आखिर किसने निकाला देश का दिवाला?

आखिर किसने निकाला देश का दिवाला?

By: | Updated: 19 Aug 2013 07:49 AM


नई
दिल्ली:
डॉलर 63 रुपये 25 पैसे
तक पहुंच गया है. ये अब तक की
ये सबसे बड़ी गिरावट है. आज
सेंसेक्स भी चार सौ अंक तक
गिर गया था. बाद में सेंसेक्स
थोड़ा संभलकर 291 अंक नीचे बंद
हुआ.

रो
रहा है रुपया






डॉलर के मुकाबले रुपये की
कीमत गिरने से पेट्रोल-डीजल
और महंगे होंगे. विदेश से आने
वाली हर चीज महंगी होगी.
महंगाई बढ़ेगी और आपकी ईएमआई
पर भी असर पड़ेगा.




रुपये
की हालत हुई खराब






कुल मिलाकर देश का दिवाला
निकल रहा है. अब सवाल ये है कि
देश का दिवाला किसने निकाला?




महंगाई पहले से ही बढ़ी है,
पेट्रोल-डीजल के भाव लगातार
बढ़ रहे हैं, गैस सिलेंडर भी
गरम है, देश का दिवाला निकला
हुआ है और अब रुपये की हालत
पतली हो गई.

क्या
होगा रुपये के गिरने का असर






डॉलर ने ऐसा डंक मारा कि
रुपये को 63 तक पहुंचा दिया.
यानी हुआ यूं कि एक डॉलर लेने
जाएंगे तो 63 रुपये देन
पड़ेंगे. रुपये की ये अब तक की
सबसे खराब हालत है.

खराब
है सेंसेक्स की भी हालत






रुपया कमजोर हुआ तो सबसे पहले
शेयर बाजार में सुनामी आई,
सेंसेक्स 800 अंक गिर गया. कुल
मिलाकर रुपये ने कमजोर
अर्थव्यवस्था की और कमर तोड़
दी.




अब सवाल ये कि आखिर रुपये की
ये हालत कैसे हुई?



1. डॉलर मजबूत हो रहा है




रुपये की इस हालत के लिए सबसे
बड़ी वजह है डॉलर का मजबूत
होना. 2008 की मंदी के बाद से
अमेरिका ने खुद को मजबूत करने
के लिए बाजार में करीब दो खरब
डॉलर डाले थे. ये रकम भारत, चीन
समेत दुनिया भर की कई देशों
में लगी. अब अमेरिका अपने
पैसे वापस खींचने की बात कर
रहा है, इसलिए डॉलर का भाव तो
बढ़ रहा है लेकिन  भारत,
ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका
जैसे देशों की मुद्राएं धूल
चाट रही हैं. यूं समझिए कि
बाजार में ज्यादा माल है तो
कम भाव और कम माल है तो ज्यादा
भाव.

2. व्यापार घाटा बढ़
रहा है





देश का आयात बढ़ रहा है जबकि
निर्यात कम है. मतलब ये कि
आयात बढ़ने से ज्यादा डॉलर
बाहर जा रहे हैं जबकि निर्यात
कम होने की वजह से देश में
डॉलर कम आ रहा है.

3. निवेश
की हालत ठीक नहीं है





जब तक भारत में निवेश के लिए
माहौल नहीं बनेगा तब तक रुपये
की हालत ज्यादा ठीक नहीं हो
पाएगी. मतलब ये कि विदेशी
कंपनियां देश में आएंगी तो
साथ में डॉलर भी लाएंगी.
रिटेल में एफडीआई का भी फायदा
अब तक नहीं हो सका है. कुल
मिलाकर विदेशी कंपनियां
हमारी अर्थव्यवस्था पर
भरोसा नहीं कर पा रही हैं.

4.
सामाजिक योजनाओं पर खर्च





सरकार ने गरीबों के भलाई के
लिए जमकर पैसे लुटाए. मनरेगा
जैसी योजनाओं में लाखों खर्च
किए गए. ऐसी योजनाओं में खर्च
करना जरूरी भी है लेकिन इस
अनुपात में पैसे बनाने के लिए
कोई जुगाड़ नहीं किया गया.





रुपये के गिरने से असर क्या
होगा?



रुपये के गिरने से सबसे पहले
पेट्रोल-डीजल मंहगा होगा.
पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ तो
महंगाई बढ़ेगी. महंगाई
बढ़ेगी तो आपकी ईएमआई भी
बढ़ेगी. विदेश में पढ़ाई का
खर्च बढ़ेगा. इन सबके अलावा
भारत की रेटिंग गिरेगी सो
अलग. फिर वही सिलसिला चालू हो
जाएगा यानी रेटिंग गिरी तो
विदेशी निवेशक भारत के बाजार
पर भरोसा नहीं करेंगे. यानी
विदेशी निवेशक नहीं आएंगे.
ऐसा होगा तो रुपया और महंगा
हो जाएगा.




कैसे संभलेगा रुपया?



रुपये को संभालना है तो सबसे
पहले डॉलर जुटाने का जुगाड़
करना होगा. डॉलर जुटाने के
लिए अर्थव्यवस्था को विदेशी
निवेशकों के लायक बनाना होगा.
आयात कम करना होगा. सोने के
आयात पर ज्यादा लगाम लगानी
होगी. निर्यात बढ़ाने की
कोशिश करनी होगी. ये सारे
उपाय हुए तब जाकर रुपये की
हालत ठीक हो सकती है.




http://www.youtube.com/watch?v=MKq-NfiB3zM




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