सावधान! मोबाइल के इस्तेमाल से हो सकता है ब्रेन ट्यूमर

By: | Last Updated: Friday, 21 April 2017 11:47 AM
Italian court rules cell phone use linked to tumor

नई दिल्लीः क्या आप भी दिनभर मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं? क्या आप अपने मोबाइल से बिल्कुल अलग नहीं रह सकते? क्या ऑफिस में आपको भी मोबाइल पर काम करना होता है? अगर हां, तो आपको ब्रेन ट्यूमर हो सकता है. ये हम नहीं कह रहे बल्कि एक अदालत में ऐसा कहा गया है.

क्यों कहा गया ऐसा-
इटली के एक कोर्ट में ब्रेन ट्यूमर का कारण मोबाइल को माना गया है. दरअसल, इस बात को एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए इटली की कोर्ट ने स्वीकार किया है. हालांकि अभी इस फैसले को हाई कोर्ट तक ले जाया जा रहा है.

क्या है मामला-
57 वर्षीय रॉबर्टो रोमियो को अपने काम के दौरान रोजाना तीन से चार घंटे मोबाइल का इस्तेमाल करना पड़ता है. वे पिछले 15 सालों से नौकरी कर रहे हैं. पहले रोमियो को महसूस हुआ कि उनके राइट कान में सुनना बंद हो गया है. ट्रीटमेंट के दौरान उन्हें 2010 में पता चला कि ब्रेन ट्यूमर है. बेशक, ट्यूमर बहुत बड़ा नहीं था लेकिन अब रोमियो को कुछ नहीं सुनाई देता क्योंकि डॉक्टर्स को इलाज के दौरान उनकी ऑडिटरी नर्व निकालनी पडी.

क्या कहा कोर्ट ने-
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि रोमियो के कान को 23 पर्सेंट नुकसान उनके काम की वजह से हुआ है. ऐसे में कोर्ट ने आइएनएआइएल (वर्कप्लेस पर दुर्घटनाओं को कवर करने वाली एक नेशनल इंश्योरेंस स्कीम) को रोमियो को हर महीने 500 यूरो गुजारा भत्ता देने को कहा है.

क्या कहते हैं रोमियो और उमके वकील-  
इस मामले में रोमियो का कहना है कि वे मोबाइल सेवा वर्कप्लेस पर बंद नहीं करवाना चाहते लेकिन वो इस बारे में ध्यान दिलाना चाहते हैं कि मोबाइल के इस्तेमल के दौरान सर्तक रहना बहुत जरूरी हैं.

वहीं रोमियों के वकील का कहना है कि दुनिया में पहली बार इस तरह का मामला सामने आया है जिसमें कोर्ट ने इस बात को स्वीकार किया है कि मोबाइल फोन के ज्यादा यूज और ब्रेन ट्यूमर के बीच संबंध है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट-
इस संबंध में एबीपी न्यूज़ ने जब ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. संजय मंगला से बात की तो उनका कहना था कि ऐसे केसेज अभी प्रूव नहीं हुए हैं लेकिन डॉक्टर्स की ऐसी धारणा है कि अगर यंग ऐज में किसी को नर्व डेफनेस है और ऐसे लोगों का मोबाइल का काम बहुत ज्यादा है तो उन्हें ये समस्या आ सकती है. हालांकि इसे डायरेक्टिली को-रिलेट करना बहुत मुश्किल है. ये बात तय है कि जैसे ईयर फटिग होता है. आप लगातार किसी के कान में बोलते चले जाएं तो निश्चित तौर पर उस व्यक्ति की हियरिंग नर्व थक जाती है. ऐसे में हियरिंग नर्व वीकनेस के बहुत से मामले सामने आए हैं. लेकिन इसे आप प्रूव नहीं कर सकते कि ये मोबाइल पर घंटों बात करने से ही हुआ है. डॉ. का साफ-साफ कहना है कि अगर आपकी हियरिंग नर्व वीक है और आप घंटों मोबाइल पर बात करते हैं तो हियरिंग प्रॉब्लम हो सकती है.

डॉ. सलाह देते हैं कि ऐसे में जब भी किसी व्यक्ति को टेलिफोन ऑपरेटर की जॉब दी जाए तो सबसे पहले उनका ऑडियोमेट्री टेस्ट करवाया जाए. इसके साथ ही हर साल उस व्यक्ति का हियरिंग असि‍स्‍टमेंट हो. जब भी ऐसा महसूस हो कि व्यक्ति को हियरिंग प्रॉब्लम आने वाली है या आ रही है तो तुरंत उनकी जॉब बदल दी जाए. आज के समय में जेट या फ्लाइंग में जो लोग काम करते हैं उनके लिए हियरिंग असि‍स्‍टमेंट करवाना मेंडेटरी होता है. दरअसल, जेट की साउंड बहुत तेज होती है. उनके लिए बहुत जरूरी होता है.

शारदा हॉस्पिटल के न्यूरो सर्जन यूनिट हेड डॉ. विकास भारद्वाज का कहना है कि ऐसा होना पॉसिबल है. डॉ. का कहना है कि ब्रेन की डिफरेंट फ्रीक्वेंसी वेब्स होती हैं. इस फ्रीक्वेंसी के हिसाब से ब्रेन डिफरेंट सिचुएशन में डिफरेंट तरीके से काम करता है. ये वेब्स हाई मॉड्यूलेशन फ्रीक्वेंसी वेब्स से डिस्टर्ब हो सकती हैं. हाई मॉड्यूलेशन फ्रीक्वेंसी वेब्स मोबाइल और टेलिफोन से आती हैं. जब ब्रेन की फ्रीक्वेंसी वेब्स डिस्टर्ब होती हैं तो ये ब्रेन को डैमेज तो नहीं करती लेकिन ब्रेन के फंक्शन को डिस्टर्ब कर देती है. इससे व्यक्ति को साइक्लोजिकल डिस्टर्बेंस हो सकती है. नींद डिस्टर्ब हो जाती है. एग्रेशन हो सकता है. इरिटेशन हो सकती है. कैमिकल चेंज हो सकते हैं. हाई मॉड्यूलेशन वेब्स कैंसर और ब्रेन डैमेज से रिलेटिड नहीं होती. ये प्रूफ भी नहीं हुआ है. स्टडी में ये साबित हो चुका है कि मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से वेब्स डिस्टर्ब हो सकती है.

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