लंबे समय तक जीने और हेल्दी रहने के लिए हाई फैट डायट से बेहतर कुछ नहीं!

लंबे समय तक जीने और हेल्दी रहने के लिए हाई फैट डायट से बेहतर कुछ नहीं!

हाल ही में आई एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि हाई फैट फूड लॉन्ग टर्म में फायदा पहुंचाते हैं.

By: | Updated: 07 Sep 2017 11:45 AM

लॉस एंजिलिसः अभी तक ये माना जाता थ कि हाई फैट फूड लेना हेल्थ के लिए अच्छा नहीं है. लेकिन हाल ही में आई एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि हाई फैट फूड लॉन्ग टर्म में फायदा पहुंचाते हैं.


क्या कहती है रिसर्च-
रिसर्च में दावा किया गया है कि हाई फैट फूड लेने से न सिर्फ वजन कम करने में मदद मिलती है बल्कि इससे शारीरिक क्षमता बढ़ती है और उम्र भी बढ़ती है.


क्यों की गई रिसर्च-
स्वास्थ्य फायदे के विभिन्न दावों के लिये कीटोजेनिक डायट ने लोकप्रियता हासिल की है लेकिन वैज्ञानिक अब भी इस बात का पता लगा रहे हैं कि कीटोसिस के दौरान क्या होता है जब कार्बोहाइड्रेट को ग्रहण करना इतना कम हो जाता है कि शरीर ग्लूकोज को ऊर्जा के मुख्य स्रोत के तौर पर इस्तेमाल करना छोड़कर वसा को गलाना शुरू कर देता है और ऊर्जा के लिये कीटोंस बनाने लगता है.


कैसे की गई रिसर्च-
अमेरिका में कैलिफोर्निया डेविस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने चूहों को तीन ग्रुप्स में बांटा. एक नियमित चूहा जो हाई कार्बोहाइड्रेट डायट पर रखा गया, एक को कम कार्बोहाइड्रेट/हाई फैट फूड पर रखा गया और एक को कीटोजेनिक डायट पर (कुल कैलोरी का 89-90 फीसदी लेना).


पहले इस बात को लेकर चिंता थी कि ज्यादा हाई फैट फूड से वजन बढ़ जायेगा और लाइफ कम हो जाएगी. शोधकर्ताओं ने हर डायट के लिये कैलोरी की मात्रा एक जैसी ही सुनिश्चित की थी.


रिसर्च के नतीजे-
शोधकर्ताओं ने रिसर्च में पाया कि चूहे के औसत जीवनकाल में महत्वपूर्ण इजाफा करने के साथ ही कीटोजेनिक डायट से याद्दाश्त, क्षमता और समन्वय में भी बढ़ोतरी हुई. इसके साथ ही उम्र के साथ दिखने वाली निशानियों की रोकथाम भी हुई. इसका ट्यूमर के आकार पर भी असर पड़ता है.


क्या कहना है एक्सपर्ट का-
अमेरिका में कैलिफोर्निया डेविस विश्वविद्यालय के न्यूट्रिशनिस्ट जॉन रामसे ने कहा कि इस मामले में हम जिन चीजों को देख रहे थे वे इंसानों में होने वाली चीजों से बहुत ज्यादा अलग नहीं हैं. यह रिसर्च बताती है कि कीटोजेनिक डायट का लाइफ और हेलथ पर अहम प्रभाव हो सकता है बिना ज्यादा वजन घटाये या खाने-पीने पर पाबंदी लगाये.


यह रिसर्च सेल मेटाबॉलिज्म नाम के जर्नल में पब्लिश हुई थी.


नोट: ये रिसर्च के दावे पर हैं. ABP न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.

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