हैरतअंगेज, स्कूल की लड़कियों को नहीं है माहवारी के बारे में सटीक जानकारी

हैरतअंगेज, स्कूल की लड़कियों को नहीं है माहवारी के बारे में सटीक जानकारी

माहवारी के बारे में अधिक जागरूकता ना होने से स्कूली बच्चियों की हेल्थ पर नेगेटिव इफेक्ट पड़ रहा है.

By: | Updated: 25 Sep 2017 11:13 AM

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नई दिल्ली: पंजाब के मोहाली में सरकारी स्कूल और निजी स्कूल में आयोजित एक तुलनात्मक अध्ययन किया है. अध्ययन में स्कूलों में छात्राओं का माहवारी के दौरान स्वच्छ‍ता और प्रथाओं को लेकर रिसर्च की गई. जिसमें पाया गया की माहवारी के बारे में अधिक जागरूकता ना होने से स्कूली बच्चियों की हेल्थ पर नेगेटिव इफेक्ट पड़ रहा है.


क्या कहती है रिसर्च-
डॉक्टर्स द्वारा की गई स्टडी में यह भी पता चला है कि सरकारी स्कूलों और निजी स्कूल की बच्चियों के बीच जागरूकता के स्तर में अंतर परिवारों के सामाजिक और आर्थिक स्थिति की वजह से है. रिसर्च में ये भी सामने आया कि निजी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं की माएं ज्यादा पढ़ी-लिखी होती है और वहां टीचर्स-स्टूडेंट्स के बीच अच्छा रिश्ता है, बावजूद इसके प्राइवेट स्कूल की लड़कियों के बीच भी माहवारी को लेकर जागरूकता में काफी कमी देखी गई.


शोधकर्ताओं ने सिफारिश की है कि स्कूलों के पाठ्यक्रम में एक बदलाव होना चाहिए. बेहतर शिक्षक और छात्र के संबधों के लिए मेंस्ट्रुअल हाइजीन की और लड़कियों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए.


क्या कहते हैं शोधकर्ता-
पटियाला के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के सहायक प्रोफेसर डॉक्टर मनोहर लाल शर्मा, सलाहकार अनुसंधान अधिकारी, राज्य स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, पंजाब के करणप्रीत कौर और जीएमसीएच पटियाला के सीनियर निवासी विशाल मल्होत्रा का इस बारे में कहना है कि हालांकि यह सिर्फ एक सरकारी और निजी स्कूलों में लड़कियों की माहवारी स्वच्छता के स्तर में अंतर को देखने के लिए एक शुरूआती रिसर्च थी.


रिसर्च के नतीजे-
रिसर्च में पाया गया है कि सरकारी स्कूल की लड़कियों की तुलना में निजी स्कूलों की लड़कियों में जागरूकता का स्तर बेहतर है लेकिन निजी स्कूल का नतीजा उतना शानदार नहीं है जितना कि होना चाहिए. देखा गया है कि इन दोनों मामलों में माता-पिता और शिक्षकों ने लड़कियों को शुरू होने से पहले माहवारी के बारे में शिक्षित करने में सक्रिय भूमिका नहीं निभायी है.


रिसर्च की सलाह-
स्टडी कहती है कि पाठ्यक्रम में मेंस्ट्रुअल हाइजीन की स्वच्छता को शामिल करने से युवा लड़कियों को आत्मविश्वास के साथ-साथ इस गंभीर शारीरिक स्थिति को समझने में भी मदद मिलेगी.


नोट: ये रिसर्च के दावे पर हैं. ABP न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.

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