अब हिमाचल प्रदेश में भी गरमाया फोन टैपिंग का मुद्दा

अब हिमाचल प्रदेश में भी गरमाया फोन टैपिंग का मुद्दा

By: | Updated: 18 Feb 2013 05:59 AM


शिमला:
हिमाचल प्रदेश में भी फोन
टैपिंग का मुद्दा गरमा गया
है. मुख्यमंत्री वीरभद्र
सिंह ने खुलासा किया है कि
उन्हें बीजेपी की धूमल सरकार
के समय हुई फोन टैपिंग की
रिपोर्ट मिल गई है और अब वो
जल्द ही ये बात सामने लाएंगे
जिससे ये पता चलेगा कि धूमल
सरकार ने कितने फोन अपने लिए
टेप करवाए.

दरअसल, हिमाचल
प्रदेश सेंट्रल फोरेंसिक
लैब (सीएफएसएल) ने सरकार को
सौंपी अपनी रिपोर्ट में ये
खुलासा किया है कि 1,000 फोन की
टैपिंग की गई.

अब वीरभद्र
कह रहे हें, 'मैं पहले से कहता
था कि धूमल सरकार ने फोन
टैपिंक करवाई है और अब सच
सामने आ गया.'
 
सत्ता में
आने के बाद वीरभद्र सरकार ने
सीआईडी और विजिलेंस के चार
सीपीयू (हार्ड डिस्क) जब्त कर
सीएफएसएल को जांच के लिए सौंप
दी थी. इस मामले में अब
सीएफएसएल ने मुख्य सचिव को
फ़ोन टैप होने की जांच रिपोर्ट
सौंपी है. 

रिपोर्ट में
धूमल सरकार के 2008 से लेकर 2012 तक
के कार्यकाल के बीच करीब 1100
फोनन कॉल्स टैप किए जाने का
जिक्र है.

धूमल इन आरोपों
से इनकार कर चुके हैं, लेकिन
मुख्यमंत्री का कहना है कि
राज्य के मुख्यमंत्री के साथ
ही गृह मंत्रालय की
जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास
थी लिहाजा वो जिम्मेदारी से
बच नहीं सकते.

क्या कहता
है कानून ?

फ़ोन टैपिंग
सिर्फ राज्य की सुरक्षा से
जुड़े मामलों या फिर
नारकोटिक्स के मामले में
किसी पर संदेह होने की स्थिति
में ही किए जा सकते है. लेकिन
इसके लिए भी सरकार के अधिकारी
और फ़ोन कंपनी की कमेटी से
इजाजत लेना जरूरी है.

अगर
अवैध तरीके से फ़ोन टैपिंग हुई
हो तो तीन साल की सजा और एक
हजार रुपये जुर्माने का
प्रावधान है.




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