अमेरिकी अदालत ने 1984 दंगा मामले में कांग्रेस के खिलाफ मुकदमा खारिज किया

अमेरिकी अदालत ने 1984 दंगा मामले में कांग्रेस के खिलाफ मुकदमा खारिज किया

By: | Updated: 29 Apr 2014 05:55 AM

न्यूयार्क: एक अमेरिकी अदालत ने सिख विरोधी दंगों के मामले में एक सिख समूह द्वारा कांग्रेस पार्टी के खिलाफ दायर मानवाधिकार उल्लंघन के एक मुकदमे को खारिज कर दिया है.

 

अदालत ने मुकदमा खारिज करते हुए कहा कि समूह के पास ऐसा मुकदमा दायर करने को लेकर कोई कानूनी आधार नहीं है और जो मामले अमेरिका से ‘‘जुड़े या उसकी चिंता का विषय’’ नहीं हैं उनकी सुनवाई अमेरिकी अदालत में नहीं होगी.

 

जज रोबर्ट स्वीट ने सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) द्वारा दायर मुकदमा खारिज करने की कांग्रेस पार्टी की अपील स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि मानवाधिकार समूह एक वादी नहीं हो सकता और व्यक्तिगत वादी ‘कानूनी प्रतिनिधि’ नहीं हैं.

 

स्वीट ने कल अपने आदेश में कहा कि एसएफजे यह साबित करने में असफल रहा कि यह मामला अमेरिका से ‘जुड़ा या उसकी चिंता का विषय’ है. उन्होंने कहा, ‘‘किसी अन्य संशोधन की अनुमति नहीं है और मामला खारिज किया जाता है.’’

 

एसएफजे ने कहा कि वह एक अपील अदालत में इस आधार पर निर्णय को चुनौती देगा कि यह मामला अमेरिका से पर्याप्त रूप से ‘‘जुड़ा और उसके बारे में’’ है और एसएफजे के पास 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के लिए ‘‘घोषणात्मक निर्णय’’ की मांग करने का ‘‘संस्थागत आधार’’ है. एसएफजे के पास अपनी अपील दायर करने के लिए 23 मई तक का समय है.

 

कांग्रेस पार्टी के अटार्नी रवि बत्रा ने कहा कि जज ने फैसला सुनाया है कि एसएफजे और मामले में अन्य नामित वादियों के पास ऐसा मामला दायर करने का कानूनी आधार नहीं है.

 

अदालत ने इस विषय पर क्षेत्राधिकार की कमी के कारण भी मामला खारिज कर दिया और एसएफजे को शिकायत में कोई अतिरिक्त संशोधन दायर करने से भी रोक दिया क्योंकि ऐसा करना व्यर्थ होगा.

 

बत्रा ने ‘प्रेस ट्रस्ट’ से कहा कि इस मामले के खारिज होने से कानून के शासन की सर्वोच्चता साबित हुई है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक मिसाल कायम की है कि पूरी तरह से विदेशी जमीन पर विदेशियों द्वारा और उनके बीच होने वाली घटनाओं की सुनवाई, जो अमेरिका से जुड़ी नहीं हैं या उसके बारे में नहीं है, अमेरिकी अदालतों में नहीं होगी.

 

उन्होंने कहा कि कानूनी दृष्टि से एसएफजे एक विदेशी नहीं अपितु एक अमेरिकी निगम है और अमेरिका का संघीय कानून एलियन टॉर्ट स्टैचूट केवल विदेशियों को मामला दायर करने की इजाजत देता है. अन्य व्यक्तिगत वादियों को भी मुकदमा दायर करने की अनुमति नहीं है क्योंकि उन्हें न्यूयार्क के कानून या भारतीय कानून ने ‘‘कानूनी प्रतिनिधि’’ होने की स्वीकृति नहीं दी है.

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