आसाराम ने दाखिल की जमानत अर्जी, गवाह बन चुके पुराने रसोइए ने की सुरक्षा की मांग

By: | Last Updated: Wednesday, 23 October 2013 7:06 AM
आसाराम ने दाखिल की जमानत अर्जी, गवाह बन चुके पुराने रसोइए ने की सुरक्षा की मांग

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<b>अहमदाबाद: </b>सूरत की
युवती से बलात्कार के आरोपी
आसाराम ने अब जमानत हासिल
करने के लिए अदालत का दरवाजा
खटखटाया है. आसाराम की तरफ से
उनके वकील ने गांधीनगर की
जिला अदालत में आज याचिका
दाखिल की.
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आसाराम की जमानत याचिका पर कल
सुनवाई होगी. आसाराम के वकील
बीएम गुप्ता ने इस बात की
पुष्टि की है.
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ग़ौरतलब है कि कल ही आसाराम
के पुलिस रिमांड की अवधि पूरी
हुई थी और अदालत ने उन्हें
न्यायिक हिरासत में भेजने का
आदेश दिया था. इसके बाद
अहमदाबाद पुलिस उन्हें
जोधपुर जेल पहुंचा आई, जहां
से ट्रांजिट रिमांड पर लाकर
आसाराम से अहमदाबाद में
पूछताछ की गई थी.
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आसाराम के महिला आश्रम की
चौकीदार जसवंतीबेन चौधरी की
तरफ से भी आज गांधीनगर की
अदालत में अग्रिम जमानत की
याचिका दाखिल की गई. इससे
पहले आसाराम की दो खास
साधिकाएं ढेल उर्फ निर्मला
और मीरा उर्फ बंगलो भी अग्रिम
जमानत हासिल करने के लिए
अदालत का दरवाजा खटखटा चुकी
हैं. इनकी याचिका पर शुक्रवार
को सुनवाई होनी है. इन सबके
नाम पीड़ित युवती की तरफ से
दर्ज कराई गई फरियाद में हैं.
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आसाराम की पत्नी लक्ष्मी,
बेटी भारती और महिला आश्रम की
संचालिका ध्रुव को पहले ही
गांधीनगर की अदालत की तरफ से
इस मामले में अग्रिम जमानत
मिल चुकी है. पीड़ित युवती ने
जो शिकायत दर्ज कराई है,
उसमें इन तीनों पर आसाराम को
उनके कुकृत्य में साथ देने का
आरोप लगाया गया है.
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<b>जब रसोइए अखिल ने छोड़ा
आश्रम</b>
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इस बीच गांधीनगर की अदालत
में आसाराम के पूर्व रसोइए
अखिल और उसकी पत्नी वर्षा की
तरफ से न्यायिक मजिस्ट्रेट
के सामने अपना बयान रिकॉर्ड
करा दिया गया है. अखिल लंबे
समय तक आसाराम का करीबी रहा
है, वही वर्षा आसाराम के
आश्रम में साधिका रह चुकी है,
जिसे पीड़ित युवती की तरह ही
अच्छा वक्ता बनाने का लालच
दिया था आसाराम ने. वर्षा 1996
में आसाराम के आश्रम में आई
थी और 2007 में उसने महिला आश्रम
छोड़ा. बाद में अखिल और वर्षा
ने प्रेम विवाह कर लिया. अखिल
ने भी आसाराम की गाली-गलौच और
मार पीट से तंग आकर ही आश्रम
छोड़ा था.
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सूत्रों के मुताबिक, अखिल और
वर्षा ने मजिस्ट्रेट के
सामने जो बयान दर्ज कराये
हैं, उसमें आसाराम के आश्रम
की गतिविधियों और आसाराम की
हरकतों के बारे में विस्तार
से जानकारी दी गई है. इससे
पहले अखिल ने अहमदाबाद पुलिस
को पूछताछ के दौरान बताया था
कि उसने पीड़ित युवती को
आसाराम के फार्महाउस ‘शांति
वाटिका’ में आते-जाते देखा
था. पीड़ित युवती ने अपनी
फरियाद में कहा है कि आसाराम
ने वर्ष 2001 में शांति वाटिका
में उसके साथ बलात्कार किया
था. अखिल ने कबूल किया है कि
उसने  पीड़ित युवती को दुखी
हालत में आसाराम के कमरे से
निकलते देखा था. अखिल ने
आसाराम के फार्महाउस पर और भी
कई युवतियों के आने की पुष्टि
की है.
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उधर वर्षा ने पुलिस को
जानकारी दी है कि आसाराम के
आश्रम में बलात्कार या
शारीरिक शोषण का शिकार होने
वाली युवतियों का गर्भपात
कराये जाने की बात उसने भी
सुनी थी. इस सिलसिले में उसने
दो-तीन डॉक्टरों के नाम भी
बताये हैं, जिनके बारे में
उसने सुना था. अहमदाबाद पुलिस
इस पहलू की भी छानबीन करने
में लगी है. दरअसल पीड़ित
युवती ने पुलिस को पूछताछ में
ये बताया था कि आसाराम के
महिला आश्रम की संचालिका
ध्रुव बलात्कार का शिकार
होने वाली युवतियों के
गर्भवती हो जाने पर उनका
एबॉर्शन करा देती थी. हालांकि
पुलिस ने जब इस मामले में
ध्रुव से पूछताछ की, तो उसने
इन आरोपों को बेबुनियाद बता
डाला. ध्रुव वर्ष 1986 से ही
आसाराम से जुड़ी हुई है और
उनकी अत्यंत करीबी है. पुलिस
को अभी तक की जांच-पड़ताल में
ध्रुव की पृष्ठभूमि के बारे
में जो जानकारी मिली है, उसके
हिसाब से मूल तौर पर वो
भावनगर की रहने वाली है और
उसका पूरा नाम ध्रुवबेन
गुरुनदास बलानी है. उसने
स्नातक तक की शिक्षा भी हासिल
की है.
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अखिल और उसकी पत्नी ने
मजिस्ट्रेट के सामने अपना
बयान तो दर्ज करा दिया है,
लेकिन अब उन्हें अपने उपर
हमले का भय सता रहा है.
उन्होंने अहमदाबाद पुलिस से
सुरक्षा की मांग की है, साथ
में ये भी कहा है कि
मुजफ्फरनगर में भी उन्हें
सुरक्षा मुहैया कराई जाए.
पति-पत्नी यूपी के मुजफ्फनगर
शहर में ही रहते हैं.
अहमदाबाद पुलिस इस सिलसिले
में जरुरी कार्रवाई करने में
लगी है. अखिल ने आशंका जताई है
कि आसाराम के खिलाफ बयान देने
के कारण आसाराम के समर्थक  या
साधक उस पर जानलेवा हमला कर
सकते हैं.
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इस बीच आसाराम और नारायण साईं
की तरफ से अपने खिलाफ दर्ज
एफआईआर को रद्द करने के लिए
गुजरात हाईकोर्ट में जो
याचिका दाखिल की गई है, उस पर
आज सुनवाई पूरी हो गई. अदालत
कल इस मामले में अपना फैसला
सुनाएगी. उधर नारायण साईं को
सूरत की अदालत से अग्रिम
जमानत की पुरानी याचिका को
वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा
और नये सिरे से याचिका दाखिल
करनी पड़ी. ऐसा इसलिए हुआ
क्योंकि सूरत पुलिस ने अदालत
को बताया कि नारायण साईं ने
फर्जी तरीके से दस्तावेजों
को नोटराइज कर अदालत में
अग्रिम जमानत की पुरानी
याचिका दाखिल की थी. नारायण
साईं की तरफ से दाखिल नई
याचिका पर अब पचीस अक्टूबर को
सुनवाई होगी. अदालत ने सूरत
पुलिस को निर्देश दिया है कि
नारायण साईं की पुरानी
याचिका में हुए फर्जीवाड़े
के बारे में मुकम्मल रिपोर्ट
तीस अक्टूबर तक पेश करे. 
जाहिर है, नारायण साईं इस बीच
सूरत पुलिस के साथ
लुक्का-छिप्पी का खेल खेलते
रहने की पूरी कोशिश करेगा.
सूरत में जब छह अक्टूबर को
उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई,
उसके बाद से ही नारायण साईं
फरार चल रहा है और उसे पकड़ने
के लिए सूरत पुलिस की तरफ से
की गई कोशिशें अभी तक कामयाब
नहीं हो पाई हैं.<br />
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