अरविंद केजरीवाल ने क्यों दिया इस्तीफा?

By: | Last Updated: Monday, 17 February 2014 12:16 PM

अरविंद केजरीवाल ने उसी जनलोकपाल के मुद्दे पर अपनी सरकार सरकार को शहीद कर दिया जिसके बूते पर वे सत्ता में आए थे. ना तो जनलोकपाल बिल पास हुआ और ना ही स्वराज बिल पर कुछ कर सके. वही केजरीवाल देश से भ्रष्टाचार मिटाने के लिए 100 बार सीएम की कुर्सी कुर्बान करने को तैयार थे. स्वराज के लिए और सत्ता सीधे जनता के हाथ में देने के लिए 1000 बार सीएम की कुर्सी कुर्बान करने को तैयार थे फिर क्या हुआ वो मैदान छोड़कर भाग गये, लेकिन सवाल यही उठ रहा है कि केजरीवाल इतनी जल्दी में क्यों थे और क्यों इस्तीफा दिया.

 

 

बीजेपी और कांग्रेस पर तोहमत लगाना उनकी राजनीति का हिस्सा था लेकिन उनकी नजर लोकपाल पर कम लोकसभा चुनाव पर ज्यादा है. उनके इस्तीफे से कई सवाल खड़े हो रहे हैं. अरविंद केजरीवाल ने जनता से जनमत संग्रहकर दिल्ली में सरकार बनाने का फैसला किया था. लेकिन जब केजरीवाल ने इस्तीफा दिया तो उन्होंने जनता के एक भी नुमाइंदे से क्यों जनमत संग्रह नहीं कराया यानि राजनीति अपनी सहूलियत के हिसाब से हो रही है.

 

केजरीवाल की लिस्ट में 18 महत्वपूर्ण मुद्दे थे लेकिन 18 में से 5 वादे बमुश्किल और विवादित तरीके से लागू करने में सफल हुए. पहले उनके निशान पर कांग्रेस थी लेकिन अब मोदी को भी चुनौती दे रहे हैं. सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ने का भी फैसला किया है ताकि चुनाव में पार्टी को फायदा हो. 

 

केजरीवाल को इतनी हड़बड़ाहट में क्यों है?

 

आगे लोकसभा चुनाव और दो महीने में सरकार की किरकिरी शुरू हो गई थी. जिसपर अप्रैल से पानी और बिजली की किल्लत होने वाली थी जिससे सरकार की किरकिरी होती ऐसे में केजरीवाल रिस्क नहीं लेना चाहते थे. केजरीवाल टीम को लगने लगा कि अगर पार्टी दिल्ली में लगी रहेगी तो पार्टी का विकास और विस्तार नहीं हो सकता है.

 

केजरीवाल मुख्यमंत्री रहते हुए लोकसभा की तैयारी नहीं कर पा रहे थे और पार्टी को ऐसा लगने लगा कि आम आदमी पार्टी के समर्थन में देश में कुछ-कुछ हो रहा है जो लोकसभा चुनाव में चौकानेवाले नतीजे हो सकते हैं. पार्टी को लगने लगा कि अरविंद केजरीवाल अभी दिल्ली के बाहर प्रचार नहीं किया है इसके बावजूद पार्टी की पहुंच शहरों में पहुंच गई है लोग आम आदमी पार्टी के बारे में चर्चा कर रहे हैं. अगर अरविंद केजरीवाल लोकसभा चुनाव प्रचार करते हैं तो पार्टी और मजबूत होकर उभरेगी और इसका फायदा पार्टी को हो सकता है. 15 दिनों में 1 करोड़ लोग आम आदमी पार्टी के सदस्य बन गये हैं.

 

क्या अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनाव में फायदा होगा?

 

आम आदमी पार्टी की स्क्रिप्ट से ऐसा लगता है कि पार्टी अभी तक सारे मुद्दों पर सफल रही है. जो काम कोई सरकार 1 साल में करती है वो एक महीने में पूरा कर दिया है. दिल्ली में मुफ्त में पानी और बिजली के अलावा भष्ट्राचार पर काबू करने की घोषणा की, लाल बत्ती के कल्चर को खत्म करने की कोशिश की ये पूरा हुआ या नहीं ये भी सवाल है. ऐसा प्रतीत होता है कि केजरीवाल ने लोगों की उम्मीदों का उफान खड़ा कर दिया और इस उफान से केजरीवाल की पार्टी अति उत्साहित है.

 

केजरीवाल ने अंबानी को राजनीतिक अखाड़े पर खड़ा कर बीजेपी और कांग्रेस को घेरना चाहते हैं. ये अलग बात है कि जिस पार्टी के समर्थन से केजरीवाल ने 49 दिनों तक शासन किया तो केजरीवाल को कांग्रेस से समर्थन लेने से पहले अंबानी क्यों याद नहीं आया. यही सच है कि इसमें फक़्त राजनीति है. देश के कुछ लोगों को केजरीवाल से अंधभक्ति हो गई है. चाहे केजरीवाल गलत फैसला ले या सही लेकिन कुछ लोग उनके साथ हैं. केजरीवाल का मकसद सिर्फ हंगामा करने का है लेकिन सूरत बदलने की कोशिश नहीं है चूंकि सूरत बदलते तो शायद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देते. खैर पार्टी ने 350 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है हो सकता है कि पार्टी को 15 से 25 सीटों मिल सकती है. ये तस्वीर बदल सकती है अगर आम आदमी पार्टी से दूसरी पार्टियां गठबंधन करने को तैयार हो जाए. हो सकता है लेफ्ट पार्टियां आम आदमी पार्टी से हाथ मिला तो आंकड़े में फेरबदल हो सकता है. केजरीवाल को नुकसान कम फायदा ज्यादा दिखता है.

 

क्या केजरीवाल को नुकसान भी सकता है?

 

केजरीवाल राजनीति के बड़े ही चतुर खिलाड़ी हैं. केजरीवाल की चाल ना तो बीजेपी को समझ आ रही है ना ही कांग्रेस को. उन्हें स्ट्रीट राजनीति में पारंगत हासिल है. ये भी सच है कि इस पार्टी की ना तो कोई विचार धारा है और ना ही संगठन लेकिन इसके बावजूद लोगों को काफी उम्मीदें हैं क्योंकि इस पार्टी से वो लोग जुड़े हुए हैं जो लेफ्ट विचारधारा, समाजवाद और भष्ट्राचार से परेशान लोगों हैं.

 

लेफ्ट और समाजवाद से जुड़े हुए लोग ना तो बीजेपी से हाथ मिला सकते हैं और ना ही कांग्रेस से लेकिन केजरीवाल 49 दिनों में जिस ढंग से राजनीति कर रहे हैं उससे कुछ लोगों को शक हो रहा है कि केजरीवाल देश की राजनीति के लिए खतरनाक साबित सिद्ध हो सकते हैं. लोग उन्हें अब अराजक और भगोड़ा कहने से भी नहीं हिचक रहे हैं.

 

कांग्रेस के खिलाफ हवा है और इस हवा को बीजेपी अपने पक्ष में मोड़ने में कितना कामयाब होती है इस पर निर्भर करता है. दूसरी बात है कि बीजेपी केजरीवाल टीम से कैसे निपटती है उस पर निर्भर करेगा. केजरीवाल ने दावा किया है कि उनकी सरकार ने बहुत काम किया है लेकिन ज्यादातर काम पेपर पर ही हुए हैं कोई ठोस काम नहीं हुआ. दिल्ली का विकास कैसे हो उसपर कुछ नहीं किया, ना ही उनके विजन में दिखा है. केजरीवाल की सरकार के अंत से ज्यादा अहम है उन उम्मीदों का अंत हो जाना जो उनसे उम्मीदें पाल कर रखे हैं. ये संदेश जाने लगा है कि वो हर बात पर हंगामा खड़ा करना चाहते हैं. जब उन्होंने इस्तीफा दे ही दिया तो ये भी सवाल उठ रहें हैं कि दिल्ली का काम पूरा तो किया नहीं तो देश का क्या काम करेंगे. खैर लोकसभा चुनाव के नतीजे से तय होगा कि देश में केजरीवाल की राजनीति चलेगी या पार्टी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है.

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Web Title: अरविंद केजरीवाल ने क्यों दिया इस्तीफा?
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