अब लोकपाल का क्या होगा?

अब लोकपाल का क्या होगा?

By: | Updated: 18 May 2014 01:45 PM
नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी अपनी सरकार बनने पर भ्रष्टाचार खत्म करने का वादा करते रहे हैं. भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए मज़बूत लोकपाल की ज़रूरत बीजेपी समेत सभी दल मानते हैं. लेकिन अब ये सवाल उठ रहा है कि क्या नई लोकसभा में नेता विपक्ष का पद अधर में लटकने से लोकपाल की नियुक्ति भी खटाई में पड़ सकती है?

 

दिसंबर 2013 में संसद ने जो लोकपाल कानून पारित किया है, उसके मुताबिक लोकपाल के चयन के लिए बनने वाली समिति के पांच सदस्यों में एक नाम लोकसभा में नेता विपक्ष का है.

 

लेकिन जैसा कि नरेंद्र मोदी ने कहा, नई लोकसभा में किसी भी पार्टी को इतनी सीटें नहीं मिली हैं कि उसके नेता को लोकसभा में अपने आप ही नेता विपक्ष का दर्जा मिल जाए.

 

लोकसभा में नेता विपक्ष का ओहदा उसी पार्टी के नेता को मिल सकता है, जिसके सदन में कम से कम दस फीसदी यानी 54 सांसद हों.

 

दिक्कत ये है कि सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस के लोकसभा में सिर्फ 44 सांसद जीतकर आए हैं. ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि अगर लोकसभा में किसी को नेता विपक्ष का दर्जा ही नहीं मिला, तो क्या लोकपाल का चयन भी अटक पाएगा?

 

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का कहना है कि अगर यूपीए अपना नेता चुन ले और स्पीकर उसे नेता विपक्ष का ओहदा दे दें, तो ये समस्या दूर हो सकती है.

 

हालांकि इस मसले का एक और समाधान भी है. संसद में पारित लोकपाल कानून के तहत चयन समिति में नेता विपक्ष को शामिल तो किया गया है, लेकिन लोकपाल की नियुक्ति के लिए समिति में उसकी मौजूदगी अनिवार्य नहीं है.

 

लोकपाल के चेयरमैन या सदस्य की नियुक्ति को सिर्फ इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि चयन समिति का कोई पद खाली है.

 

लोकपाल कानून के इस प्रावधान का सीधा मतलब तो यही निकलता है कि पांच सदस्यों वाली लोकपाल चयन समिति में नेता विपक्ष का पद खाली रहने पर भी लोकपाल की नियुक्ति की जा सकती है.

 

हालांकि नई सरकार अगर ऐसा कदम उठाएगी, तो राजनीतिक तौर पर उसका कड़ा विरोध किए जाने के आसार भी बने रहेंगे.

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