नेट न्यूट्रैलिटी: जानें क्या होगा आपके इंटरनेट इस्तेमाल पर असर

By: | Last Updated: Sunday, 12 April 2015 7:38 AM

नई दिल्ली: अपने शो में अभद्र भाषा का प्रयोग करके सुर्खियों में छाए रहने वाले एआईबी ने ‘नेट न्यूट्रैलिटी’ के प्रति लोंगो को जागरुक करने के लिए एक नया वीडियो जारी किया है.

 

इस वीडियो के आने के बाद एक बार फिर नेट न्यूट्रैलिटी को लेकर बहस तेज हो गई है. इंटरनेट की आजादी को लेकर छिड़ी इतनी बड़ी बहस के बाद यह जानना जरूरी हो गया है कि आखिर नेट न्यूट्रेलिटी है क्या औऱ इसके हमारे इंटरनेट इस्तेमाल करने पर क्या असर पड़ेगा.

 

क्या है नेट न्यूट्रैलिटी

 

नेट न्यूट्रलिटी का मतलब है इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर की ओर से बिना भेदभाव के सभी वेबसाइट पर जाने की आजादी देना. यानी फोन लगने पर आप जिस तरह किसी भी नंबर पर कॉल कर सकते हैं उसी तरह इंटरनेट प्लान लेने पर किसी भी वेब बेस्ड सर्विस तक पहुंच बिना किसी इंटरनेट डेटा भेदभाव के एक्सेस करना.  टेलिकॉम कंपनियां इसे खत्म करना चाहती हैं.

 

टेलीकॉम नियामक एजेंसी ‘ट्राई’ ने आम लोगों से ‘नेट न्यूट्रैलिटी’ या ‘नेट तटस्थता’ पर राय मांगी है.

 

जानें: कैसे करेंगे Net Neutrality के लिए वोट?

 

एआईबी के वीडियो में इस बात को एक बेहद मजेदार उदाहरण देकर बताया गया. इसमें कहा गया है कि मान लीजिए आप किसी पार्क में 100 रुपये देकर एंट्री करते हैं और उसके बाद आप किसी झूले पर झूलने जाते हैं तो उसके लिए आपको अलग से पैसे देने पड़ते हैं. इसके बाद आप दूसरे झूले पर जाते हैं तो वहीं भी आपको अलग से पैसे देने पड़ते हैं. इंटरनेट कंपनियां भी आपसे अलग अलग डेटा चार्ज के लिए अलग कीमत वसूलना चाहतीं हैं.

 

क्यों विरोध कर रहीं हैं टेलीकॉम कंपनियां

 

देश भर लगातार बढ़ रहे स्मार्टफोन नेटवर्क के साथ साथ इंटरनेट एक्सेस भी बढ़ा है. इसी के साथ टेलिकॉम कंपनियों ने इसमें अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग कर रहीं हैं. आज जो कमाई कॉलिंग-मैसेजिंग एप्स कर रहे हैं, वो उन्हें मिले. इनके कारण उनकी कमाई कम हुई है. 

 

टेलीकॉम कंपनियों का मानना है एसएमएस सेवा को व्हॉट्सएप जैसे लगभग मुफ़्त ऐप ने लगभग मार ही डाला है. नेट न्यूट्रेलिटी का विरोध करने वालीं कंपनियां इसी आधार पर इसका विरोध कर हीं हैं. अगर टेलिकॉम कंपनियां ऐसा करतीं है तो यह बिल्कुल वैसा ही होगा जैसे पेट्रेलियम कंपनियां आपकी गाड़ी के मॉडल के हिसाब से पेट्रोल की अलग-अलग कीमतें वसूलने लगें.

 

आपके इंटरनेट इस्तेमाल पर क्या असर पड़ेगा.

 

1- अगर नेट न्यट्रेलिटी को खत्म कर नई व्यवस्था लागू की जाती है तो न्यूट्रैलिटी ग्रुप के मुताबिक फेसबुक, गूगल के लिए आपको अलग से  30-30 रुपये व्हाट्सएप के लिए 75 रुपये, फ्लिपकार्ट-अमेजन के लिए 50-50 रुपये और न्यूज एप्प के लिए का 10 रुपए का बेसिक चार्ज होगा

2- नई व्यवस्था प्री-पेड और पोस्ट पेड, दोनों कनेक्शन पर लागू होगी. अभी इंटरनेट की तमाम सर्विसेस के लिए एक ही पैक और प्लान मिलता है.

3- इसके साथ ही मान लीजिए किसी ऑनलाइन प्लैटफॉर्म पर बड़ी सेल लगे और एक सर्विस प्रोवाइडर उस पोर्टल से मिली-भगत कर ले, तो ऐसे में दूसरे सर्विस प्रोवाइडर वाले वहां लॉगइन ही न कर पाएंगे.

 

पहले भी हो चुका है ऐसा

टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने हाल ही में मुफ्त इंटरनेट प्लान ‘एयरटेल जीरो’ लॉन्च किया है. इस प्लान के तहत ग्राहक को मुफ्त इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. इस प्लान को लॉन्च करने के बाद एयरटेल ने बताया कि ग्राहकों को यह पसंद आएगा क्योंकि इसके जरिये वे कई एप्लिकेशन्स को बिना किसी डेटा चार्ज के ही इस्तेमाल कर सकेंगे.

यहां पर ग्राहक केवल उसी वेबसाइट को ब्राउज या डाउनलोड कर सकेंगे जो एयरटेल के साथ रजिस्टर्ड होंगी. इसके लिए वे वेबसाइट्स एयरटेल को पेमेंट करेंगी. एयरटेल के साथ इस प्लान में रजिस्टर होने वाली फ्लिपकार्ट पहली बेवसाइट है. अगर ऐसा होता है तो एयरटेल के यूजर तो फ्री में फ्लिपकार्ट यूज कर पाएंगे लेकिन वोडाफोन या दूसरे सर्विस प्रोवाइडर यूजर्स के लिए यह महंगा साबित हो सकता है.

 

सरकार को भी है आपत्ति

  1. सरकारी विभागों और मंत्रालयों के वॉट्सऐप नंबर लोगों में लोकप्रिय हैं. नई सरकार भी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव है.

  2. एक ही पैक में इंटरनेट एक्सेस और डाउनलोड-अपलोड की सुविधा मिलने से हर सर्विस का इस्तेमाल आसान हो जाता है.

  3. एक विषय पर अलग-अलग ग्रुप के लोग तुरंत आपस में बातचीत कर सकते हैं. अगर इन सेवाओं पर अलग से चार्ज लगने लगा तो ग्रुप में होने वाला यह संवाद खत्म हो जाएगा, क्योंकि कोई भी ज्यादा कीमत देकर संवाद करने को प्रथमिकता नहीं देगा.

  4. इसके साथ ही जब एक ही नेट पैक में सारी सेवाएं मिल रही हैं, तो एक ही सेवा के लिए दो बार अलग से चार्ज का कोई अर्थ ही नहीं बनता.

 

यहां देखें AIB का पूरा वीडियो