आतंकवादी भुल्लर को भी नहीं होगी फांसी, SC ने उम्रकैद में बदली सजा

By: | Last Updated: Monday, 31 March 2014 5:29 AM
आतंकवादी भुल्लर को भी नहीं होगी फांसी, SC ने उम्रकैद में बदली सजा

नई दिल्ली: देवेन्द्र पाल सिंह भुल्लर को फांसी नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा माफ कर दी है. भुल्लर की फांसी उम्रकैद में बदल दी गई है. कोर्ट ने दया याचिका में हुई आठ साल की देरी और मानसिक रूप से बीमार होने को कोर्ट ने अपने फैसले का आधार बनाया है.

 

भुल्लर को दिल्ली में 1993 में हुए बम विस्फोट मामले में संलिप्तता का दोषी ठहराया गया है. उसकी पत्नी नवनीत कौर ने दया याचिका पर फैसला लेने में हुई देरी और उसके मनोरोगी होने के आधार पर मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने की मांग की थी.

 

भुल्लर को फांसी देने की सजा में हो रही देरी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी करके जवाब भी मांगा था जिसमें केंद्र सरकार ने स्वीकार किया था कि मृत्युदंड का सामना कर रहे देविंदर पाल सिंह भुल्लर की दया याचिका पर फैसला लेने में देरी हुई. केंद्र ने कहा था कि कोर्ट उसकी पत्नी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की याचिका पर विचार कर सकती है.

 

सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. सतशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने 21 जनवरी को कहा था कि दया याचिका पर बेवजह हो रही देरी के कारण मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदले जाने के दौरान आतंकवाद निरोधी कानून या सामान्य आपराधिक कानून के तहत दोषी पाए गए व्यक्ति में भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए.

 

अदालत ने यह भी कहा था कि इसमें मृत्युदंड की सजा पाए वे दोषी भी शामिल होंगे जो विक्षिप्त या मनोरोग या खंडित मानसिकता के शिकार हैं. अदालत ने इससे पहले मृत्युदंड की सजा पाए 15 दोषियों की सजा को उम्रकैद में बदल दिया.

 

इनमें से 13 दोषियों की दया याचिका वर्षो से लंबित रही और दो की सजा उनके मनोरोगी होने के कारण बदली गई. यही फैसला राजीव गांधी हत्याकांड में सजा पाए तीन लोगों पर भी लागू हुई और उनकी मौत की सजा उम्रकैद में बदल दी गई.