‘इनमें से कोई नहीं’ का विकल्प लागू करना समस्या नहीं: सुप्रीम कोर्ट

By: | Last Updated: Friday, 27 September 2013 9:09 AM

नई
दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने
नकारात्मक मतदान की अनुमति
देने वाली अपनी व्यवस्था में
कहा है कि मौजूदा
इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों
में किसी अतिरिक्त खर्च या
प्रौद्योगिकी में किसी
बदलाव के बगैर ही इसका
प्रावधान किया जा सकता है.

प्रधान न्यायाधीश पी
सदाशिवम की अध्यक्षता वाली
खंडपीठ ने अपने निर्णय में
निर्वाचन आयोग के इस तर्क का
संज्ञान लिया है कि
इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों
में ‘इनमें से कोई नहीं’ का
विकल्प शामिल करने में न तो
कोई अतिरिक्त खर्च आयेगा और न
ही इन मशीनों की डिजाइन या
प्रौद्योगिकी में कोई बदलाव
करना पड़ेगा.

न्यायालय ने कहा कि निर्वाचन
आयोग ने अपनी लिखित दलील में
कहा है कि मौजूदा
इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों
में ही बगैर किसी खर्च या
प्रौद्योगिकी बदलाव के
नकारात्मक या तटस्थ मतदान की
सुविधा मुहैया करायी जा सकती
है. न्यायालय ने कहा कि
निर्वाचन आयोग की इस दलील के
मद्देनजर ‘इनमें से कोई
नहीं’ बटन की व्यवस्था
मशीनों में सबसे अंत में लागू
करने में अधिक मशक्कत नहीं
करनी पड़ेगी. न्यायालय ने
निर्वाचन आयोग से कहा कि
केन्द्र सरकार की मदद से
नकारात्मक मतदान व्यवस्था
या तो चरणबद्ध तरीके से या एक
ही बार में लागू की जाये.
न्यायालय ने सरकार को इस
संबंध में आयोग को आवश्यक
सहयोग करने का भी निर्देश
दिया.

न्यायालय ने फैसले में यह भी
कहा कि निर्वाचन आयोग 64
स्थानों की वर्तमान
व्यवस्था में बदलाव करते
हुये ईवीएम में 200 नामों का
पैनल विकसित करने की
संभावनाएं तलाश रहा है.

न्यायालय ने कहा कि विधि आयोग
ने चुनाव कानूनों में सुधार
के बारे में अपनी 170वीं
रिपोर्ट में भी नकारात्मक
मतदान की व्यवस्था लागू करने
की सिफारिश की थी. न्यायालय
ने कहा कि ’इनमें से कोई भी
नहीं’ के तहत मतदान की
गोपनीयता निर्वाचन आयोग को
बनाये रखनी होगी.

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