद कह चुके हैं कि इंटरनेट इंसानी दिमाग की एक बेहतरीन खोज है. ये पूरी इंसानियत के लिए है ना कि कुछ लोगों के लिए. हमारी सरकार लोगों के हित में इंटरनेट के इस्तेमाल में विश्वास रखती है. टेलिकॉम विभाग की एक समिति इस पूरे मामले को देखने के लिए बनाई गई है.

 

इससे पहले पूरी दुनिया में इस तरह के प्रयोग भी हो चुके हैं और बहस आज भी जारी है. भारत में ये फैसला ट्राई नाम की संस्था लेती है. ट्राई ने इस बार फैसला लेने से पहले मांगी है आपकी राय. इसके लिए आप 24 अप्रैल तक ट्राई की वेबसाइट पर जाकर अपनी राय दे सकते हैं.

 

यहां देखें AIB का पूरा वीडियो