अब ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ इलाज में मिल सकती है मदद

अब ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ इलाज में मिल सकती है मदद

By: | Updated: 09 Oct 2017 09:41 AM

नयी दिल्ली: भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष मंगलम की अगुवाई में शोधकर्ताओं की एक टीम ने आंत के बैक्टीरिया ‘प्रीवोटेला’ की खोज की है जिसका इस्तेमाल ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ और इससे मिलती-जुलती अन्य बीमारियों के इलाज के लिए किया जा सकता है.


क्या है मल्टीपल स्क्लेरोसिस-
‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ सेंट्रल नर्व्स सिस्टा की बीमारी है जो दिमाग और रीढ़ को प्रभावित करती है. यह शरीर के  इम्यून सिस्टम के कमजोर होने और ‘माइलिन’ कोशिकाओं का बनना बंद होने के कारण होती है. आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारकों से भी यह बीमारी हो सकती है. इसमें शरीर के विभिन्न अंग प्रभावित होते हैं. करीब 20 से 50 साल की उम्र के बीच के लोगों को अपना शिकार बनाने वाली इस बीमारी की चपेट में लंबे समय तक रहने से मरीज को विकलांगता का शिकार होना पड़ता है. हालांकि, यह ‘लकवा’ से अलग तरह की बीमारी है.


क्या कहते हैं आकड़े-
अमेरिका के लोक स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 30 लाख लोग इस बीमारी की चपेट में हैं. साल 2015 में इस बीमारी से करीब 20,000 लोगों की मौत हुई थी.


क्या है शोध का मकसद-
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा के पैथोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर मंगलम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. मंगलम ने अमेरिका के आयोवा से बताया कि उनका शोध आंत के बैक्टीरिया पर आधारित है. वह अपने शोध के जरिए बताना चाहते हैं कि आंतों के बैक्टीरिया इंसान को सेहतमंद रखने में कैसे मदद करते हैं.


इस शोध में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा और रोचेस्टर स्थित मेयो क्लीनिक के वैज्ञानिकों की भागीदारी रही.


क्या कहते है एक्सपर्ट-
डॉ. आशुतोष मंगलम का कहना है कि पिछले कुछ दशकों में भारत में ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ रोग की चपेट में आने वाले लोगों की तादाद काफी बढ़ी है. इस रोग का निदान थोड़ा कठिन होने के कारण डॉक्टरों का मानना है कि भारत में इसके मरीजों की सही से पहचान नहीं हो पाती. उन्होंने कहा कि लोगों में ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ के बारे में और जागरूकता फैलाने की जरूरत है. सही पहचान न होने पर मरीजों को गलत दवा देने की आशंका रहती है.


पिछले करीब 15 साल से ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ पर शोध कर रहे मंगलम ने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, ‘‘हमारी आंत में खरबों अच्छे बैक्टीरिया रहते हैं. वह हमें सेहतमंद बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. अच्छे बैक्टीरिया हमारे भोजन को पचाने के अलावा हमारे शरीर की विभिन्न क्रियाओं में मदद करते हैं.’’


क्यों होती है ये बीमारी-
हमारी आंत के अच्छे बैक्टीरिया हमारी प्रतिरक्षा कोशिकाओं के विकास में मदद करते हैं. ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ के मरीजों की आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की कमी हो जाती है, जिसकी वजह से कुछ लोगों में यह बीमारी होती है.


कैसे की गई रिसर्च-
शोधकर्ताओं ने ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ के मरीजों की आंतों में बैक्टीरिया की जांच की और उनकी तुलना सेहतमंद लोगों की आंत के बैक्टीरिया से की.


शोधकर्ताओं की टीम ने ‘प्रीवोटेला’ के विभिन्न स्ट्रेन्स को सेहतमंद लोगों की आंत से निकाला और उनका परीक्षण चूहों पर किया.


रिसर्च के नतीजे-
रिसर्च में पाया गया कि ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ के मरीजों की आंत के बैक्टीरिया सेहतमंद लोगों से भिन्न थे. रिसर्च में उन विशेष बैक्टीरिया की पहचान की गई जिनकी कमी ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस के मरीजों में थी. रिसर्च में पाया गया कि ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ के मरीजों में ‘प्रीवोटेला’ नाम के बैक्टीरिया की कमी थी.
रिसर्च में ये भी पाया गया कि बहुत सारे बैक्टीरिया में से एक ‘प्रीवोटेला हिस्टीकोला’ में ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ वाले चूहों में बीमारी को सुधारने की क्षमता थी. ‘प्रीवोटेला हिस्टीकोला’ ने बीमारी के लक्षण में सुधार लाने के साथ-साथ दिमाग और रीढ़ में सूजन को भी कम किया. रिसर्च में यह भी दिखा कि ‘प्रीवोटेला हिस्टीकोला’ ने शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को बढ़ाया.


इस रिसर्च को इसी साल अगस्त महीने में ‘सेल रिपोर्ट’ पत्रिका में प्रकाशित किया गया. हालांकि, अभी इस बैक्टीरिया पर और शोध करने की जरूरत है ताकि इसके प्रभाव की जांच ठीक से की जा सके.


नोट: ये रिसर्च के दावे पर हैं. ABP न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.

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