दिल्ली की हवा ‘काफी खराब’: पटाखों के प्रतिबंध बोले विशेषज्ञ

दिल्ली की हवा ‘काफी खराब’: पटाखों के प्रतिबंध बोले विशेषज्ञ

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिवाली के बाद भी पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध से क्या दिल्ली के लोग राहत की सांस ले सकेंगे?

By: | Updated: 11 Oct 2017 11:18 AM

नयी दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिवाली के बाद भी पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध से क्या दिल्ली के लोग राहत की सांस ले सकेंगे? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा नहीं होगा. दिल्ली की हवा प्रदूषण से परिपूर्ण है और महानगर धुएं की चादर में लिपटा हुआ है.


उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत-


लेकिन विशेषज्ञों ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत किया, जिसमें प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए 31 अक्तूबर तक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध है.


केंद्रीय पर्यावरण मंत्री हर्षवर्द्धन ने लोगों से आग्रह किया है कि उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों का पालन करें और ‘‘हरित दिवाली मनाएं और पर्यावरण को स्वच्छ रखें.’’


क्या कहते हैं विशेषज्ञ-


विशेषज्ञों ने खतरे से निपटने के लिए इस पर लगातार ध्यान देने की जरूरत बताई और कहा कि पटाखों से हवा में प्रदूषण के स्तर में काफी बढ़ोतरी होती है.


पर्यावरण प्रदूषण (निवारण एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) के अध्यक्ष भूरे लाल ने कहा, ‘‘यह स्वागत योग्य कदम है. दिल्ली की हवा वर्तमान में प्रदूषण से भरी हुई है क्योंकि धान की पराली जलाने का मौसम शुरू हुआ है और तापमान गिर रहा है. दिवाली के पटाखे इस समस्या को और बढ़ा देते हैं.’’


वर्तमान स्थितियों को देखते हुए जहां महानगर में हवा की गुणवत्ता ‘काफी खराब’ है, दिवाली में पटाखे चलाने से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है. बहरहाल, 24 घंटे का औसत एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) ‘खराब’ है जो ‘काफी खराब’ से कुछ ठीक है.


वर्द्धन ने कई ट्वीट कर कहा कि पटाखों के कारण फेफड़े की कई बीमारियां, उच्च रक्तचाप और बेचैनी होती है.उन्होंने लिखा, ‘‘निश्चित तौर पर हमें पक्षियों और जानवरों के बारे में भी सोचना चाहिए जो पटाखे और आवाज के कारण शाम में डरकर जीते हैं.’’


टेरी के महानिदेशक अजय माथुर ने कहा, ‘‘प्रतिबंध से सुनिश्चित होगा कि हवा में प्रदूषण का स्तर उस स्तर तक नहीं पहुंचेगा जितना पिछले वर्ष दिवाली के समय पहुंचा था. कम समय अंतराल में धूल और धूलकण के हटने के लिए अनुकूल मौसम नहीं होने के कारण यह प्रतिबंध सही दिशा में उठाया गया कदम है.’’

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