डेंगू, चिकनगुनिया रूमेटाइड अर्थराइटिस के लिए जिम्मेदार

डेंगू और चिकनगुनिया के बाद गठिया भी हो सकता है, मरीजों पर रखी जाए नजर

मच्छरों के काटने से होने वाले घातक रोगों डेंगू और चिकनगुनिया के करीब 20 प्रतिशत मरीज गठिया के शिकार हो सकते हैं.

By: | Updated: 13 Oct 2017 11:46 AM

नयी दिल्ली: मच्छरों के काटने से होने वाले घातक रोगों डेंगू और चिकनगुनिया के करीब 20 प्रतिशत मरीज गठिया (रह्युमेटायड अर्थराइटिस) के शिकार हो सकते हैं. यह बात एक अध्ययन में सामने आई है.


क्या कहती है रिसर्च-
डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों में गठिया के बारे में अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों ने विश्व अर्थराइटिस दिवस के मौके पर बताया कि मच्छरों के काटने से होने वाले इन दोनों रोगों के करीब 80 प्रतिशत मरीज चार महीने के बाद इन बीमारियों के लक्षणों से पूरी तरह मुक्त हो जाते हैं लेकिन 20 प्रतिशत मरीजों में गठिया हो जाता है और ऐसे में इन मरीजों को अस्थि रोग चिकित्सकों से परामर्श करना जरूरी हो जाता है.


किसने की ये रिसर्च-
अर्थराइटिस केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष और इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ और सर्जन डा राजू वैश्य ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में उपमहानिदेशक सुजीत कुमार सिंह और इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के आर्थोपेडिक सर्जन प्रोफेसर डा. अमित कुमार अग्रवाल के साथ मिलकर की गई एक केस स्टडी के आधार पर निष्कर्ष निकाला है. यह केस स्टडी प्रसिद्ध शोध पत्रिका ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में भी प्रकाशित हुई है.


क्या कहते हैं एक्सपर्ट-
डेंगू के बढ़ते प्रकोप के बीच डा. वैश्य ने एक बयान में कहा कि डेंगू और चिकनगुनिया के विषाणु हमारी रोग प्रतिरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी पैदा करते हैं और इसके परिणाम स्वरूप इन बीमारियों के 20 प्रतिशत मरीजों में रह्युमेटायड अर्थराइटिस की समस्या पैदा हो जाती है. अगर डेंगू और चिकनगुनिया के ठीक होने के कुछ सप्ताह बाद रह्युमेटायड के लक्षण प्रकट हों तो संबंधित डाक्टर से परामर्श करना चाहिए.


स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में उपमहानिदेशक डा. सुजीत कुमार सिंह ने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों के लक्षणों पर करीब से निगरानी रखी जानी चाहिए और अगर गठिया के लक्षण नजर आएं तो तत्काल इलाज शुरू करना चाहिए.


डा. वैश्य ने कहा कि आज के समय में युवाओं में बढ़ते मोटापे, फास्ट फूड के बढ़ते प्रयोग, विलासितापूर्ण जीवन और दिनचर्या से गायब होते व्यायाम जैसे कारणों से कम उम्र में ही हड्डियों और जोड़ों में कमजोरी की समस्या शुरू होने लगी है.


अर्थराइटिस के लक्षण-
अर्थराइटिस के लक्षणों में जोड़ों में दर्द, जोड़ों में अकड़न, चाल में बदलाव, सुबह जागने पर जोड़ों में कड़ापन और बुखार प्रमुख है. अर्थराइटिस से बचाव के लिये नियमित व्यायाम करना चाहिये. खान-पान और रहन-सहन पर विशेष ध्यान देना चाहिये.


नोट: ये रिसर्च के दावे पर हैं. ABP न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.

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