आंध्र और तेलंगाना की साझा राजधानी होगी हैदराबाद

By: | Last Updated: Tuesday, 30 July 2013 11:15 AM
आंध्र और तेलंगाना की साझा राजधानी होगी हैदराबाद

नई
दिल्ली/मुंबई:
पृथक
तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर
केंद्र व आंध्र में सत्तारूढ
कांग्रेस पार्टी ने अपनी
मुहर लगा दी. कांग्रेस
वर्किंग कमेटी की मुहर लगने
से पहले इस पर यूपीए ने भी
अपनी मुहर लगायी. इसी के साथ
आंध्र प्रदेश से अलग
तेलंगाना राज्य की गठन की
प्रक्रिया तेज हो गई. इसकी
घोषणा कांग्रेस मीडिया सेल
के प्रभारी अजय माकन और आंध्र
प्रदेश के प्रभारी कांग्रेस
नेता दिग्विजय सिह ने की.

उन्होंने
कहा कि हैदराबाद दोनों
राज्यों आंध्र प्रदेश और
तेलंगाना की राजधानी होगी दस
सालों तक के लिये. तेलंगाना
में दस ही जिले होंगे पहले यह
चर्चा थी कि इसमें दो और
जिलों को शामिल किया जा सकता
है. इस प्रस्ताव को कल यानी 31
जुलाई को कैबिनेट में लाया
जायेगा.

हालांकि इस
मुद्दे पर आज राजधानी दिल्ली
से लेकर हैदराबाद तक की
राजनीतिक गतिविधियां उफान
पर रहीं. आज की सबसे बड़ी
गतविधियों की शुरूआत
कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया
गांधी ने की. उन्होंने
तेलंगाना के मुद्दे पर
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
से मुलाकात की. फिर सोनिया
गांधी कांग्रेस के दिग्गज
नेताओं से मुलाकात की जिसमें
आंध्र प्रदेश के प्रभारी
दिग्विजय सिंह, गृह मंत्री
सुशील कुमार शिंदे, वित्त
मंत्री पी चिदंबरम व
केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी
आजाद और सोनिया गांधी के
राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल
शामिल थे. कांग्रेस
उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी
आंध्र प्रदेश के नेताओं से
मिलते रहे.

तेलंगाना
का प्रस्तावित स्वरूप

तेलंगाना
राज्य की मांग जिन दस जिलों
को लेकर की जा रही थी वह दस
जिले पृथक राज्य में होंगे.
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
दोनों ही राज्यों की राजधानी
हैदराबाद होगी दस सालों के
लिये.

तेलंगाना राज्य की
मांग क्यों ?

राज्य
पुनर्गठन के तहत जब आंध्र
प्रदेश प्रदेश का गठन एक
नवंबर 1956 किया गया था उसी
दौरान ही तेलंगाना के हिस्से
को शामिल कर लिया गया.

यहां के गरीब और किसान
जमींदारों से परेशान थे.
आखिरकार उनका विरोध शुरू हुआ
और यह विरोध तेलंगाना के
क्षेत्र में फैलता गया. एक
बार तो विरोध का स्वरूप इतना
बड़ा हो गया था कि हालात को
नियंत्रण करने के लिये सेना
भेजनी पड़ी थी.

आईये
जानते हैं कि इतने सालों बाद
भी आखिर तेलंगाना की मांग
क्यों बनी हुई है– तेलंगाना
इलाके में विकास का अभाव,
राज्य के दूसरे हिस्सों के
अपेक्षा बडे पैमाने पर
बेरोजगारी, राज्य के बजट
आंवटन में भेदभाव, प्रदेश के
रेवेन्यू में तेलंगाना की
भागीदारी लगभग 76 प्रतिशत है
बावजूद अभाव है विकास का,
गोदावरी और कृष्णा नदियों के
पानी का दो-तिहाई से ज्यादा
संग्रह तेलंगाना में होता है
लेकिन इस इलाके को महज 17 फीसदी
पानी मिलता है. जबकि राज्य की
कुल आबादी का लगभग 40 प्रतिशत
हिस्सा इसी इलाके में रहते
हैं.

तेलंगाना राज्य के
गठन के विरोध में तर्क

अलग
तेलंगाना राज्य का विरोध
किया जा रहा है. आंध्र प्रदेश
के नेता चाहे वह मुख्यमंत्री
किरण कुमार रेड्डी हो या वहां
के अन्य बड़े नेता इसके विरोध
में हैं. विरोध करने वालों का
तर्क है कि इससे नक्सल समस्या
बढेगी, राज्य की कानून
व्यवस्था प्रभावित होगी और
दूसरे राज्यों में बंटवारे
की मांग बढेगी.

अलग
राज्य बनने को लेकर तनाव

हैदराबाद
में स्थित भले नियंत्रण में
हो लेकिन तनाव का माहौल है.
मुख्यमंत्री किरण रेड्डी
समेत कई आंध्र के वरिष्ठ नेता
है जो विभाजन के पक्ष में नही
हैं. हालात पर केंद्रीय गृह
मंत्रालय भी नजर बनाये हुए
है.

विधायी प्रक्रिया

यूपीए
और कांग्रेस वर्किंग कमेटी
में सहमति के बाद अब तेलंगाना
राज्य के गठन से संबंधित बिल
को कैबिनेट के पास भेजा
जायेगा. कैबिनेट से हरी झंडी
मिलने के बाद इसे ग्रुप ऑफ
मिनिस्टर व राज्य के
पुनर्गठन समिति को भेजा
जायेगा. यहां से प्रस्ताव
मिलने के बाद इसे फिर कैबिनेट
में भेजा जायेगा और कैबिनेट
से मंजूरी मिलने के बाद
प्रधानमंत्री की ओर से
राष्ट्रपति को भेजा जायेगा.

फिर
राष्ट्रपति तेलंगाना राज्य
से संबंधित बिल को आंध्र
प्रदेश की सरकार को विधान सभा
की मंजूरी के लिये भेजेंगे.
तय सीमा के अंदर विधान सभा से
मंजूरी मिलने के बाद
राष्ट्रपति फिर इसे केंद्र
सरकार को भेजेंगे. फिर
कैबिनेट से सहमति मिलने के
बाद इसे संसद के किसी भी एक
सदन में पेश किया जायेगा.
लेकिन इसे संसद के दोनो सदनो
से पारित होना जरूरी है. इसके
बाद इस विधेयक पर राष्ट्रपति
की मुहर लगते ही अलग राज्य का
गठन का रास्ता साफ हो जायेगा.

तेलंगाना
के बाद अन्य राज्य की मांगे
भी उठेगी

तेलंगाना
राज्य बनने की प्रकिया को आगे
बढते देख गोरखालैंड की भी
मांग जोर पकड़ने लगी है.
पश्चिम बगांल में गोरखालैंड,
असम से अलग बोडोलैंड, उत्तर
प्रदेश में बुंदेलखंड व हरित
प्रदेश व पूर्वाचंल के अलावा
महाराष्ट्र में विदर्भ की
मांगे भी जोर पकड़ सकती हैं.
बहरहाल तेलंगाना राज्य का
गठन हो जाता है तो यह देश का 29
वां राज्य होगा.

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