अति महत्वाकांक्षा और कांग्रेसभक्ति ने संपत पाल को गुलाबी गैंग से बाहर निकलवाया

By: | Last Updated: Tuesday, 4 March 2014 2:10 PM
अति महत्वाकांक्षा और कांग्रेसभक्ति ने संपत पाल को गुलाबी गैंग से बाहर निकलवाया

नई दिल्ली: यूपी के बुंदेलखंड में महिला उत्पीड़न के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाला गुलाबी गैंग अंतर्कलह से गुजर रहा है. गैंग में दो फाड़ हो गया है. 53 वर्षीय गैंग कमांडर संपत पाल की तानाशाही और राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते संगठन ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है.

 

संगठन की महिलाओं ने बांदा जिले के अट्टारा इलाके में एक बैठक आयोजित की, जिसमें सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास कर सुमन सिंह को गुलाबी गैंग का कार्यवाहक कमांडर नियुक्त किया गया है. संपत की सदस्यता भी बर्खास्त कर दी गई है.

 

गैंग के राष्ट्रीय संयोजक जयप्रकाश शिवहरे ने कहा कि पूर्णकालिक कमांडर के चुनाव के लिए 23 मार्च को संगठन की बैठक बुलाई है. हालांकि, संपत पाल ने संगठन की बैठक में हिस्सा नहीं लिया था. संपत का दावा है कि अभी भी संगठन की अधिकांश सदस्य उनके समर्थन में हैं. उन्होंने कहा है कि विरोधी सदस्यों के बावजूद वे संगठन को मजबूत बनाए रख सकती हैं. 

 

गैंग की कुछ गुलाबी बहनों का आरोप है कि पूर्व मुखिया संपत पाल खुद के प्रमोशन के लिए संगठन का पैसा उड़ा रही हैं. लिहाजा, असंतुष्ट सदस्यों ने महोबा इकाई की सुमन सिंह चौहान को नए कमांडर के रूप में चुन लिया. संगठन को चलाने के लिए अब एक सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है.

 

शिवहरे ने कहा, “पाल के खिलाफ संगठन में भारी रोष है. वह कांग्रेस पार्टी के हाथों में खेल रही है. पाल ने न सिर्फ संगठन की बैठक लेना बंद कर दिया, बल्कि वह सदस्यों पर तानाशाह रवैया भी आजमाने लगी थी. उसने संगठन के सदस्यों की सहमति बगैर कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ने का निर्णय ले लिया.”

 

संयोजक ने कहा, “संपत ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के समर्थन में आम आदमी पार्टी के खिलाफ रायबरेली में चुनाव प्रचार करने का निर्णय ले लिया. यहां तक कि संगठन से पूछे बिना रियलिटी शो बिग बॉस में भी हिस्सा ले लिया.” शिवहरे का आरोप है कि संपत धीरे-धीरे स्वार्थी बन गई. उसने संगठन के नाम पर पैसे तक बनाना शुरू कर दिया.

 

बांदा जिले की कमांडर मिट्ठू देवी ने कहा, “हम उनके काम की प्रशंसा करते हैं, लेकिन वह संगठन के सदस्यों से बुरा बर्ताव करने लगी थीं.” संपत पर ये भी आरोप है कि कांग्रेस नेताओं के लिए चुनाव में प्रचार करने के लिए उन्हें रिश्वत दी गई थी.

 

संपत पाल पीडीएस सिस्‍टम में फैले भ्रष्‍टाचार से तंग आ चुकीं थीं और अप्रैल 2006 में उन्‍होंने कुछ महिलाओं के साथ जमाखोरों के घर पर छापेमारी की. उन्‍होंने भ्रष्‍ट सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अभियान के समर्थन में अपने साथ कुछ पुरुषों को भी लिया. कानून हाथ में लेने के आरोप में उन्‍हें साल 2010 में मायावती के शासन में गिरफ्तार भी किया गया. वर्तमान में उनके खिलाफ 11 मामले चल रहे हैं.

 

संपत पाल की प्रसिद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 7 मार्च को रिलीज होने जा रही फिल्‍म ‘गुलाब गैंग’ उन्‍हीं की पृष्‍ठभूमि से प्रेरित है. साल 2011 में अंतरराष्ट्रीय ‘द गार्जियन’ पत्रिका ने संपत पाल को दुनिया की 100 प्रभावशाली प्रेरक महिलाओं की सूची में शामिल किया, जिसके बाद कई देसी-विदेशी संस्थाओं ने उन पर डॉक्यूमेंट्री फिल्में तक बना डाली.

 

फ्रांस की एक पत्रिका ‘ओह’ ने साल 2008 में संपत पाल के जीवन पर आधारित एक पुस्तक भी प्रकाशित की जिसका नाम था ‘ आई संपत पाल, चीफ ऑफ द रोज़ सारी गैंग’ जिसका मतलब है ‘मैं संपत पाल- गुलाबी साड़ी में गैंग की मुखिया’ है. संपत पाल अंतरराष्ट्रीय महिला संगठनों द्वारा आयोजित महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम में भाग लेने पेरिस और इटली भी जा चुकी है.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: अति महत्वाकांक्षा और कांग्रेसभक्ति ने संपत पाल को गुलाबी गैंग से बाहर निकलवाया
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017