सोशल मीडिया के खतरों से बचाएगा आपका कॉमन-सेंस

By: | Last Updated: Tuesday, 19 August 2014 1:38 PM

इंदौर: सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को साइबर अपराधियों से आगाह करते हुए कम्प्यूटर सुरक्षा सलाहकार अंकित फाड़िया ने आज कहा कि इंटरनेट के बढ़ते खतरों से सामान्य बोध :कॉमन सेंस: और सावधानी के जरिये बचा जा सकता है.

 

अपनी नयी किताब ‘सोशल: फिफ्टी वेज टू इम्प्रूव योअर प्रोफेशनल लाइफ’ के प्रचार के लिये यहां आये फाड़िया ने कहा, ‘सोशल मीडिया उपयोगकर्ता अक्सर उत्सुकता के कारण असुरक्षित या असुविधाजनक फोटो, वीडियो और लिंक खोल देते हैं.

 

इससे कई बार या तो खतरनाक वायरस डाउनलोड हो जाते हैं या फ्रेंड लिस्ट के सभी लोगों को स्पैम संदेश चले जाते हैं. इस खराब स्थिति से सामान्य बोध और सावधानी के जरिये बचा जा सकता है.’

 

उन्होनें कहा कि सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को अपनी निजता की रक्षा के लिये सोच.समझकर फोटो और वीडियो अपलोड करने चाहिये. इसके साथ ही, किसी भी अनजान और संदिग्ध फोटो, वीडियो और लिंक को आंख मूंदकर नहीं खोलना चाहिये.

 

युवा कम्प्यूटर सुरक्षा सलाहकार ने सुझाया कि स्कूल स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाकर नयी पीढ़ी को बताया जाना चाहिये कि उसे सोशल मीडिया पर क्या करना चाहिये और क्या नहीं. इसके साथ ही, साइबर सुरक्षा पर नये तकनीकी पाठ्यक्रम भी शुरू होने चाहिये. उन्होंने कहा, ‘सरकार ने अच्छे साइबर कानून बनाये हैं. लेकिन इन कानूनों को लागू करने वाली पुलिस के पास प्रशिक्षित कर्मियों की बड़ी कमी है. इससे साइबर अपराध के मामलों की जांच प्रभावित होती है.’ मशहूर एथिकल हैकर ने एक सरकारी रिपोर्ट के हवाले से बताया कि वर्ष 2015 तक देश में 4.7 लाख एथिकल हैकरों की जरूरत होगी.

 

बहरहाल, फाड़िया कहते हैं, ‘एथिकल हैकरों की यह जरूरत पूरी करने के लिये देश में पर्याप्त संख्या में साइबर सुरक्षा के पाठ्यक्रम नहीं चलाये जा रहे हैं.’

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