इस मौसम में यूं बचा सकते हैं बच्चों को निमोनिया से

By: | Last Updated: Thursday, 10 December 2015 6:56 AM
Pneumonia Symptoms and Risk Factors

नई दिल्ली : आम फ्लू, छाती के संक्रमण और लागातार खांसी के लक्षण निमोनिया से मेल खाते हैं. जबकि निमोनिया असल में बैक्टीरिया, वायरस, फंगस या परजीवी से फेफड़ों में होने वाला एक किस्म का संक्रमण होता है, जो फेफड़ों में एक तरल पदार्थ जमा करके खून और ऑक्सीजन के बहाव में रुकावट पैदा करता है. बलगम वाली खांसी, सीने में दर्द, तेज बुखार और सांसों में तेजी निमोनिया के लक्षण हैं.

अगर आपको या आपके बच्चे को फ्लू या अत्यधिक जुकाम जैसे लक्षण हैं, जो ठीक नहीं हो रहे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर सीने का एक्सरे करवाएं, ताकि निमोनिया होने या न होने का पता लगाया जा सके.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयूएचओ) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया पांच साल से छोटी उम्र के बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने व मृत्यु होने का प्रमुख कारण है. इस बारे में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के महासचिव डॉ के.के. अग्रवाल ने कहा, “छोटे बच्चे, नवजातों और समय पूर्व प्रसव से होने वाले बच्चे, जिनकी उम्र 24 से 59 महीने है और फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हैं, हवा नली तंग है, कमजोर पौष्टिकता और रोगप्रतिरोधक प्रणाली वाले बच्चों को निमोनिया होने का ज्यादा खतरा होता है.”

उन्होंने कहा कि अस्वस्थ व अस्वच्छ वातावरण, कुपोषण और स्तनपान की कमी की वजह से निमोनिया से पीड़ित बच्चों की मौत हो सकती है, इस बारे में लोगों को जागरूक करना बेहद आवश्यक है. कई बच्चों की जान बचाई जा सकती है और यह डॉक्टरों का फर्ज है कि वे नई मांओं को अपने बच्चों को स्वस्थ रखने तथा सही समय पर वैक्सीन लगवाने के लिए बताएं.

निमोनिया कई तरीकों से फैल सकता है. वायरस और बैक्टीरीया अक्सर बच्चों के नाक या गले में पाए जाते हैं और अगर वह सांस से अंदर चले जाएं तो फेफड़ों में जा सकते हैं. वह खांसी या छींक की बूंदों से हवा नली के जरिये भी फैल सकते हैं. इसके साथ ही जन्म के समय या उसके तुरंत बाद रक्त के जरिये भी यह फैल सकता है.

वैक्सीन, उचित पौष्टिक आहार और पर्यावरण की स्वच्छता के जरिये निमोनिया रोका जा सकता है. निमोनिया के बैक्टीरिया का इलाज एंटीबायटिक से हो सकता है, लेकिन केवल एक तिहाई बच्चों को ही एंटीबायटिक्स मिल पा रहे हैं. इसलिए जरूरी है कि सर्दियों में बच्चों को गर्म रखा जाए, धूप लगवाई जाए और खुले हवादार कमरों में रखा जाए. यह भी जरूरी है कि उन्हें उचित पौष्टिक आहार और आवश्यक वैक्सीन मिले.

नियूमोकोकल कोंजूगेट वैक्सीन और हायमोफील्स एनफलुएंजा टाईप बी दो प्रमुख वैक्सीन हैं, जो निमोनिया से बचाती हैं. लेकिन 70 प्रतिशत बच्चों को महंगी कीमत और जानकारी के अभाव की वजह से यह वैक्सीन लगवाई नहीं जाती. इसलिए सरकार को चाहिए कि वह राष्ट्रीय स्तर पर इस वैक्सीन को बच्चों तक पहुंचाने के लिए योजना बना कर लागू करे, ताकि इस बीमारी को कम किया जा सके.

Health News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Pneumonia Symptoms and Risk Factors
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Related Stories

इन बातों का रखे ध्यान, ताकि आपको ना लगे 'स्वाइन फ्लू' की नज़र
इन बातों का रखे ध्यान, ताकि आपको ना लगे 'स्वाइन फ्लू' की नज़र

2009 से लेकर अब तक स्वाइन फ्लू भारत में 5000 लोगों को हमसे छीन चुका है. इस साल भी स्वाइन फ्लू के फैलने...

खुशखबरी! अब मूंगफली से होने वाली एलर्जी का हो सकेगा इलाज
खुशखबरी! अब मूंगफली से होने वाली एलर्जी का हो सकेगा इलाज

नई दिल्ली: कई लोगों को मूंगफली से एलर्जी होती है यानि पीनट एलर्जी से परेशान लोगों के लिए अब...

ऐसे लोगों को अधिक रहता है अल्जाइमर होने का खतरा!
ऐसे लोगों को अधिक रहता है अल्जाइमर होने का खतरा!

नई दिल्लीः हाल ही में एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि भूलने की बीमारी यानि अल्जाइमर का खतरा उन...

सावधान! लंबे समय तक फैटी लिवर बढ़ा सकता है लिवर कैंसर का खतरा
सावधान! लंबे समय तक फैटी लिवर बढ़ा सकता है लिवर कैंसर का खतरा

नई दिल्ली: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का कहना है कि फैटी लिवर से पीड़ित लोगों की संख्या में...

बीमारी की पहचान में सुधार के लिए आया मल्टीकलर एमआरआई
बीमारी की पहचान में सुधार के लिए आया मल्टीकलर एमआरआई

वाशिंगटन: वैज्ञानिकों ने एमआरआई (मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग) को मल्टीकलर बनाने का तरीका...

सांस की इन दो बीमारियों से दुनिया भर में 36 लाख लोगों की मौत
सांस की इन दो बीमारियों से दुनिया भर में 36 लाख लोगों की मौत

नई दिल्ली: ‘लांसेट रिस्पीरेटरी मेडिसिन’ मैग्जीन में ये दावा किया है कि दो आम क्रोनिक लंग...

दवाओं और चिकित्सकीय उपकरणों की कीमतों पर लगाम लगाने की मांग
दवाओं और चिकित्सकीय उपकरणों की कीमतों पर लगाम लगाने की मांग

नयी दिल्ली: नी रिप्लेसमेंट में लगने वाले आर्टिफिशियल अंगों के मूल्य तय किए जाने की सरकार की...

‘नी रिप्लेसमेंट’ के दामों में कटौती अच्छा कदम, अब गुणवत्ता पर भी ध्यान देने की जरूरत
‘नी रिप्लेसमेंट’ के दामों में कटौती अच्छा कदम, अब गुणवत्ता पर भी ध्यान देने...

नयी दिल्ली: आर्टिफिशियल नी इम्प्लांट सस्ते होने की सरकार की घोषणा का स्वागत करते हुए...

गुजरात में स्वाइन फ्लू से अब तक 230 की मौत
गुजरात में स्वाइन फ्लू से अब तक 230 की मौत

वडोदरा/अहमदाबाद: गुजरात में स्वाइन फ्लू यानि एच1एन1 वायरस से इंफेक्टेड होकर मरनेवालों की...

गोरखपुर में इन्सेफेलाइटिस वार्ड में एक और बच्चे की मौत
गोरखपुर में इन्सेफेलाइटिस वार्ड में एक और बच्चे की मौत

गोरखपुर: बाबा राघव दास मेडिकल कालेज से कल एक और बच्चे की मौत हो गयी. बच्चा मेडिकल कालेज के...

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017