ऐसे बच्चों की कभी ना करवाएं कीमोथेरेपी!

By: | Last Updated: Tuesday, 23 February 2016 9:54 AM
The Risks and Side Effects of Chemotherapy Treatments

आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले सामान्य कीमोथेरेपी टॉक्सिन्स बचपन में कैंसर रोग से उबार तो लेते हैं, लेकिन बच्चों की आंखों पर ये बुरा असर डालते हैं. एक शोध में यह दावा किया गया है. स्वीडन की लुंड यूनिवर्सिटी से इस अध्ययन के शोधार्थी पर-एंडर्स फ्रैंन्सन का कहना है, “हमने अध्ययन किया है कि ऐसे बहुत से रोगी अपनी आंखों को सुचारु रूप से घुमा नहीं पाते हैं.”

फ्रैंसन ने बताया, “आंखों की गतिशीलता के प्रभावित होने से हमारी आंखें किसी वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी महसूस करती हैं. इससे सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या भी हो सकती है.”

इस शोध में 20-30 वर्ष की आयु के 23 लोगों को शामिल किया गया था, जिन्हें बचपन में कैंसर रोग से गुजरना पड़ा था. इनकी तुलना समान उम्र के 25 स्वस्थ्य लोगों से की गई.

शोध के दौरान बचपन में कैंसर रोगी रहे ज्यादातर प्रतिभागियों में यह विकार देखे गए.

जिन प्रतिभागियों को सिस्प्लैटिन, मीथोट्रिक्सेट और इफोसफैमीड जैसे कीमो के प्रकार दिए गए थे, उनमें रक्त-मस्तिष्क बाधा के लक्षण देखने को मिले, जो बाद में तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं.

शोधकर्ताओं ने पाया है कि इन प्रतिभागियों में अधिकांश अपने कैंसर के उपचार के लगभग 15 साल बाद भी उपचार के प्रभाव से पीड़ित हैं.

अध्ययन के अनुसार, कम उम्र के रोगियों में यह उपचार काफी प्रभाव डालता है.

स्वीडन के लुंड शहर के स्केन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल से थॉमस वीब कहते हैं, “बच्चों में मस्तिष्क पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता है, ऐसे में जटिल उपचार से यह अतिसंवेदनशील बन जाता है.”

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Web Title: The Risks and Side Effects of Chemotherapy Treatments
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