इराक के मोसुल शहर से 40 भारतीय अगवा: भारत सरकार

By: | Last Updated: Wednesday, 18 June 2014 2:41 AM
इराक के मोसुल शहर से 40 भारतीय अगवा: भारत सरकार

नई दिल्ली: भारत सरकार ने पुष्टि की है कि इराक के शहर मोसुल से 40 भारतीय मज़दूर अगवा कर लिए गए हैं. अगवा किए गए सभी मज़दूर निर्माण कार्य से हुए थे.

 

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अगवा किए गए भारतीय कंस्ट्रक्शन कंपनी तारिक नूर अल हुडा में काम करते हैं.

 

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सयैद अकबरुद्दीन का कहना है कि अगवा किए गए 40 भारतीय कामगारों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है.

 

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक ये लोग एक कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट में लगे हुए थे और वहां से निकलने के दौरान आतंकियों ने उन्हें अगवा कर लिया.

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है, “हमें किसी तरह का फोन नहीं आया है, चाहे वह फिरौती का फोन ही क्यों नहीं हो. किसी ने फोन करके अगवा करने का दावा नहीं किया है.”

 

अकबरुद्दीन ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम है कि अगवा किए गए लोगों को कहां रखा गया है.

 

अकबरूद्दीन ने मीडिया को बताया, “ऐसी खबरें है कि मोसुल में 40 भारतीय कामगार हैं. हमारी पूरी कोशिश के बावजूद इस वक्त हम उनसे संपर्क स्थापित नहीं कर पाए हैं. इसलिए, इस वक्त तक वे संपर्क से बाहर हैं.”

 

अमृतसर में घबराहट

 

उधर इराक में भारतीयों के अगवा किए जाने की खबर से उनके घरों में कोहराम मच गया है. अमृतसर में गुरपिंदर कौर अपने अगवा भाई मनजिंदर सिंह के लिए परेशान है तो रंजीत कौर अपने अगवा बेटे जतिंदर सिंह की वापसी की बाट जोह रही हैं.

 

इस घटना में ISIL (इस्लामिक स्टेट इन इरान  एंड लेवात) आतंकियों का हाथ होने की आशंका है. अखबार के मुताबिक अब तक आतंकियों ने अपनी ओर से कोई मांग नहीं रखी है. विद्रोहियों ने मोसुल शहर को कब्जा कर रखा था लेकिन स्थानीय लोगों ने आतंकियों को भगा दिया है. तिकरित शहर में 46 नर्सें भी फंसी हुई हैं. आतंकवादी संगठनों ने इराक के तिकरित, मोसूल और फलूजा तीनों शहरों पर कब्जा कर लिया है.

 

मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने बताया कि भारत सरकार के अनुरोध पर इराकी रेड क्रिसेंट तिकरित में फंसी 46 भारतीय नर्सो की तलाश कर रही है. इन नर्सो में अधिकांश केरल से हैं. अकबरुद्दीन ने कहा कि भारत इराक में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से संपर्क में है और दूतावास के प्रयासों में मदद के लिए अपने अनुभवी राजनयिक सुरेश रेड्डी को बगदाद भेजेगा.

 

 

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भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षित देश वापसी के लिए हर संभव प्रयास में जुटी है. इराक में भारत के पूर्व राजदूत सुरेश रेड्डी को समझौते के लिए भेजा गया है. रेड्डी को हाल ही में आसियान का विशेष दूत नियुक्त किया गया है. रेड्डी को इराक में अच्छे संपर्क होने के कारण यह जिम्मेदारी सौंपी गई है.

 

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि बगदाद में भारतीय मिशन इराक की सरकार और यूएन असिस्टेंट मिशन इन इराक के संपर्क में है ताकि हिंसा प्रभावित इलाकों में फंसे सभी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

 

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पूरे इराक पर आतंकी कब्जा करते जा रहे हैं. राजधानी बगदाद से 60 किलोमीटर दूर रह गये हैं विद्रोही आतंरी. विद्रोही बग़दाद पर कब्ज़ा जमाने में कामयाब हो गए, तो इराक में एक बार फिर से बर्बादी का सिलसिला शुरू हो सकता है. इराक की ऐसी हालत भारत के लिए भी संकट की वजह बन सकती है.