इशरत एनकाउंटर में क्या है पेन ड्राइव का खेल?

By: | Last Updated: Monday, 23 September 2013 4:08 AM
इशरत एनकाउंटर में क्या है पेन ड्राइव का खेल?

अहमदाबाद: इशरत
एनकाउंटर केस में सीबीआई ने
नरेंद्र मोदी कैबिनेट के
मंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा
से पूछताछ की है. मंत्री
भूपेंद्र सिंह चुड़ासमा से
पूछताछ होने वाली है. आरोप है
कि इन दोनों मंत्रियों की
आवाज एक ऑडियो पेन ड्राइव में
है.

सीबीआई की चार्जशीट के साथ
संलग्न दस्तावेजों का
हिस्सा है पेन ड्राइव. पेन
ड्राइव में मौजूद ऑडियो
रिकॉर्डिंग के आधार पर ही हो
रही है संबंधित लोगों से
पूछताछ.

जिस ऑडियो रिकॉर्डिंग के
सिलसिले में सीबीआई ने
गुजरात सरकार के दो
अधिकारिओं और अब एक मंत्री से
पूछताछ की है, वो इशरत जहां
फर्जी मुठभेड़ मामले की
चार्जशीट में अटैच किये गये
दस्तावेजों में से एक है.

दरअसल, सीबीआई ने जिन 162
दस्तावेजों को इशरत मामले की
चार्जशीट के साथ अटैच किया
है, उसमें आखिरी दस्तावेज वो
दो पेन ड्राइव हैं, जिसमें
ऑडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित
है. सीबीआई सूत्रों के
मुताबिक, पेन ड्राइव में
गुजरात सरकार के कुछ
मंत्रियों, वकीलों और
अधिकारियों के बीच हुई वो
बातचीत दर्ज है, जो नवंबर 2011
में हुई थी.

करीब घंटे भर की ये बातचीत
खुद आईपीएस अधिकारी जी एल
सिंघल ने चुपके से रिकॉर्ड कर
ली थी, जो उस बैठक में मौजूद
थे.

ग़ौरतलब
है कि एक दिसंबर 2011 के अपने
आदेश में गुजरात हाईकोर्ट ने
इशरत मामले की जांच करने वाली
एसआईटी को ये निर्देश दिया कि
वो इस मामले में सीबीआई के
सामने एक नई एफआईआर दर्ज
कराये, वो भी तब जब एसआईटी
जांच के दौरान ये बात सामने आ
चुकी है कि इशरत मुठभेड़
मामला फर्जी था. कोर्ट ने
अपने आदेश में इशरत मामले की
आगे की जांच सीबीआई को करने
का निर्देश भी दे डाला. इसी
आधार पर जांच करते हुए सीबीआई
ने इशरत जहां फर्जी मुठभेड़
मामले में 21 फरवरी 2013 को जीएल
सिंघल को गिरफ्तार किया, जो
उस वक्त गांधीनगर में स्टेट
क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में
एसपी के तौर पर तैनात थे.

ग़ौरतलब है कि सिंघल ने 
बातचीत के रिकॉर्ड वाली पेन
ड्राइव सीबीआई को तत्काल
नहीं सौंपी. दरअसल इस मामले
में नब्बे दिन के अंदर सीबीआई
ने जब चार्जशीट नहीं फाइल की
और सिंघल सहित आधे दर्जन
आरोपी पुलिस अधिकारियों को
इस मामले में इसी वजह से
डिफॉल्ट बेल मिल गई, उसके बाद
सिंघल ने दो पेन ड्राइव
सीबीआई को मुहैया कराये.
सीबीआई के दस्तावेजों की
सूची में ही इस बात का खुलासा
होता है. दस्तावेजों की सूची
में 162 नंबर के दस्तावेज की
इंट्री में इसका उल्लेख है.
इसके मुताबिक, सीबीआई ने 9 जून
2013 को उन दो पेन ड्राइव को
पंचनामा करा अपने कब्जे में
लिया, जो जीएल सिंघल ने उनको
मुहैया कराई. इन पेन ड्राइव
में स्टोर की गई बातचीत को ही
दस पन्नों की ट्रांसक्रिप्ट
के साथ सीबीआई ने चार्जशीट के
साथ रखा है. इसी ट्रासक्रिप्ट
और ऑडियो रिकॉर्ड के आधार पर
अब सीबीआई एक के बाद एक उन सभी
लोगों के बयान दर्ज कर रही है,
जिनकी बातचीत की रिकॉर्डिंग
पेन ड्राइव में मौजूद है.

अभी तक सूत्रों से मिली
जानकारी के मुताबिक, जिन तीन
लोगों से पूछताछ की गई है,
उन्होंने सीबीआई के सामने ये
कहा है कि जिस बैठक की बात पेन
ड्राइव में रिकॉर्ड है, वो
कोई औपचारिक बैठक नहीं थी.
दूसरा तर्क ये दिया गया है कि
बातचीत गुजरात हाईकोर्ट में
सुनवाई से पहले हुई थी और
इसके आधार पर कोई ऐसा कार्य
किया गया, जो अपराध की श्रेणी
में आता है. तीसरा तर्क ये कि
कोई भी अपना विचार व्यक्त
करने को स्वतंत्र है, और इसी
आधार पर बैठक में शामिल तमाम
लोग अपनी बात रख रहे थे.

गुजरात में सत्तारुढ़
बीजेपी चार्जशीट फाइल होते
वक्त ही ये आरोप लगा चुकी है
कि कांग्रेस की शह पर सीबीआई
ने सिंघल जैसे आरोपी पुलिस
अधिकारियों के साथ डील की. इस
डील के तहत एक तरह जहां
सीबीआई ने नब्बे दिन के अंदर
इस मामले में चार्जशीट फाइल
नहीं करके सिंघल जैसे आधा
दर्जन आरोपी अधिकारियों के
लिए जमानत का रास्ता साफ कर
दिया, वही इसकी एवज में सिंघल
ने जहां पेन ड्राइव मुहैया
कराये, वही उन पुलिस
अधिकारियों से बयान दिलवाये,
जिन्हें सीबीआई ने आरोपी
होने के बावजूद चार्जशीट
नहीं किया है.

गौरतलब है कि सीबीआई ने पेन
ड्राइव ऑडियो रिकॉर्डिंग
मामले में अभी तक कोई औपचारिक
बयान नहीं दिया है. देखना
दिलचस्प होगा कि बैठक में
मौजूद तमाम लोगों से पूछताछ
और उनके बयान दर्ज करने के
बाद सीबीआई इस मामले में क्या
रुख अपनाती है.

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